
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों पर चिंता, केंद्र सरकार से केरल की गुहार
खाड़ी संकट के बीच केरल के सीएम ने केंद्र से उड़ानें बढ़ाने, महंगे टिकट नियंत्रित करने और फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन Pinarayi Vijayan ने केंद्र सरकार से खाड़ी देशों से भारत के लिए उड़ानों की संख्या तुरंत बढ़ाने और बढ़े हुए हवाई किरायों को नियंत्रित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण हजारों भारतीय प्रवासी फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित रूप से स्वदेश लौटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री को पत्र
5 मार्च को प्रधानमंत्री Narendra Modi को लिखे पत्र में विजयन ने बताया कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण हवाई यात्रा बाधित होने से कई मध्य-पूर्वी देशों में भारतीय नागरिकों—जिनमें बड़ी संख्या केरल के लोगों की भी है—को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल खाड़ी सहयोग परिषद यानी Gulf Cooperation Council (GCC) देशों से भारत के लिए बहुत सीमित चार्टर्ड और नियमित उड़ानें ही संचालित हो रही हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों के पास घर लौटने का कोई व्यवहारिक विकल्प नहीं बचा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह एयरलाइनों और विमानन प्राधिकरणों के साथ तत्काल बातचीत कर खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख शहरों से भारत के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाए और हवाई संपर्क को बहाल करे।
अधिक शहरों के लिए उड़ानों की मांग
विजयन ने यह भी कहा कि खाड़ी से लौटने वाले यात्रियों के लिए भारत के कई शहरों, खासकर टियर-2 शहरों तक उड़ान सेवाएं बढ़ाई जानी चाहिए। अभी अधिकतर यात्रियों को कुछ बड़े हवाई अड्डों पर ही उतरना पड़ रहा है, जिससे भीड़ और व्यवस्थागत समस्याएं बढ़ रही हैं। यदि अधिक शहरों तक सीधी उड़ानें उपलब्ध होंगी तो यात्रियों को अपने राज्यों तक पहुंचने में आसानी होगी।
टिकट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
उड़ानों की कमी के अलावा मुख्यमंत्री ने संकट के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार कुछ एयरलाइंस खाड़ी शहरों से भारत के लिए चार्टर्ड सेवाओं पर सामान्य किराए से कई गुना अधिक शुल्क वसूल रही हैं।उन्होंने कहा कि इतनी ऊंची कीमतों के कारण कई प्रवासी भारतीयों के लिए यात्रा करना बेहद मुश्किल हो गया है, जबकि मौजूदा अनिश्चित स्थिति के कारण वे पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
विजयन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह एयरलाइन कंपनियों के साथ हस्तक्षेप कर किरायों को नियंत्रित करे और संकट की घड़ी में यात्रियों के शोषण को रोके। उनके मुताबिक उचित किराया सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि विदेशों में फंसे मजदूर और परिवार बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के स्वदेश लौट सकें।
केंद्रीय पंजीकरण प्रणाली का सुझाव
मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि तत्काल स्वदेश वापसी की जरूरत वाले लोगों की पहचान के लिए एक केंद्रीकृत पंजीकरण प्रणाली बनाई जाए। यह व्यवस्था क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों के माध्यम से या केंद्र सरकार द्वारा संचालित किसी विशेष ऑनलाइन पोर्टल के जरिए चलाई जा सकती है।
विजयन के अनुसार इस प्रणाली के जरिए ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जा सकेगी जिन्हें तुरंत मदद की जरूरत है—जैसे बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बीमार व्यक्ति या गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग। सीमित सीटों वाली उड़ानों में इन्हें प्राथमिकता देकर राहत कार्य अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को स्वदेश वापसी की योजनाओं के बारे में समय पर जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे लौटने वाले यात्रियों के स्वागत और आवश्यक सहायता के लिए उचित व्यवस्था कर सकें।
टूरिस्ट और विजिट वीजा पर फंसे लोग
पत्र में उन भारतीय नागरिकों की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है जो खाड़ी देशों में टूरिस्ट या विजिट वीजा पर गए थे। कई लोगों के पास वहां स्थायी आवास या आर्थिक सहारा नहीं है, जिससे उनकी स्थिति और अधिक कठिन हो गई है। ऐसे लोगों की जल्द से जल्द भारत वापसी सुनिश्चित करना जरूरी बताया गया है।
ट्रांजिट यात्रियों की परेशानी
एक अन्य वर्ग उन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का है जो खाड़ी के बड़े हवाई अड्डों को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करते हैं। अचानक उड़ान रद्द होने और क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण कई यात्री बीच यात्रा में ही फंस गए हैं। ऐसे यात्री अक्सर Dubai, Abu Dhabi, Doha और Kuwait City जैसे हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। इनमें से कई के पास अपना चेक-इन किया हुआ सामान भी नहीं है और उन्हें अस्थायी आवास या स्थानीय सहायता भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।इस स्थिति को देखते हुए विजयन ने ट्रांजिट यात्रियों के लिए अलग हेल्पलाइन या पंजीकरण प्रणाली बनाने का सुझाव दिया, ताकि उन्हें जल्द सहायता मिल सके।
मुख्यमंत्री ने इस पूरी स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को समन्वित राहत उपायों के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मध्य-पूर्व में फंसे भारतीय नागरिक सुरक्षित और समय पर अपने देश लौट सकें।

