
16वें वित्त आयोग ने बदली राज्यों की किस्मत, कर्नाटक सबसे आगे-मध्य प्रदेश मायूस
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में कर्नाटक को भारी वित्तीय लाभ मिला है जबकि मध्य प्रदेश को अपेक्षा से कम फंड मिला है।
केंद्रीय बजट पेश किया जा चुका है। 2026 के बजट से जैसे आम आदमी को काफी उम्मीदें थी, ठीक उसी तरह से राज्य सरकारें भी इस बजट पर टकटकी लगाए बैठी थीं। बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणन ने कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं की। इस दौरान कई राज्य को बड़ा फायदा हुआ तो कुछ राज्यों को हाथ मायूसी लगी। अब इस नए बजट से जहां कर्नाटक को सबसे बड़ा फायदा हुआ है, तो वहीं मध्य प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है।
केंद्र सरकार देश के सभी राज्यों को टैक्स से मिलने वाला पैसा बांटती है। यह काम वित्त आयोग (Finance Commission) करता है। अब 16वें वित्त आयोग ने पैसा बाँटने का नया तरीका बनाया है। 2026 से 2031 तक के लिए सरकार ने पैसा बाँटने का नया फ़ॉर्मूला बनाया है। इस नए फ़ॉर्मूले में इस बात को ध्यान रखा गया है कि, अब राज्यों को पैसा सिर्फ जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात पर दिया जाए कि वे कितना अच्छा काम करते हैं, कितनी समझदारी से पैसे का इस्तेमाल करते हैं और देश की कमाई में कितना योगदान देते हैं। ऐसे में साफ है कि इस नए नियम से कुछ राज्यों को फायदा होगा तो कुछ को नुकसान झेलना पड़ेगा।
नए फ़ॉर्मूले के तहत सबसे बड़ा फायदा कर्नाटक को मिलने वाला है। नए नियम की वजह से कर्नाटक को मिलने वाला हिस्सा 3.65 प्रतिशत से बढ़कर 4.13 प्रतिशत हो गया है। अब कर्नाटक को ₹7,387 करोड़ की ज़्यादा राशि मिलेगी। इसके साथ ही कर्नाटक का कुल आवंटन बढ़कर ₹63,050 करोड़ तक पहुँच जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण फ़ॉर्मूले में राज्य के जीडीपी योगदान को 10 प्रतिशत वज़न दिया जाना है। जहां एक तरफ सरकार के इस नए फॉर्मूले से कर्नाटक को बड़ा फायदा हुआ है तो वहीं मध्य प्रदेश को सबसे ज़्यादा नुकसान झेलना पडेगा। जिसे इस नए फॉर्मूले के चलते ₹7,677 करोड़ की हानि होगी, क्योंकि मध्य प्रदेश का आवंटन घट गया है।
क्यों बढ़ा कर्नाटक का हिस्सा?
विनिर्माण, सेवा और तकनीकी कामों में कर्नाटक बहुत आगे है, इसलिए उसे इस नए बदलाव से सबसे ज़्यादा फायदा मिला है। आईटी हब होने और तेज़ी से काम करने की वजह से अब उसे ज़्यादा पैसा मिल रहा है। इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार अच्छे से काम करने वाले राज्यों को आगे बढ़ने के लिए इनाम देना चाहती है।
और किस-किस राज्य को होगा फायदा?
कर्नाटक के बाद केरल दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जिसे ₹6,975 करोड़ की अतिरिक्त राशि मिलेगी। इसके अलावा, गुजरात (₹4,228 करोड़) और हरियाणा (₹4,090 करोड़) को भी नए फ़ॉर्मूले से अच्छी बढ़त मिली है। वहीं, देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में शामिल महाराष्ट्र का हिस्सा बढ़कर 6.44 प्रतिशत हो गया है। इससे साफ समझ आता है कि नया फ़ॉर्मूला उन्हीं राज्यों को ज़्यादा इनाम दे रहा है, जो देश की कमाई और अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने में बड़ा योगदान करते हैं।
किन-किन राज्यों को हुआ नुकसान?
इस बदलाव का नकारात्मक असर भी कुछ राज्यों पर भी पड़ा है। मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है, जिसका आवंटन ₹7,677 करोड़ घट गया है। इसके अलावा, जिन राज्यों में लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है, उन्हें भी इस नए नियम से नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश को ₹4,884 करोड़ और पश्चिम बंगाल को ₹4,701 करोड़ कम पैसा मिलेगा। बिहार को भी ₹1,679 करोड़ का नुकसान हुआ है, लेकिन फिर भी वह कुल पैसा पाने वाले राज्यों में दूसरे नंबर पर बना हुआ है।
कुल मिलाकर, 16वें वित्त आयोग का यह नया फ़ॉर्मूला साफ संदेश देता है कि अब पैसा सिर्फ लोगों की गिनती देखकर नहीं, बल्कि यह देखकर बाँटा जाएगा कि कोई राज्य कितना अच्छा काम करता है और देश को आगे बढ़ाने में कितना योगदान देता है। यह बदलाव राज्यों को बेहतर काम करने, ज़्यादा निवेश लाने और तेज़ विकास करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
वित्त आयोग ने क्यों बदले नियम?
वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि यह बदलाव जानबूझकर किया गया है ताकि अच्छा और सही काम करने वाले राज्यों को इनाम दिया जा सके। आयोग ने बताया कि प्रति व्यक्ति जीएसडीपी (GSDP) का अंतर अब भी गरीबी कम करने और विकास जैसे लक्ष्यों को समझने में मदद करता है, लेकिन जीडीपी (GDP) में योगदान यह दिखाता है कि कोई राज्य कितनी अच्छी तरह अर्थव्यवस्था चला रहा है, पैसे को कैसे संभाल रहा है और टैक्स कितनी मेहनत से जुटा रहा है।
आयोग ने यह भी कहा कि सिर्फ टैक्स जुटाने की कोशिश को अलग से देखने पर राज्यों में ज़्यादा फर्क नहीं दिखता, क्योंकि यह लगभग लोगों की संख्या जैसा ही रहता है। इसलिए इससे नतीजों में ज़्यादा बदलाव नहीं आता। इसके मुकाबले, जीडीपी (GDP) में योगदान वाला मापदंड राज्यों के बीच साफ अंतर दिखाता है।
कुल मिलाकर, 16वें वित्त आयोग का नया फ़ॉर्मूला एक बड़ा बदलाव है। इसमें 42.5% वज़न प्रति व्यक्ति जीएसडीपी, 17.5% जनसंख्या और 10% जीडीपी में योगदान को दिया गया है। हालाँकि गरीब राज्यों की मदद अब भी ज़रूरी है, लेकिन अब तेज़ी से बढ़ने और देश की कमाई में ज़्यादा योगदान देने वाले राज्यों को साफ तौर पर ज़्यादा इनाम मिलेगा। यह अगले पाँच सालों में देश की वित्तीय व्यवस्था को नया रूप देगा।

