SIR पर चुनाव आयोग से आमने-सामने ममता, राष्ट्रीय लड़ाई की तैयारी
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SIR पर चुनाव आयोग से आमने-सामने ममता, राष्ट्रीय लड़ाई की तैयारी

चुनाव आयोग के SIR फैसले पर ममता बनर्जी ने मोर्चा तेज किया है। दिल्ली जाकर वह इसे लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर खतरा बताकर राष्ट्रीय समर्थन जुटाएंगी।


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग (ईसी) के साथ अपने टकराव को और तेज करने की तैयारी में हैं। यह टकराव मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर है, जिसे अब वह केवल राज्य स्तर का विवाद न मानकर एक व्यापक राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का रूप देना चाहती हैं। खुद को गैर-बीजेपी और गैर-एनडीए दलों के लिए एकजुट करने वाली नेता के तौर पर प्रस्तुत करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह एक अन्यायपूर्ण और खराब तरीके से योजनाबद्ध प्रक्रिया चला रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों और संघीय ढांचे के लिए खतरा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे अपने एक पत्र में ममता बनर्जी ने कहा, “यदि मौजूदा स्वरूप में SIR को जारी रहने दिया गया, तो इससे अपूरणीय क्षति होगी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम कटेगा और लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला होगा।”

ईसी अधिकारियों से मिलेगा टीएमसी प्रतिनिधिमंडल

ममता बनर्जी के अगले सोमवार (2 फरवरी) को नई दिल्ली जाने की संभावना है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को उस दिन शाम करीब 4 बजे निर्वाचन सदन में अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने बुधवार (28 जनवरी) को लिखित रूप में यह जानकारी मुख्यमंत्री को दी।

प्रतिनिधिमंडल में कौन होंगे शामिल

प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, कई सांसद और उन लोगों के परिवार के सदस्य शामिल हो सकते हैं, जिनकी मौत कथित तौर पर SIR प्रक्रिया से जुड़ी चिंता और तनाव के कारण हुई है। पार्टी नेताओं का यह भी दावा है कि कुछ ऐसे लोग, जो जीवित हैं लेकिन मतदाता सूची में “मृत” दर्ज कर दिए गए हैं, वे भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं। इससे, उनके अनुसार, इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की गंभीर खामियां उजागर होंगी।

दिल्ली यात्रा में देरी

ममता बनर्जी के अपने दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सीधे मुलाकात करने की भी उम्मीद है। पहले वह बुधवार (28 जनवरी) को ही दिल्ली जाकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली थीं, लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक हवाई दुर्घटना में मौत और रविवार को कोलकाता में लगी भीषण आग के कारण उन्होंने यात्रा टाल दी।

सिंगूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि वह “एक-दो दिन के भीतर” दिल्ली जाएंगी। चुनाव आयोग द्वारा समय दिए जाने के बाद इस योजना को और गति मिली।

पश्चिम बंगाल में SIR और विवाद

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हुई थी। इसके बाद से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं, जिनके लिए परिजनों ने कथित SIR से जुड़ी दहशत को जिम्मेदार ठहराया है। शुरू से ही टीएमसी ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि इसे जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किया गया। टीएमसी का आरोप है कि आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और आशंका है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा सकता है।

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता में संयुक्त रूप से सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किए और चुनाव आयोग पर बीजेपी-नीत केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

चुनाव आयोग को पत्र और चेतावनी

ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कई पत्र लिखकर कथित अनियमितताओं का विवरण दिया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इनमें से किसी का भी जवाब नहीं मिला। उन्होंने बार-बार चेतावनी दी है कि यदि एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया, तो टीएमसी अपने आंदोलन को और तेज करेगी।

इससे पहले अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली गया था और ज्ञानेश कुमार से मिला था। इसके बाद पार्टी ने SIR के खिलाफ अपने हमले और तेज कर दिए। अभिषेक ने इस मुद्दे पर राजधानी में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी।

राजनीतिक एकजुटता की कोशिश

इस बीच ममता बनर्जी इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक एकजुटता बनाने की कोशिश में भी जुटी हैं। मंगलवार को उन्होंने कोलकाता में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से मुलाकात की। अखिलेश ने ममता को बीजेपी के राष्ट्रीय एजेंडे को चुनौती देने में सक्षम एक अहम नेता बताया, जिससे क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने में उनकी बढ़ती भूमिका और मजबूत हुई।

दिल्ली प्रवास के दौरान ममता बनर्जी कई गैर-एनडीए नेताओं से मुलाकात कर सकती हैं। वह SIR विवाद को चुनावी निष्पक्षता, लोकतांत्रिक सुरक्षा और संघीय ढांचे के लिए एक बड़े खतरे के रूप में पेश करने की रणनीति अपना रही हैं।

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा न केवल पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे टकराव में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, बल्कि भविष्य की चुनावी लड़ाइयों से पहले ममता बनर्जी को एक राष्ट्रीय विपक्षी नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात के बाद कहा, “पूरे देश में अगर कोई बीजेपी को प्रभावी ढंग से चुनौती दे रहा है, तो वह ममता दीदी हैं। और बीजेपी का असली मुकाबला उसी तरह से किया जा सकता है, जैसा वह कर रही हैं।” यह बयान राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति में ममता बनर्जी की उभरती भूमिका को रेखांकित करता है।

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