
दलित वोट, युवा जोश और रोड शो, बीएसपी का नया प्लान ऑफ एक्शन
2027 चुनाव में प्रासंगिक बने रहने के लिए मायावती ने आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी दी है। रोड शो और जनसंवाद से बीएसपी वापसी की कोशिश में है।
यूपी की सियासत में वैसे तो चार बड़े राजनीतिक दल बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बीएसपी और कांग्रेस हैं। लेकिन चुनौती कांग्रेस और बीएसपी के सामने सबसे अधिक है। कांग्रेस खुद के लिए जमीन तलाश रही है तो दूसरी तरफ बीएसपी के लिए अस्तित्व का संकट है। अगर 2022 विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव नतीजों को देखें तो बीएसपी का विधानसभा में सिर्फ एक विधायक है और लोकसभा में कोई भी सांसद नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर यूपी और देश की सियासत में मायावती को प्रासंगिक बने रहना है तो 2027 विधानसभा चुनाव जीतना जरूरी होगा। ऐसे में मायावी ने बीएसपी संगठन में आमूलचूल बदलाव के तहत अपने भतीजे आकाश आनंद को अहम जिम्मेदारी सौंप चुकी है।
यूपी फतह करने के लिए बीएसपी सभी जिलों में रोड शो और सभा की रणनीति पर काम कर रही है। बीएसपी के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद हर जिले में जाएंगे और आम लोगों से संवाद करेंगे। इसके साथ ही कोशिश हो रही है कि दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी में शामिल करा यह संदेश दिया जाए कि बीएसपी कहीं से भी कमजोर नहीं है।
आकाश आनंद ने साल 2027 में राजनीति में एंट्री ली थी। सहारनपुर की सभा में वो अपनी बुआ और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ दिखे थे। 2019 में नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। उस वक्त बीएसपी और सपा का गठबंधन कट चुका था। लेकिन 2024 वो साल रहा जब आकाश आनंद मुखर होकर विधानसभा चुनाव के प्रचार में जुटे। हालांकि सीतापुर में मोदी-योगी सरकार के खिलाफ बयान के बाद मायावती में उन्हें प्रचार अभियान से हटा लिया। मायावती के फैसले को कई नजरियों से देखा गया। मसलन मायावती बीजेपी से डर गईं और दूसरी थ्योरी यह रही कि वो नहीं चाहती थीं कि आकाश के सियासी करियर पर ग्रहण ना लग जाए।
अब आकाश पर दांव लगाने के पीछे क्या वजह है। यूपी की सियासत पर नजर रखने वाले कहते हैं कि आकाश की उम्र 30 साल है। वो मायावती के बाद बीएसपी में सबसे अधिक अपील करने वाले नेता हैं। यही नहीं युवा उन्हें बड़ी संख्या में सुनने के लिए आते हैं। लेकिन 2024 में जब उन्हें चुनाव प्रचार से अलग कर दिया गया तो बीएसपी के युवा वोटर्स में भारी निराशा हुई। बीएसपी के कोर वोटर्स को लगा कि कहीं न कहीं बीजेपी के दबाव में निर्णय ले रही हैं। इससे बीएसपी को तीन तरह से नुकसान हो गया। पहला- दलितों का बड़ा वोट पीडीए के नाम पर कांग्रेस-सपा गठबंधन की तरफ चले गए। दूसरा- बीएसपी साल 2024 में खाता नहीं खोल सकी जबकि साल 2019 में पार्टी के 10 सांसद थे। तीसरा- आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाज नगीना से सांसद बनने में कामयाब हुए।
इन तीन गलतियों के बाद बीएसपी को यह समझ में आया कि यूपी खासतौर पर पश्चिम यूपी में उनसे कहां चूक हुई। अब इस चूक को दुरुस्त करने के लिए आकाश आनंद को मायावती ने बड़ी जिम्मेदारी दी। आकाश के जरिए वो चंद्रशेखर आजाद की लोकप्रियता पर ब्रेक लगाना चाहती हैं। दूसरी तरफ आकाश की स्वीकार्यता पार्टी के अंदर बढ़ाना चाहती हैं। इसका फायदा यह होगा कि जब कभी आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी बनाने का मन बनाती हैं तो पार्टी के अंदर किसी तरह का विरोध नहीं होगा।
आकाश आनंद क्या 2027 में बीएसपी के मुख्य चेहरा होंगे। इस विषय पर जानकार कहते हैं कि आकाश पार्टी को जोरशोर से आगे बढ़ाएंगे। लेकिन मुख्य चेहरा तो मायावती ही रहेंगी। उसके पीछे वजह यह है कि अपने जन्मदिन पर मायावती यह कह चुकी हैं कि बीएसपी के कार्यकर्ता उन्हें पांचवीं बार सीएम बनाने का मन बना चुके हैं। इससे साफ है कि मायावती ही मुख्य चेहरा होंगी। वैसे कहा भी जाता है कि बीएसपी में नंबर 1 से लेकर 10 तक सभी जगहों पर मायावती काबिज हैं। यहां पर यूपी के जातीय समीकरण को भी समझना जरूरी है।
यूपी में 40 फीसद ओबीसी, दलित 20 फीसद, सवर्ण 19 फीसद, मुस्लिम 19 फीसद और अन्य 2 फीसद हैं। अगर जातियों की संख्या को देखें तो मायावती सही तरीके से समीकरण साध कर लखनऊ की गद्दी हासिल कर सकती हैं। लेकिन अब राजनीति साल 2000, साल 2007, 2012, 2017 वाली नहीं रग गई है। इस बात को मायावती बखूबी समझती हैं लिहाजा आकाश आनंद को जिम्मेदारी दी गई है कि वो सूबे के सभी जनपदों में रोडशो, छोटी छोटी जनसभाओं के जरिए बीएसपी को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सकें।

