एक विधवा का सोना, एक बच्ची का गुल्लक : ईरान के साथ कश्मीर की खामोश एकजुटता
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ईरानी दूतावास ने एक कश्मीरी बच्ची का वीडियो साझा किया, जिसमें वह ईरान के लोगों की मदद के लिए अपनी गुल्लक की बचत दे रही है। “God bless you” दूतावास की प्रतिक्रिया थी।

एक विधवा का सोना, एक बच्ची का गुल्लक : ईरान के साथ कश्मीर की खामोश एकजुटता

जम्मू-कश्मीर में विभिन्न समुदायों के लोग ईरान में संकट से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। दान अभियान में हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है और ईरान ने इसके लिए आभार जताया है।


युद्ध से जूझ रहे ईरान से करीब 2000 किलोमीटर दूर, एक महिला अपने हाथ में एक छोटा पैकेट लिए खड़ी थी। उसकी आवाज़ भावुक होकर भर आई, जब उसने उसे दान के रूप में सौंपा। उस पैकेट में सोने का एक टुकड़ा था, जिसे वह अपने पति की याद के रूप में संभालकर रखे हुए थी—पति का निधन 28 साल पहले हो चुका था।

लेकिन उसने इसे भी ईरान के लिए चल रहे राहत अभियान में दान कर दिया। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में अलग-अलग समुदायों के लोग मिलकर यह अभियान चला रहे हैं।

दिल छू लेने वाला कदम

यह भावुक योगदान उन हजारों छोटे लेकिन दिल से किए गए दानों में से एक था, जिसने भारत में ईरानी दूतावास को प्रभावित किया। दूतावास ने इसे ऐसा कार्य बताया, जिसे ईरान के लोग “कभी नहीं भूलेंगे।”

दूतावास ने X पर लिखा,"कश्मीर की एक सम्मानित बहन ने अपने दिवंगत पति की याद में रखा सोना, ईरान के लोगों के प्रति प्रेम और एकजुटता के साथ दान कर दिया। आपके आंसू और सच्ची भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं और इसे कभी नहीं भुलाया जाएगा। धन्यवाद कश्मीर, धन्यवाद भारत।”

बच्चों का भी योगदान

एक अन्य पोस्ट में दूतावास ने एक कश्मीरी बच्ची का वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपनी गुल्लक की बचत ईरान के लोगों की मदद के लिए देती दिख रही है। इस पर दूतावास ने लिखा—“God bless you।”

कई इलाकों में राहत अभियान

शिया नेता इमरान अंसारी ने प्रशासन से अपील की कि इस “आस्था और एकजुटता के सामूहिक प्रयास” को गरिमा के साथ जारी रहने दिया जाए और इस पर कोई अनावश्यक दबाव न बनाया जाए।

अधिकारियों के अनुसार, जदीबल, हसनाबाद, शालीमार, कमरवारी, लावेपोरा और बेमिना जैसे इलाकों में दान अभियान चलाए गए।

सुन्नी समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसी तरह बडगाम, बांदीपोरा और बारामूला जिलों में भी, खासकर शिया बहुल इलाकों में, ऐसे अभियान आयोजित हुए।

लोगों ने नकद, सोना, चांदी के बर्तन और तांबे के सामान तक दान किए।

चिंता भी जताई गई

ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान अंसारी ने कहा कि कश्मीरी लोग, खासकर शिया समुदाय, गहरी आस्था और समर्पण के साथ ईरान के समर्थन में आगे आए हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस अभियान से जुड़े लोगों को फंड के स्रोत को लेकर अधिकारियों के फोन आ रहे हैं।

उन्होंने कहा,"यह समझना जरूरी है कि ये दान पूरी तरह मानवीय और धार्मिक उद्देश्य से किए जा रहे हैं। लोगों की भावनाएं इससे जुड़ी हैं, और किसी तरह का अनावश्यक दबाव या सवाल सार्वजनिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।”*

भारत-ईरान संबंध

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं। फारसी प्रभाव से लेकर आज के दौर में व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग तक—दोनों देशों के रिश्ते समय के साथ विकसित होते रहे हैं।

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