मायावती का मुस्लिम कार्ड’, नौशाद अली का क़द बढ़ाया, अशोक सिद्धार्थ पर फिर जताया भरोसा
x
कमबैक मोड में बीएसपी, पुराने नेताओं को दी बड़ी जिम्मेदारी

मायावती का 'मुस्लिम कार्ड’, नौशाद अली का क़द बढ़ाया, अशोक सिद्धार्थ पर फिर जताया भरोसा

बीएसपी अध्यक्ष ने पार्टी में पुराने नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी है।नौशाद अली का क़द बढ़ाया गया है वहीं आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर एक बार फिर भरोसा जताया है।


यूपी में 2027 के चुनाव के लिए कमबैक मोड में आईं बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने पार्टी में बड़ा फेरबदल किया है।मायावती ने दलित+ मुस्लिम के पुराने फॉर्म्युले पर दांव लगाने के लिए अपने अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी है। मायावती ने पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरे नौशाद अली को चार मंडलों की बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उनका कद बढ़ा दिया है तो वहीं भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को दिल्ली समेत चार राज्यों की जिम्मेदारी सौंप कर उन पर भरोसा जताया है।मायावती की इस स्ट्रेटेजी को चुनाव से पहले उनके दलित-मुस्लिम जोड़ो अभियान के लिए अहम माना जा सकता है तो वहीं दूसरे राज्यों में पार्टी को मज़बूत करने की नीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

माया का 'मुस्लिम कार्ड’- नौशाद अली का क़द बढ़ा-

रविवार को मायावती के पूर्व विश्वस्त सहयोगी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी पार्टी की टोपी पहनी तो कभी बीएसपी का प्रमुख मुस्लिम चेहरा रहे नसीमुद्दीन को लेकर चर्चा हुई।इसके दो दिन बाद ही मायावती ने मंगलवार को संगठन में बड़ा फेरबदल किया।मायावती ने मौजूदा समय में पार्टी के प्रमुख मुस्लिम नेता नौशाद अली को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उनका क़द बढ़ाया है।नौशाद अली को यूपी के चार महत्वपूर्ण मंडलों लखनऊ, कानपुर के साथ पश्चिमी यूपी के आगरा और मेरठ मंडल का का मुख्य प्रभारी नियुक्त किया है।इस फैसले से नौशाद अली का कद काफी बढ़ गया है और यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी माना जा रहा है।इन चार मंडलों को चुनाव की दृष्टि से सबसे अहम माना जा रहा है।वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन कहती हैं '' इस फ़ैसले को देखें तो मायावती ने सपा में नसीमुद्दीन को शामिल करने के जवाब के तौर पर मुस्लिम कार्ड खेला है।नौशाद अली बीएसपी में नदीमुद्दीन के रहते हुए उनके साथ काम कर चुके हैं।नौशाद अली को नसीमुद्दीन के काम करने का स्टाइल भी पता है और वो पश्चिमी यूपी के समीकरण और बारीकियाँ भी जानते हैं।उनको पार्टी का पुराना और विश्वस्त चेहरा माना जाता है।’’

आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर फिर भरोसा जताया, दी बड़ी ज़िम्मेदारी-

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने दूसरा बड़ा फैसला भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर किया है।अशोक सिद्धार्थ दो बार विधान परिषद सदस्य रहे हैं और 2016 में बीएसपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को अब दिल्ली, गुजरात, केरल और छत्तीसगढ़ का मुख्य केंद्रीय प्रभारी बनाया गया है।अशोक सिद्धार्थ को ज़िम्मेदारी मिलना अहम है क्योंकि पहले पार्टी से विवादों की वजह से उनको निकाला गया था।अशोक सिद्धार्थ को बीएसपी से फरवरी 2025 में पार्टी से निकाला गया था।उस वक्त मायावती ने बयान जारी कर कहा था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते तत्काल प्रभाव से उनको निष्कासित किया जाता है।लेकिन 5 महीने पहले अशोक सिद्धार्थ की बीएसपी में वापसी हुई। अब उनको बड़ी ज़िम्मेदारी देकर मायावती ने एक बार फिर अशोक सिद्धार्थ कर भरोसा जताया है।ख़ास बात यह है कि अशोक सिद्धार्थ तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं और उनका यह अनुभव इन राज्यों में पार्टी को मज़बूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन कहती हैं कि ''अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी में आने से पहले माफ़ी माँग ली थी तो ऐसे में मायावती ने फिर भरोसा जताया है।पार्टी में वो पुराने नेता हैं और इस समय उनका अनुभव काम आ सकता है।दरअसल मायावती ने पुराने नेताओं को तरजीह दी है।’’

फेरबदल में पार्टी के प्रमुख चेहरे रामजी गौतम से दिल्ली, मध्य प्रदेश का प्रभार लेकर उनको महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का प्रभारी बनाया गया है।पार्टी सूत्रों के अनुसार बीएसपी अध्यक्ष ने अन्य राज्यों के अलावा यूपी के 18 मंडल प्रभारियों के कार्यक्षेत्रों में जो बदलाव किए गए हैं इसमें पूर्व सांसद गिरीश चंद्र को उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया जबकि राजाराम को मध्य प्रदेश का प्रभारी और सुमरत सिंह को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया है।

यूपी में दलित और मुस्लिम वोटों को एकजुट करने की रणनीति-

पार्टी संगठन में बड़े फेरबदल के पीछे यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति और तैयारी को वजह माना जा रहा है।पार्टी सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के 18 मंडल के प्रभारियों के कार्यक्षेत्रों में भी बदलाव किए गए हैं जिससे यूपी चुनाव को लेकर ये नेता पार्टी को ज़मीन पर मज़बूत करने के लिए काम कर सकें।मुस्लिम और दलित चेहरों को कमान देने के पीछे यह रणनीति है कि मायावती अपने परंपरागत दलित वोट को सहेजने के साथ दलित+मुस्लिम फॉर्म्युले पर काम करना चाहती हैं।साथ ही इस फैसले को नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।नसीमुद्दीन ने लंबे समय तक पश्चिमी यूपी में बीएसपी में बड़ी जिम्मेदारी संभाली है।इसे दलित और मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश की रणनीति के तौर पर भी देखा जा सकता है।

Read More
Next Story