
केसी त्यागी की विदाई? पार्टी लाइन से बार-बार हटे तो JDU ने बनाई दूरी
JDU Politics: जेडीयू के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व अब इस विवाद को पीछे छोड़कर संगठन को मजबूत करने और आगे की राजनीतिक रणनीति पर ध्यान देने में जुटा है।
KC Tyagi separates from JDU: राजनीति में विदाई हमेशा मंच से नहीं होती, कई बार खामोशी से दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पार्टी के पुराने और भरोसेमंद चेहरों में गिने जाने वाले केसी त्यागी अब जेडीयू की कहानी का हिस्सा नहीं रहे। बयान दर बयान बढ़ती दूरी, पार्टी लाइन से अलग रुख और नेतृत्व की नाराजगी, इन सबने मिलकर एक ऐसे राजनीतिक अध्याय का अंत कर दिया, जिसे अब पार्टी खुद भी आगे बढ़ाना नहीं चाहती।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जेडीयू नेतृत्व ने केसी त्यागी से दूरी बना ली है और अब उनका पार्टी से कोई औपचारिक रिश्ता नहीं रह गया है। पिछले कुछ समय से केसी त्यागी के बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के अंदर नाराजगी थी। त्यागी लगातार पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान दे रहे थे, जिससे जेडीयू असहज महसूस कर रही थी। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बनाने का फैसला किया।
प्रवक्ता के बयान से साफ हुआ रुख
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान से यह साफ हो गया कि पार्टी अब केसी त्यागी को अपना प्रतिनिधि नहीं मानती। उन्होंने कहा कि केसी त्यागी पार्टी में हैं या नहीं, यह भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को साफ नहीं है। इसलिए उनके बयान निजी राय माने जाने चाहिए, न कि जेडीयू का आधिकारिक रुख।
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग
हाल ही में केसी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। अपने पत्र में त्यागी ने कहा था कि जैसे चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिया गया, वैसे ही नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं। लेकिन जेडीयू ने इस मांग से खुद को अलग कर लिया और साफ कर दिया कि यह पार्टी का आधिकारिक स्टैंड नहीं है।
सम्मानजनक लेकिन शांतिपूर्ण अलगाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडीयू और केसी त्यागी के बीच सम्मानजनक और शांतिपूर्ण अलगाव हुआ है। हालांकि, पार्टी ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है, क्योंकि त्यागी का पार्टी से पुराना और लंबा जुड़ाव रहा है। जेडीयू नेतृत्व यह भी मानता है कि केसी त्यागी ने पार्टी में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाई है, इसलिए किसी टकराव से बचा गया।
मुस्तफिजुर रहमान पर बयान
हाल ही में केसी त्यागी ने बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा था कि खेल में राजनीति नहीं लानी चाहिए और जब बांग्लादेश ने हिंदू खिलाड़ी लिट्टन दास को कप्तान बनाया है तो भारत को भी मुस्तफिजुर को आईपीएल में खेलने की अनुमति देनी चाहिए। जबकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के बाद भारत में मुस्तफिजुर के खिलाफ भारी विरोध हो रहा था। बीसीसीआई के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें रिलीज भी कर दिया था। जेडीयू का मानना है कि इस मुद्दे पर बयान देना न सिर्फ जनभावना के खिलाफ था, बल्कि इससे एनडीए गठबंधन में मतभेद भी दिखा।

