
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: NCP छोड़कर सभी पार्टियों के लिए उम्मीदें और फायदे
BJP ने महाराष्ट्र में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जबकि उद्धव ठाकरे और उनके शिवसेना (UBT) गुट ने मुंबई में अपनी विरासत को बचाया है। कांग्रेस ने कुछ मजबूत प्रदर्शन किया, AIMIM ने मुस्लिम वोटों में अपनी पकड़ दिखाई और NCP को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा।
महाराष्ट्र के 29 नगर निगम चुनावों का नतीजा एक राजनीतिक ड्रामा से कम नहीं रहा। BJP ने जैसे ही अपनी धमाकेदार बढ़त दिखाई, वहीं शिवसेना के दोनों गुट कांग्रेस और NCP की रणनीतियां भी उंगलियों पर टिक गईं। मुंबई में BMC का कंट्रोल तो छिन गया, लेकिन उद्धव ठाकरे ने अपनी विरासत को जिंदा रखा। वहीं, AIMIM और शिंदे शिवसेना ने भी अपने दम दिखाया। चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि महाराष्ट्र की सियासत अब पुरानी ताकतों और नए गठबंधनों के बीच एक नई जंग की ओर बढ़ रही है।
महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनावों में भाजपा (BJP) ने अब तक सबसे बड़ा फायदा उठाया है। पार्टी ने कुल 2,869 वार्डों में से 1,425 वार्ड जीतकर बढ़त बनाई है। हालांकि, अन्य बड़ी पार्टियों के लिए भी कुछ सकारात्मक परिणाम हैं। सबसे बड़ी निराशा एनसीपी (Sharad Pawar और Ajit Pawar) के लिए रही, जिन्हें अपनी पुरानी मजबूत जगहों पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भी सफलता नहीं मिली, जबकि उन्होंने गठबंधन में चुनाव लड़ा था।
BJP की जीत
BJP के लिए यह चुनाव महाराष्ट्र में उसकी सत्ता की पुष्टि करने वाला साबित हुआ। पार्टी अब मुंबई में अपना पहला मेयर पाने जा रही है और कुल मिलाकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी ने 2,869 वार्डों में से 1,425 वार्ड जीते, जो उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे शिवसेना से 1,000 से अधिक हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में मिली जीत BJP को आगे काम करने और मजबूत आधार बनाने का अवसर देती है। इस जीत से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की साख भी बढ़ी है, जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था।
शिवसेना (UBT) और MNS
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने भले ही BMC का नियंत्रण खो दिया हो, लेकिन मुंबई में पार्टी की विरासत पर उद्धव का नियंत्रण बना हुआ है। पार्टी ने 65 वार्ड जीतकर एक मजबूत संदेश दिया, जो एकनाथ शिंदे शिवसेना के 29 वार्डों से दोगुना है। शिंदे के घर के वार्ड 13A में जीत एक प्रतीकात्मक चुनौती रही। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी गठबंधन से 6 वार्ड जीतने में सफल रही, जो 2017 के सात वार्डों से केवल एक कम है।
कांग्रेस
एनसीपी और शिवसेना (UBT) जैसे सहयोगी न होने के बावजूद कांग्रेस ने 324 वार्ड जीतकर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर अपनी मौजूदगी दिखाई। BMC में पार्टी ने 25 वार्ड जीतकर शिवसेना-BJP और ठाकरे परिवार के गठबंधन के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई।
शिवसेना (एकनाथ शिंदे)
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मुंबई में UBT शिवसेना को हराने का प्रयास किया, जो पूरी तरह सफल नहीं हो सका। हालांकि, BMC में लगभग 30 सीटें जीतकर शिंदे ने अपनी राजनीतिक जीवंतता दिखाई। ठाकरे गुट के खिलाफ यह नतीजा शिंदे को BJP के साथ बातचीत में एक रणनीतिक लाभ भी देता है। ठाणे में बड़ी जीत से शिंदे की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है।
एआईएमआईएम
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 29 निगमों में कुल 95 सीटें जीतकर मुस्लिम वोटरों का भरोसा हासिल किया। छत्रपति संभाजीनगर में 24 सीटें और मालेगांव में 20 सीटें AIMIM के लिए सबसे बड़ी जीत रही।
एनसीपी और एनसीपी (SP)
अजित और शरद पवार की NCP के लिए गठबंधन ने कोई फायदा नहीं किया। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ निगमों में नियंत्रण हासिल नहीं कर पाना बड़ी हार है। अजित पवार के लिए यह नुकसान खासकर भारी है, क्योंकि वे राज्य स्तर पर BJP के साथ गठबंधन में हैं। यह उनकी राजनीतिक साख और भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।

