
बच्चों की स्क्रीन लत पर सख्ती, कर्नाटक में सोशल मीडिया बैन की तैयारी
कर्नाटक सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लाने की तैयारी में है, ताकि बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल जोखिमों को कम किया जा सके।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने शुक्रवार (6 मार्च) को घोषणा की कि राज्य सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल और इसके बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए लिया जा रहा है।
यह घोषणा कर्नाटक विधानसभा में वर्ष 2026–27 का राज्य बजट पेश करते समय की गई। करीब 4.20 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में कल्याणकारी योजनाओं और Bengaluru सहित अन्य पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंध का उद्देश्य उन बढ़ती चिंताओं को दूर करना है, जिनमें बच्चे लंबे समय तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल उपकरणों पर समय बिता रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले इस मुद्दे पर विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ भी चर्चा की गई थी और उनसे यह राय मांगी गई थी कि क्या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर सीमाएं लगाई जानी चाहिए।
कई महीनों से चल रही थी चर्चा
यह प्रस्ताव राज्य सरकार के भीतर कई महीनों से चल रही चर्चाओं का परिणाम है, जिसमें युवाओं के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते संपर्क को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार किया जा रहा था। राज्य के आईटी और बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने इस साल की शुरुआत में विधानसभा में कहा था कि सरकार युवा उपयोगकर्ताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार कर रही है।
इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडु राव (Dinesh Gundu Rao) ने भी बच्चों पर लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से पड़ने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी। वहीं भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुरेश कुमार (Suresh Kumar) ने सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
वैश्विक बहस का हिस्सा
कर्नाटक का यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर में बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने को लेकर बहस तेज हो रही है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं ब्रिटेन और फिनलैंड जैसे देशों में नीति निर्माता इसी तरह के सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं।
यूरोप के कुछ हिस्सों, खासकर फ्रांस और स्पेन में स्कूलों ने कक्षा में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर बेहतर तरीके से केंद्रित हो सके।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करना केवल प्रतिबंध लगाने से कहीं अधिक जटिल है।आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2025–26) में भी युवाओं के बीच अत्यधिक स्मार्टफोन उपयोग को बढ़ती चिंता बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इससे नींद से जुड़ी समस्याएं, चिंता, ध्यान में कमी और शैक्षणिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे अक्सर ऑनलाइन अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा कर देते हैं, बिना यह समझे कि इससे गोपनीयता से जुड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। ऑनलाइन ग्रूमिंग, डेटा संग्रहण और एल्गोरिदम के जरिए प्रभाव डालने जैसी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपकरण अधिक व्यापक हो रहे हैं।
कर्नाटक सरकार के इस प्रस्ताव के साथ यह बहस फिर तेज हो गई है कि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित कैसे रखा जाए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वे डिजिटल युग के अवसरों से वंचित न रहें।

