ओडिशा में बड़ा उलटफेर, विपक्षी विधायकों ने BJP समर्थित उम्मीदवार को जिताया
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कांग्रेस के अलावा बीजेडी के भी दो विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया।

ओडिशा में बड़ा उलटफेर, विपक्षी विधायकों ने BJP समर्थित उम्मीदवार को जिताया

ओडिशा में राज्य सभा चुनाव के लिए हुए मतदान में पांच कांग्रेस और बीजेडी विधायकों ने भाजपा समर्थक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात क अंदाजा था कि भाजपा हॉर्स ट्रेडिंग करेगी।


ओडिशा में चल रहे राज्यसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दोनों पार्टियों के कम से कम पाँच विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में वोट दिया है। राज्य में 12 साल बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, क्योंकि इस बार चार सीटों के लिए पाँच उम्मीदवार मैदान में हैं। ये सीटें 2 अप्रैल को खाली होने वाली हैं।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने उन तीन विधायकों के नाम बताए जिन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस ने भाजपा के पक्ष में वोट दिया है।”

कांग्रेस के अलावा बीजेडी के भी दो विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। बांकी विधानसभा क्षेत्र के बीजेडी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को वोट दिया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी के कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने का विरोध करता हूं। भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट देना बीजू पटनायक की विरासत के अनुरूप है, जिन्होंने हमेशा कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी।”

इसके अलावा बीजेडी के एक अन्य विधायक सौविक बिस्वाल के बारे में उनकी पत्नी ने दावा किया कि उन्होंने भी पार्टी लाइन के खिलाफ वोट दिया। उनका कहना था, “मेरे ससुर प्रभावत बिस्वाल को हाल ही में बीजेडी से निकाल दिया गया और पार्टी के भीतर उनका अपमान हुआ। मेरे पति ने पार्टी के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया।”

इस घटनाक्रम पर बीजेडी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि भाजपा और उसके सहयोगी दल हॉर्स ट्रेडिंग करेंगे। जो विपक्षी विधायक भाजपा को वोट दे रहे हैं, उनका आपराधिक रिकॉर्ड है और वे जेल भी जा चुके हैं।”

राज्यसभा चुनाव की स्थिति भी इस बार दिलचस्प है। ओडिशा में चार सीटों के लिए पाँच उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए 12 साल बाद यहां मतदान हो रहा है। भाजपा की ओर से राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार उम्मीदवार हैं। वहीं बीजेडी ने संतुप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता को मैदान में उतारा है, जिन्हें कांग्रेस और सीपीआईएम का समर्थन भी मिला है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है।

चौथी सीट को लेकर मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो भाजपा के पास और न ही विपक्ष के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में भाजपा दो सीटें जीतने के बाद तीसरी सीट पर नजर लगाए हुए है, जबकि बीजेडी एक सीट पर मजबूत स्थिति के बाद दूसरी सीट जीतने की कोशिश कर रही है। इसी कारण इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।

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