
Maharashtra Civic Polls: निर्विरोध जीत या दबाव की राजनीति? महायुति की बढ़त पर सवाल
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले ही महायुति के 66 पार्षद निर्विरोध जीत गए। विपक्ष ने दबाव और पैसे के आरोप लगाए, चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दिए।
सबसे अधिक विजेता मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की अहम कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से सामने आए हैं, जहां महायुति के कुल 21 उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। इनमें से 15 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के और छह शिवसेना के उम्मीदवार हैं।
उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव, जो लंबे समय से भाजपा और शिवसेना दोनों के लिए उपजाऊ राजनीतिक क्षेत्र रहा है, ने भी दोनों दलों को समान रूप से लाभ पहुंचाया है। यहां दोनों पार्टियों को छह-छह सीटों पर जीत मिली और कुल मिलाकर एक दर्जन नगरसेवक निर्वाचित हुए। यही रुझान एमएमआर के पनवेल में भी देखने को मिला, जहां भाजपा के सात उम्मीदवार विजयी हुए।
भिवंडी, जो कुछ समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) का गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी सत्तारूढ़ दल ने बिना मुकाबले छह जीत दर्ज की हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृहक्षेत्र ठाणे में भाजपा के साथ मतभेद साफ नजर आने के बावजूद, उनकी शिवसेना ने छह सीटें जीतने में सफलता हासिल की है। वहीं, राज ठाकरे की मनसे ने जिले में विरोध प्रदर्शन किया और सत्तारूढ़ गठबंधन की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से अहम लाभ दर्ज किए गए। धुले में भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जबकि अहिल्यानगर में एनसीपी ने दो और भाजपा ने एक सीट पर जीत हासिल की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्विरोध जीत हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों में लगभग क्लीन स्वीप के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक और बड़ा संबल साबित होंगी। इससे पार्टियों को अन्य क्षेत्रों में चुनाव प्रचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की भी सुविधा मिलेगी।

