
सरकारी स्कूलों के विलय की योजना पर कर्नाटक में बवाल, बेंगलुरु में प्रदर्शन, 40 हजार सरकारी स्कूलों पर खतरा
शिक्षाविदों और छात्र संगठनों का आरोप है कि यह मर्जर योजना ‘निजीकरण की दिशा’ में कदम है, जिससे ग्रामीण और गरीब बच्चों को सुलभ शिक्षा से वंचित किया जाएगा।
कर्नाटक सरकार की उस प्रस्तावित योजना का कड़ा विरोध हो रहा है, जिसमें कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों को कर्नाटक पब्लिक स्कूल (KPS) मैग्नेट स्कूलों में मिलाने की बात कही गई है। शिक्षाविदों और छात्र संगठनों का कहना है कि यह योजना, जो एलकेजी से प्री-यूनिवर्सिटी (PU) स्तर तक एक ही छत के नीचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा करती है, दरअसल सरकारी स्कूलों को बंद करने की दिशा में कदम है।
बेंगलुरु में प्रदर्शन
राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में शुक्रवार (10 अप्रैल) को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें इस योजना को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई गई।
इस प्रदर्शन में महिला संगठनों, छात्र संगठनों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मजदूरों और किसानों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया, जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं।
राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों छात्र, अभिभावक, शिक्षाविद और आम लोग इस फैसले के खिलाफ अपना आक्रोश जताने पहुंचे।
इस रैली में कवि-शिक्षक एस. जी. सिद्धरामैया, लेखक और आलोचक मरुला सिद्धप्पा तथा शिक्षाविद निरंजनाराध्य जैसे प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) की कर्नाटक इकाई की अध्यक्ष के. एस. अश्विनी ने कहा, “सरकारी स्कूलों को किसी भी हालत में बंद नहीं होने दिया जाएगा। मैग्नेट योजना के नाम पर छोटे स्कूलों को बंद करने से ग्रामीण बच्चों के शिक्षा के अधिकार का हनन होगा। इस योजना के कारण 40,000 स्कूल बंद होने के खतरे में हैं।”
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
♦ KPS मैग्नेट योजना को तुरंत रद्द किया जाए
♦ हर गांव के सरकारी स्कूल में आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए
♦ स्कूलों का विलय या बंद करना बंद किया जाए
♦ सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अधिक फंड दिया जाए
प्रो-कन्नड़ कार्यकर्ता अवलामूर्ति ने रैली में कहा,“केपीएस मैग्नेट योजना के खिलाफ बड़े स्तर पर जन आंदोलन होना चाहिए। यही आंदोलन सरकारी स्कूलों को बचाने और मजबूत करने का रास्ता है। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले सभी खाली शिक्षक पदों को भरा जाना चाहिए। इस योजना को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।”
5–10 किमी दायरे में 8–10 सरकारी स्कूलों का विलय
इस योजना के तहत राज्य सरकार का लक्ष्य राज्य के हर ग्राम पंचायत में एक-एक कर कुल 6,000 KPS स्कूल स्थापित करना है। लेकिन पांच से दस किलोमीटर के दायरे में आठ से दस सरकारी स्कूलों को मिलाकर एक KPS स्कूल बनाने की योजना ने प्रदर्शनकारियों में नाराजगी पैदा कर दी है।
बेंगलुरु साउथ (पूर्व में रामनगर) जिले के चन्नपटना तालुका के होंगनूर ग्राम पंचायत के करीब सात गांवों में सरकारी स्कूलों के विलय के खिलाफ पहले ही विरोध शुरू हो चुका है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी KPS मैग्नेट स्कूल योजना को लेकर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है।
इसके बावजूद सरकार अपने रुख में ढील देने के संकेत नहीं दे रही है। होंगनूर KPS में छात्रों का नामांकन नहीं बढ़ा पाने के आरोप में पांच सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
क्या है KPS मैग्नेट स्कूल योजना?
