
केदारनाथ, बदरीनाथ में बैन होगी गैर-हिंदुओं की एंट्री?, मंदिर समिति 47 मंदिरों में प्रवेश पर पाबंदी पर कर रही विचार
पाबंदी पर अभी फैसला नहीं हुआ है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रस्ताव जल्द ही बीकेटीसी बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा
हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने के प्रस्ताव के तुरंत बाद, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अपने अधीन आने वाले मंदिरों में भी ऐसा ही कदम उठाने पर विचार कर रही है। यह मंदिर समिति बदरीनाथ, केदारनाथ और 47 अन्य मंदिरों सहित चारधाम तीर्थों का प्रशासन करती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रस्ताव जल्द ही बीकेटीसी बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा और इसे अधिकांश हितधारकों का समर्थन प्राप्त है।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि प्रस्तावित प्रतिबंध दीर्घकालीन परंपरा पर आधारित है। द्विवेदी के मुताबिक, “आदि शंकराचार्य के समय से यह परंपरा चली आ रही है। धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में हमें कुछ भी गलत नहीं दिखता।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “इतिहास में इन धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहा है।”
संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए, जो धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है, द्विवेदी ने कहा कि समिति इस तरह का निर्णय लेने के अपने अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने यह स्पष्ट करने का भी प्रयास किया कि “गैर-हिंदू” शब्द को गलत तरीके से नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो हमारे विश्वास का सम्मान करते हैं, उनका स्वागत है। ये धाम आस्था के केंद्र हैं, पर्यटन स्थल नहीं।”
इस बीच, उत्तराखंड सरकार भी हरिद्वार के 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने और हरिद्वार व ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र शहर’ (धार्मिक नगरी) घोषित करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया की शुरुआत 14 जनवरी से प्रस्तावित हरिद्वार अर्धकुंभ से हो सकती है और इसमें गंगा सभा के संस्थापक मदन मोहन मालवीय से जुड़े 1916 के एक समझौते के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है।

