डीके शिवकुमार ने बैठे बिठाए BJP को दिया मुद्दा, क्या है संविधान बदलो राग?
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डीके शिवकुमार ने बैठे बिठाए BJP को दिया मुद्दा, क्या है संविधान बदलो राग?

कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का संविधान में बदलाव वाला बयान कांग्रेस के लिए मुसीबत बन गया है। संसद में बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस दोहरा नजरिया अब सामने आ चुका है।


DK Shivkumar News: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ऐसा बयान दे दिया है जिससे बीजेपी को कांग्रेस पर पलटवार करने का बड़ा मौका मिल गया है। कांग्रेस ‘संविधान बचाओ’ अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला कर रही थी, लेकिन अब बीजेपी को उसी मुद्दे पर कांग्रेस पर प्रहार करने का हथियार मिल गया है।

रविवार (23 मार्च) को एक टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिवकुमार ने कथित रूप से संविधान में बदलाव करने की संभावना जताई थी, जिससे कर्नाटक सरकार के हालिया फैसले को कानूनी वैधता दी जा सके। यह फैसला मुसलमानों को सरकारी ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) में 4% आरक्षण देने से जुड़ा था। पहले ही कर्नाटक सरकार को इस फैसले पर राज्य की बीजेपी इकाई से तीखी आलोचना झेलनी पड़ रही थी। अब शिवकुमार के बयान ने बीजेपी को इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मौका दे दिया है।

संसद में हंगामा

संसद के दोनों सदनों में सोमवार को बीजेपी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। राज्यसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि "कांग्रेस मुस्लिम लीग की भाषा बोल रही है और संविधान को नष्ट करने पर आमादा है"।

रिजिजू ने कहा कि "संवैधानिक पद पर बैठे एक कांग्रेस नेता का यह बयान बेहद गंभीर है, जिसे सदन नजरअंदाज नहीं कर सकता"। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से कांग्रेस का रुख स्पष्ट करने की मांग की। बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस पर "संविधान की रक्षा के नाम पर दोहरा चरित्र अपनाने" का आरोप लगाया।

खड़गे ने किया बचाव, लेकिन बयान पर सफाई नहीं दी

मल्लिकार्जुन खड़गे ने पहले ही कर्नाटक सरकार के मुस्लिमों को 4% आरक्षण देने के फैसले का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने शिवकुमार का बचाव नहीं किया और केवल यही कहा कि "हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे नष्ट कर रही है"। इस पर बीजेपी सांसदों ने सदन में जोरदार हंगामा किया।

बीजेपी ने मांग की कि धर्म के आधार पर आरक्षण के मुद्दे पर संसद में बहस होनी चाहिए और खड़गे को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी डीके शिवकुमार के "संविधान बदलने" के बयान का समर्थन करती है या नहीं।

बीजेपी ने शिवकुमार से इस्तीफे की मांग की

लोकसभा में बोलते हुए किरेन रिजिजू ने डीके शिवकुमार से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की और कहा,"कैसे कोई कांग्रेस नेता, जो संवैधानिक पद पर है, संविधान बदलने की बात कर सकता है? क्या यह मुस्लिम लीग का एजेंडा नहीं है?"बीजेपी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिससे सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

बीजेपी इस मुद्दे को नहीं छोड़ेगी

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को आसान तरीके से खत्म नहीं होने देगी। उनका दावा है कि शिवकुमार का बयान कांग्रेस की "संविधान विरोधी मानसिकता" का सबसे बड़ा उदाहरण है।

कांग्रेस इस विवाद में रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है। पार्टी यह जानती है कि वह सार्वजनिक रूप से शिवकुमार के बयान से खुद को अलग नहीं कर सकती, लेकिन साथ ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को मुस्लिमों को दिया गया 4% आरक्षण वापस लेने के लिए भी नहीं कह सकती। इससे कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।

बीजेपी का कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप

बीजेपी इस मुद्दे को कई मोर्चों पर कांग्रेस के खिलाफ हथियार बना रही है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को देना चाहती है।प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। अब कर्नाटक सरकार का मुस्लिमों को सरकारी ठेकों में आरक्षण देने का फैसला और शिवकुमार का कथित तौर पर संविधान बदलने की बात कहना बीजेपी को कांग्रेस पर और आक्रामक हमला करने का मौका दे रहा है।

इसके अलावा, बीजेपी इस मुद्दे को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकती है। यह सभी जानते हैं कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच आंतरिक सत्ता संघर्ष जारी है, और बीजेपी इस विवाद को और भड़काने की कोशिश कर सकती है।

क्या कांग्रेस बैकफुट पर जाएगी?

बीजेपी ने शिवकुमार के बयान को कांग्रेस के खिलाफ बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में "संविधान बचाओ" अभियान ने कांग्रेस को कुछ हद तक फायदा पहुंचाया था, लेकिन अब बीजेपी उसी मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ उल्टा इस्तेमाल कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेताओं ने पिछले साल "संविधान के 75 वर्षों" पर हुई बहस के दौरान कांग्रेस पर कई हमले किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि "संविधान को कमजोर करने के लिए कांग्रेस सरकारों ने कई बार इसे बदला" और "कांग्रेस एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी" रही है।

कांग्रेस के लिए संकट

इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पार्टी के पास दो ही विकल्प हैं या तो वह शिवकुमार के बयान से दूरी बना ले, जिससे पार्टी के मुस्लिम समर्थक नाराज हो सकते हैं।या फिर वह इस मुद्दे पर डटी रहे, जिससे बीजेपी को ‘संविधान बचाने’ के कांग्रेस के दावे पर सवाल उठाने का मौका मिल जाएगा।अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद से कैसे निपटती है और बीजेपी इस मुद्दे को कितना बड़ा बनाती है।

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