ब्राह्मणों को बाटी-चोखा नहीं सम्मान चाहिए… पुराने समीकरण पर दांव लगाने को तैयार मायावती
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ब्राह्मणों को बाटी-चोखा नहीं सम्मान चाहिए… पुराने समीकरण पर दांव लगाने को तैयार मायावती

बीएसपी सुप्रीमो मायावती 'पॉलिटिकल कमबैक’ के लिए पुराना समीकरण दोहराना चाहती हैं।अपने जन्मदिन पर हमेशा अपने कैडर और वोटरों को संदेश देने वाली मायावती ने बीजेपी से कथित नाराज़गी के माहौल को भांपकर ब्राह्मणों को संदेश देने की कोशिश की है।


बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने ब्राह्मणों को कहा है कि उनको किसी का बाटी-चोखा खाने की ज़रूरत नहीं, उनको सम्मान चाहिए।अपने 70 वें जन्मदिन पर मायावती ने विधानसभा चुनाव मज़बूती से लड़ने की बात कहकर अपने कैडर और वोटरों को संदेश दिया तो वहीं 'सोशल इंजीनियरिंग’ के अपने पुराने फ़ॉर्म्युले पर दांव लगाने के संकेत भी दिए।इसी समीकरण को साधकर बीएसपी ने 19 साल पहले सत्ता हासिल की थी।

बीजेपी से ब्राह्मणों को कथित नाराज़गी के बाद मायावती का दांव-

दलित वोट पर फोकस कर आगे बढ़ने वाली बहुजन समाज पार्टी ने 2007 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में एंट्री की।इसमें पार्टी के एक नए प्रयोग दलित+ब्राह्मण के फॉर्म्युले की अहम भूमिका रही।अब इसी सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्म्युले पर एक बार फिर मायावती दांव लगाना चाहती हैं।अपने 70 वें जन्मदिन पर बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने यह संकेत दिए।उन्होंने सीधे तौर पर हाल ही में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक और ब्राह्मणों की बीजेपी और प्रदेश सरकार से कथित नाराज़गी का मुद्दा लपकते हुए ब्राह्मणों को संदेश दे दिया।मायावती ने कहा कि 'ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं चाहिए।वो किसी से डरने वाले भी नहीं हैं।’ उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्राह्मणों को बीएसपी सरकार में उचित प्रतिनिधित्व दिया गया था।स्पष्ट है कि हाशिए पर पड़ी बीएसपी के पॉलिटिकल कमबैक के लिए मायावती पुराने फॉर्म्युले पर दांव लगाना चाहती हैं।वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन कहती हैं कि 'मायावती ब्राह्मणों के साथ दलित वोट को मिलाकर सोशल इंजीनियरिंग के बल पर ही सरकार बना पायीं हैं।और इस समय जब ब्राह्मण बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं तो हर पार्टी ब्राह्मणों क़ी तरफ़ पासा फेंक रही है।ऐसे में मायावती यह क्लेम कर रही हैं कि उनकी सरकार में ब्राह्मणों को सबसे ज़्यादा सम्मान मिला था।’

सोशल इंजीनियरिंग के समीकरण से सत्ता में आई थी बीएसपी-

दरअसल मायावती अपने पुराने फॉर्म्युले पर वापस जाना चाहती हैं जिसकी वजह से 2007 में पार्टी पूर्ण बहुमत से यूपी की सत्ता पर क़ाबिज़ हुई थी।हालाँकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अब उस तरह की सफलता दोहराना आसान नहीं है।इस समय लोकसभा में बीएसपी शून्य पर है तो विधानसभा में भी पार्टी के सिर्फ़ एक विधायक उमाशंकर सिंह हैं। वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन कहते हैं ' यह सही है कि 2007 में सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग करके बीएसपी सत्ता में आई थी। अब एक बार फिर ब्राह्मणों को मायावती जी संदेश दे रही हैं कि ब्राह्मण अगर उनके साथ आएँगे तो उनको उचित सम्मान मिलेगा जैसा 2007 में मिला था।वो जानती हैं कि जो उनका कैडर वोट है उसके साथ अगर ब्राह्मण वोट मिलेगा तो उसको नई मज़बूती मिलेगी।लेकिन अगर उस समय से अब तक बहुत राजनीतिकि उतार चढ़ाव हो गया।ऐसे में अब ब्राह्मणों का बीजेपी छोड़ कर जाने में संशय है।’

मायावती के पास अब टीम नहीं-

राजनीतक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि मायावती की स्ट्रेटेजी को ज़मीन पर उतारने के लिए उनके पास टीम भी नहीं है।पुराने ब्राह्मण नेताओं की टीम में रामवीर उपाध्याय, रंगनाथ मिश्रा, अनंत मिश्रा, नकुल दुबे जैसे नेता थे।अब सिर्फ़ सतीश चंद्र मिश्रा उनके साथ हैं।जबकि चन्द्रशेखर जैसे युवा नेता एक्टिव हैं और अपनी सक्रियता से ख़ास तौर पर युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन मानते हैं कि टीम न होने को वजह से उनके लिए यह लक्ष्य आसान नहीं होगा।मनमोहन कहते हैं ‘ पहले अपने कोर वोट को एकजुट करने की चुनौती उनके सामने है।तब किसी दूसरे वोट बैंक को जोड़ने का लाभ लेने के बारे में सोचना चाहिए।’ पिछले कुछ समय से लगातार मायावती की सक्रियता कम होने पर भी सवाल उठते रहे हैं। यह भी मायावती के लिए एक चुनौती है। वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन कहती हैं ‘ मायावती ने अपने जन्मदिन पर कैडर और वोटरों को एक संदेश यह भी दिया है। मायावती ने न सिर्फ़ सपा सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगातार हुए निशाना साधा बल्कि गेस्ट हाउस कांड की याद दिला दी।9 अक्टूबर को बीएसपी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित रैली में भी मायावती के निशाने पर समाजवादी पार्टी थी।मायावती ने फिर बता दिया कि बीएसपी के लिए अगर कोई दुश्मन नंबर एक है तो वो सपा है।

बीजेपी पर 'सॉफ्ट’ मायावती का सपा पर निशाना-

वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन कहती हैं कि ‘ विपक्षी पार्टी होने के नाते मायावती को सरकार और सत्तारूढ़ बीजेपी की आलोचना करनी चाहिए लेकिन वो सीधे बीजेपी पर हमला करने से बचती रही हैं।बीएसपी इसलिए हाशिये पर गई क्योंकि विपक्षी पार्टी से ही लड़ रही है।’ वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन इस बात से सहमत दिखते हैं और कहते हैं कि इसी वजह से सपा बीएसपी को बीजेपी को B टीम कहकर आरोप लगाती रही है।मनमोहन कहते हैं ‘लखनऊ रैली में तो उन्होंने मुख्यमंत्री की तारीफ़ तक कर दी थी।अब भी वो सपा पर वार कर रही हैं क्योंकि उनको पता है कि अगर आगे आना है तो पीडीए पर निशाना लगाना होगा।’

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