KPS मैग्नेट स्कूल योजना एक “हब एंड स्पोक” मॉडल पर आधारित है, जिसे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार लागू करने की योजना बना रही है। इस योजना में कुछ स्कूलों को “मैग्नेट” (केंद्र) के रूप में विकसित किया जाएगा और आसपास के छोटे स्कूलों को उनसे जोड़कर उन्हें संसाधन केंद्र बनाया जाएगा।
यह मॉडल अमेरिका की मैग्नेट स्कूल प्रणाली से प्रेरित है।
सरकार ने कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र में 200 और खनन प्रभावित तालुकों में 100 KPS स्कूल शुरू करने का आदेश दिया है। इसके लिए क्रमशः KKRDB और KMERC फंड का उपयोग किया जाएगा।
बजट 2026–27 में मैग्नेट स्कूल
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा पेश किए गए कर्नाटक बजट 2026–27 में एशियाई विकास बैंक (ADB) के लोन के तहत 500 मैग्नेट स्कूल खोलने का फैसला किया गया है।
राज्य के स्कूल शिक्षा आयुक्त ने ADB प्रोजेक्ट, KKRDB और KMERC फंड के तहत कुल 800 मैग्नेट स्कूलों को KPS में अपग्रेड करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने हेतु KTPP एक्ट के अनुसार टेंडर जारी करने के निर्देश दिए हैं।
मैग्नेट स्कूलों की पहचान क्लस्टर स्तर पर ग्रेड कवरेज, नामांकन, लोकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर स्कोरिंग सिस्टम से की जा रही है। तीन से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे स्कूलों को KPS में मिलाया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य शिक्षा को एकीकृत करने के साथ बेहतर सुविधाएं देना, ड्रॉपआउट दर कम करना और शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करना बताया जा रहा है।
राज्य के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने विधानसभा में आश्वासन दिया है कि एक भी सरकारी स्कूल बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि आलोचक इस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
‘40,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद करने की तैयारी’
एआईडीएसओ (AIDSO) की कर्नाटक अध्यक्ष के. एस. अश्विनी ने कहा,“राज्य सरकार 40,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करने के उद्देश्य से KPS मैग्नेट स्कूल शुरू करने की तैयारी कर रही है। सरकारी स्कूलों को KPS में मिलाने के लिए एशियाई विकास बैंक से 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। हमारी संस्था इसका कड़ा विरोध करेगी।”
एआईडीएसओ के राज्य कोषाध्यक्ष सुभाष बेट्टडकोप्पा ने भी यही बात दोहराते हुए कहा,“KPS मैग्नेट योजना का उद्देश्य 40,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करना है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन इसका विरोध करेगी।”
‘गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करेगी योजना’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना मजदूरों, किसानों और खासकर दूरदराज क्षेत्रों की लड़कियों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर देगी। बेट्टडकोप्पा ने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में KPS स्कूल निजी हाथों में जा सकते हैं।
उन्होंने कहा,“सरकार चरणबद्ध तरीके से शिक्षा के निजीकरण की ओर बढ़ रही है। यही कारण है कि हम इस योजना का विरोध कर रहे हैं।”
चार महीने से जारी विरोध
एआईडीएसओ की बेंगलुरु जिला इकाई की सदस्य तुलसी ने बताया कि पिछले चार महीनों से इस फैसले के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। गांवों में भी लोग विरोध कर रहे हैं और तालुका व जिला स्तर पर छात्रों और शिक्षकों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
कई इलाकों में स्कूल बंद करने की तैयारी का आरोप
एआईडीएसओ के सूत्रों ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु नॉर्थ (पूर्व में बेंगलुरु ग्रामीण) जिले के डोड्डाबल्लापुर तालुका में 359 स्कूलों को बंद कर छह KPS मैग्नेट स्कूल शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
एआईडीएसओ के जिला पदाधिकारी कृष्णप्पा ने पुष्टि की कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को फील्ड एजुकेशन अधिकारियों की ओर से मौखिक निर्देश मिले हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो हफ्तों से हर गांव में इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा,“सरकारी स्कूलों को बचाने का अभियान डोड्डाबल्लापुर से शुरू किया गया है।”
सूत्रों के मुताबिक, इस्लामपुर सरकारी स्कूल, एलेपेट स्कूल, खासबाग सरकारी स्कूल सहित कई स्कूलों को KPS मैग्नेट योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन्हें रोजीपुर KPS मैग्नेट स्कूल से जोड़ा जाएगा।
कर्नाटक में सरकारी स्कूलों की स्थिति
कर्नाटक में कुल 47,493 सरकारी स्कूल और पीयू कॉलेज हैं। इनमें:
* 19,603 प्राथमिक स्कूल
* 21,676 उच्च प्राथमिक स्कूल
* 4,895 हाई स्कूल
* 1,319 पीयू कॉलेज शामिल हैं
वर्तमान में 309 KPS स्कूलों में करीब 3 लाख छात्र एलकेजी से पीयू स्तर तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। 2018-19 में KPS स्कूलों की संख्या 176 थी।
सरकारी स्कूलों में घटती नामांकन दर
सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट देखी गई है।
* 2015-16 में: 47.1 लाख छात्र
* 2025-26 में: 38.2 लाख छात्र
वहीं, निजी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है:
* 2015-16 में: 36.3 लाख
* 2025-26 में: 47 लाख
यह आंकड़े शिक्षा क्षेत्र में बदलते रुझानों और सरकारी स्कूलों के सामने बढ़ती चुनौतियों को दर्शाते हैं।

