
महाराष्ट्र: राज्यसभा चुनाव को लेकर MVA में रार, एक सीट के लिए तीन दावेदार
महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा, केवल एक सीट जीतने की स्थिति में खड़ी अघाड़ी के भीतर शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP (SP) में खींचतान।
Rajya Sabha And Maharashtra Politics : महाराष्ट्र में राज्यसभा और विधान परिषद के आगामी चुनावों ने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के घटक दलों शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP (SP) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। 2024 के विधानसभा चुनावों में एनडीए (NDA) की प्रचंड जीत के कारण इन 7 में से 6 सीटें सत्ताधारी गठबंधन के पाले में जाने की संभावना है। विपक्ष के पास केवल एक सीट जीतने लायक संख्या बल बचा है। इसी एक सीट पर दावेदारी को लेकर अब अघाड़ी के भीतर खींचतान मची है। उद्धव ठाकरे जल्द ही इस मुद्दे पर कांग्रेस आलाकमान से चर्चा करने दिल्ली जा सकते हैं।
आंकड़ों का गणित: किसके पास कितनी ताकत?
महाराष्ट्र की एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 36 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान विधानसभा में शिवसेना (UBT) के पास 20 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 16 और शरद पवार की NCP (SP) के पास 10 विधायक हैं। तीनों दलों को मिलाकर अघाड़ी के पास 46 वोट होते हैं, जो एक सीट के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन पेंच यह है कि यह एक सीट किसके खाते में जाएगी? शिवसेना (UBT) का तर्क है कि उनके पास सबसे ज्यादा विधायक हैं, इसलिए हक उनका बनता है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि उसे या तो राज्यसभा की सीट मिले या फिर विधान परिषद की।
दिग्गजों की साख दांव पर: शरद पवार का अगला कदम क्या होगा?
रिटायर होने वाले सांसदों में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस की फौजिया खान व रजनी पाटिल शामिल हैं। संजय राउत का कहना है कि सीटों का फैसला आपसी बातचीत से होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बहुत कुछ शरद पवार की भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करेगा। चर्चा यह भी है कि शुरुआती बातचीत में शरद पवार की पार्टी को शामिल नहीं किया गया है। इससे गठबंधन के भीतर नए समीकरणों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राउत ने कहा कि कांग्रेस के फैसले दिल्ली में होते हैं, जबकि शिवसेना और NCP के फैसले मुंबई में लिए जाते हैं।
विधान परिषद का मोर्चा: उद्धव ठाकरे की सीट पर भी पेच
राज्यसभा के साथ-साथ विधान परिषद की 9 सीटें भी खाली हो रही हैं। इनमें से एक सीट खुद उद्धव ठाकरे की है। विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए 29 वोटों की जरूरत है। अघाड़ी के पास 46 विधायक हैं, जिससे वे आसानी से एक सीट जीत सकते हैं। शिवसेना (UBT) का तर्क है कि उद्धव ठाकरे एक राजनीतिक दल के प्रमुख हैं, इसलिए उनकी सीट पर कोई समझौता नहीं हो सकता। कांग्रेस अपनी दावेदारी पेश कर रही है ताकि वह उच्च सदन में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सके।
संजय राउत की सफाई: "मतभेद सामान्य, संवाद जारी है"
सीटों को लेकर मचे घमासान के बीच संजय राउत ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में शुरुआती मतभेद सामान्य बात है। आदित्य ठाकरे पहले ही कह चुके हैं कि विधानसभा में संख्या बल के आधार पर शिवसेना (UBT) को राज्यसभा की सीट मिलनी चाहिए। विपक्ष के लिए चुनौती यह है कि अगर वे एकजुट नहीं रहे, तो एनडीए उनकी इस कमजोरी का फायदा उठा सकता है। 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले अघाड़ी को अपनी आपसी कलह सुलझानी होगी, वरना एक सीट जीतना भी मुश्किल हो सकता है।
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