
‘फोकट’ के सवाल और ‘घंटा’ जैसी सड़कछाप भाषा वाले मंत्री क्या खुद वो गंदा पानी पियेंगे?
इंदौर में पानी कांड के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह मंत्री खुद उस गंदे पानी को पीने की हिम्मत करेंगे? मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सत्ता की संवेदनशीलता पर सीधे चोट करता है।
Indore Water Crisis: इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत ने प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस गंभीर हादसे पर सवाल पूछने वाले पत्रकार से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तीखी टिप्पणी ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। यानी कि उनका ये रवैया फिर से सुर्खियों में है। पत्रकार के सवाल पर ‘फोकट’ और ‘घंटा’ जैसी सड़कछाप भाषा इस्तेमाल करने वाले मंत्री को लेकर सवाल उठता है कि क्या वही लोग, जो जनता के लिए पानी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते, खुद उस गंदे पानी को पीने की हिम्मत करेंगे? मामला सिर्फ शब्दों का नहीं, जनता की जान और सरकारी जवाबदेही का भी है।
हाल की यह घटना उस समय हुई, जब एक पत्रकार ने विजयवर्गीय से पानी प्रदूषित की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया। कैमरे पर मंत्री ने पत्रकार से कहा कि 'फालतू सवाल मत पूछो' और इसके बाद उन्होंने एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जिसे असंवेदनशील और अभद्र माना जा रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
कैसे दूषित हुआ पानी?
प्रशासन के मुताबिक, विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ऊपर शौचालय बना दिया गया था। इसमें जरूरी सेफ्टी टैंक नहीं लगाया गया था, जिसके कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। इसी वजह से इलाके में डायरिया फैला और लोगों की जान गई।
मंत्री के पास अहम विभाग
कैलाश विजयवर्गीय के पास राज्य सरकार में शहरी विकास, आवास और संसदीय कार्य जैसे अहम विभाग हैं। इसी कारण उनसे इस मामले में ज्यादा जवाबदेही को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं विजयवर्गीय
⦁ अक्टूबर 2025 में इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों से छेड़छाड़ के मामले पर उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों को होटल से बाहर निकलने से पहले प्रशासन को सूचना देनी चाहिए थी। उन्होंने इसे “सबक” बताया था, जिस पर काफी आलोचना हुई।
⦁ सितंबर 2024 में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष (इशारों में राहुल गांधी) पर टिप्पणी करते हुए सार्वजनिक रूप से बहन को चूमने को “संस्कृति के खिलाफ” बताया था। कांग्रेस ने इस पर माफी की मांग की थी।
⦁ अगस्त 2024 में स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने 1947 की आज़ादी को “कटी-फटी आज़ादी” कहा और “अखंड भारत” का सपना दोहराया था।
⦁ अप्रैल 2023 में उन्होंने एक धार्मिक कार्यक्रम में कहा था कि “कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां शूर्पणखा जैसी लगती हैं”, जिस पर भारी विरोध हुआ।
⦁ जून 2025 में उन्होंने फिर महिलाओं के पहनावे पर टिप्पणी करते हुए इसे “विदेशी सोच” बताया था।
बेटे को लेकर भी रहा विवाद
विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय, जो 2019 में इंदौर-3 से विधायक थे, उस समय विवादों में आ गए थे जब उन पर नगर निगम अधिकारी को क्रिकेट बैट से मारने का आरोप लगा था। घटना का वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि, सितंबर 2024 में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, क्योंकि गवाह अधिकारी ने जिरह में कहा कि वह फोन में व्यस्त थे और हमलावर को पहचान नहीं सके।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ताजा बयान को लेकर विजयवर्गीय पर हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि जनता की मौतों जैसे गंभीर मुद्दे पर इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है और मंत्री को जवाबदेही दिखानी चाहिए।

