
बीएसपी विधायक उमाशंकर सिंह पर छापा, सियासी वार या कारोबारी टकराव?
बीएसपी विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की है। उसके बाद यूपी में सियासी और व्यापारिक साजिश के आरोपों की बहस तेज हो चली है।
बीएसपी के एकलौते विधायक उमाशंकर सिंह (बलिया जिले के रसड़ा से एमएलए) चर्चा में है। लखनऊ, वाराणसी से लेकर बलिया तक उनके ठिकानों पर इनकम टैक्स और ईडी ने छापेमारी की। उनके ठिकानों से 4.5 करोड़ नगदी की बरामदगी भी हुई है। नोटों को गिनने के लिए बैंकों से मशीने मंगानी पड़ी। आय से अधिक संपत्ति, उनके फर्मों में वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी और अनियमितता बताया गया है। लेकिन क्या बात सिर्फ इतनी सीधी है। योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपनी ही सरकार पर निशाना साधा।
दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेरी बेटी उमाशंकर सिंह के घर व्याही है। जहां उनके घर पर छापेमारी की गई। दो साल से ज्यादा समय से वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस हालत में उनका सारा समय और पैसा कमाने में नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने में खर्च हो रहा है. उनके लगभग सारे कारोबार ठप हो चुके हैं.प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्री अमेरिका में इलाज करवा रहे हैं और उसकी मॉनिटिरिंग कर रहे हैं. आज उमाशंकर सिंह कैंसर की चौथी स्टेज के कैंसर की बीमारी से लड़ रहे हैं. एजेंसी को ऐसे वक्त इस कार्यवाही से बचना चाहिए था। इस वक्त वो अपनी बेटी के साथ खड़े है मेरी पोस्ट का कोई राजनीतिक मायने न निकाले जाये.
बीएसपी मुखिया मायावती ने भी इस कार्रवाई को बहुत दुखद और अमानवीय बताया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह ने बसपा जॉइन करने के बाद पूरी ईमानदारी से काम किया। उन्होंने गलत तरीके से संपत्ति बनाई हो इसकी कोई शिकायत नहीं थी। अगर कोई शिकायत थी तो स्वास्थ्य को देखते हुए उनके ठीक होने के बाद पूछताछ की जा सकती थी। वही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि आयकर विभाग को छापेमारी कहां करनी है ये कौन तय करता है? यानी कि विपक्ष की ओर से आए ये दोनों बयान अप्रत्याशित नहीं थे।
सवाल यह है कि उमाशंकर सिंह के यहां छापेमारी क्या व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता है या इसके पीछे कोई सियासी वजह है। इस मसले पर यूपी की सियासत पर नजर रखने वाली सुनीता एरोन कहती हैं। देखिए उमाशंकर सिंह कैंसर से जंग लड़ रहे हैं। जहां तक उनके पृष्ठभूमि को देखिए तो कोई स्वच्छ छवि तो नहीं रही है। भले ही वो बीएसपी से जुड़े हों लेकिन उनका कारोबार सभी सरकारों में फला फूला। अगर मौजूदा सरकार की बात करें तो पूर्वांचल में ठेके पट्टों में भी वो पीछे नहीं रहे। ऐसे में जब कोई शख्स इतनी बड़ी व्यवस्था का हिस्सा बनता है तो स्वाभाविक तौर पर उसके खिलाफ जाने वालों की संख्या भी कम नहीं होती। ऐसे में यह मामला सियासी से कहीं अधिक व्यापारिक शत्रुता का नजर आता है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने चुनाव आयोग को दिए अपने शपथपत्र में बताया था कि वर्ष 2017 में उनकी कुल संपत्ति 40.19 करोड़ रुपये थी, जबकि 2012 में यह 20.75 करोड़ रुपये थी। यानी पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि आयकर रिटर्न (ITR) के आंकड़ों के अनुसार उनकी घोषित वार्षिक आय अलग तस्वीर पेश करती है। 2020-21 में उनकी आय 36.69 लाख रुपये, 2019-20 में 37.53 लाख रुपये, 2018-19 में 37.69 लाख रुपये रही। इससे पहले 2017-18 में 1.43 करोड़ रुपये और 2016-17 में 2.11 करोड़ रुपये आय दर्शाई गई थी। शैक्षिक रूप से उमाशंकर सिंह 12वीं पास हैं। उन्होंने 1988 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया था। वह सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड नामक कंपनी संचालित करते हैं, जिसमें उनकी पत्नी प्रबंध निदेशक (MD) हैं।
राजनीतिक रूप से वह 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए हैं। 2017 में भाजपा लहर के बावजूद उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। 2022 में जब बसपा का कोई अन्य उम्मीदवार जीत नहीं सका, तब भी उन्होंने पार्टी का खाता खोला और एकमात्र बसपा विधायक बने।
उनके परिवार की भी सार्वजनिक प्रोफाइल चर्चा में रही है। उनके बेटे प्रिंस यूकेश सिंह परिवार की कंपनी सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड से जुड़े हैं और सोशल मीडिया पर खुद को कंपनी का सीईओ बताते हैं। वर्ष 2024 में उनकी शादी यूपी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह की बेटी कनिका सिंह से हुई थी। इस विवाह समारोह में बसपा प्रमुख मायावती भी शामिल हुई थीं। राजनीतिक हलकों में उमाशंकर सिंह को मायावती के करीबी नेताओं में गिना जाता है।

