बीएमसी का मेयर पद महिला कोटे से, शिवसेना यूबीटी ने उठाए सवाल
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बीएमसी का मेयर पद महिला कोटे से, शिवसेना यूबीटी ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिकाओं में मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से तय हो रहा है। इस बीच बीएमसी में मेय़र महिला कोटे से होंगी। लॉटरी के इस सिस्टम पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने ऐतराज जताया है।


BMC Mayor Election: महाराष्ट्र में बीएमसी की मेयर महिला होगी। इस पद के लिए लॉटरी के जरिए फैसला लिया गया। लेकिन लॉटरी फैसले पर आपत्ति जताई है। बता दें कि बीएमसी समेत सभी 29 नगर महापालिकाओं में मेयर किस श्रेणी से होगा उसका फैसला लॉटरी के जरिए की गई। जिसे शहरी विकास विभाग लॉटरी ड्रॉ के ज़रिए तय करेगा।शहरी विकास मंत्रालय के काउंसिल चैंबर में यह लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की थी। इसकी अध्यक्षता राज्य मंत्री माधुरी मिसल कर रही थीं।

29 नगर निगम, एक लॉटरी सिस्टम

राज्य की सभी 29 नगर महापालिकाओं के लिए मेयर पद का आरक्षण रोटेशन सिस्टम के तहत तय किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जिस वर्ग का मेयर पिछली बार रहा था, उसे इस बार लॉटरी में शामिल नहीं किया जाएगा। बीएमसी में पिछली बार मेयर सामान्य वर्ग से था इसलिए इस बार मुंबई में सामान्य वर्ग को लॉटरी से बाहर रखा गया है। अब केवल SC, ST, OBC और महिला श्रेणियां ही संभावित हैं। यही नियम बाकी 28 नगर निगमों पर भी लागू होगा।

चुनाव नतीजे और सियासी समीकरण

नगर निगम चुनावों के नतीजों में 22 नगर निगमों में बीजेपी-शिंदे गठबंधन को बहुमत है। 6 नगर निगमों में कांग्रेस मेयर बनाने की स्थिति में है। मालेगांव में शेख आसिफ की पार्टी ISLAM के मेयर बनने की संभावना है। लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा और सियासी तनाव मुंबई महानगरपालिका (BMC) को लेकर है।

बीएमसी: देश की सबसे अमीर नगर निगम

बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाती है। इस बार चुनाव में बीजेपी-शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे के दशकों पुराने सियासी वर्चस्व को तोड़ा है। लेकिन मेयर की कुर्सी अब भी आरक्षण लॉटरी पर निर्भर है। यही वजह है कि ठाकरे गुट की उम्मीदें अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

लॉटरी तय करेगी कौन बन सकता है मेयर

आरक्षण ड्रॉ यह तय करेगा कि किस श्रेणी का पार्षद मेयर पद के लिए पात्र होगा। केवल उसी श्रेणी से चुने गए पार्षद ही उम्मीदवार बन सकेंगेइसके बाद मेयर का चुनाव पार्षदों की वोटिंग से होगा। अगर ST के लिए आरक्षण निकला तो? अगर बीएमसी मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होता है तो बीजेपी और शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ेंगी क्योंकि दोनों के पास ST वर्ग से कोई पार्षद नहीं है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के पास 2 ST पार्षद हैं

शिवसेना (यूबीटी) के ST पार्षद

जितेंद्र वाल्वी (वार्ड 53)

प्रियदर्शिनी ठाकरे (वार्ड 121)

इस स्थिति में बहुमत न होने के बावजूद उद्धव ठाकरे गुट मेयर पद हासिल कर सकता है।

अगर SC का आरक्षण निकला तो?

यदि मेयर पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित होता है बीजेपी-शिंदे गठबंधन को सीधा फायदा होगा दोनों दलों के पास SC वर्ग के पार्षद मौजूद हैं

संख्या बल

बीजेपी: 89 पार्षद

शिंदे शिवसेना: 29 पार्षद

कुल: 118 (बहुमत 114 से ज़्यादा)

इस स्थिति में महायुति आसानी से मेयर बना लेगी और उद्धव ठाकरे का ढाई दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो जाएगा।

OBC आरक्षण में भी महायुति मजबूत

अगर मेयर पद OBC के लिए आरक्षित होता है। बीजेपी और शिंदे गुट दोनों के पास OBC पार्षद हैं। मेयर बनाने में कोई बड़ी बाधा नहीं होगी। हालांकि, दोनों दलों के बीच मेयर पद को लेकर अंदरूनी खींचतान है। ऐसे में मेयर, उपमेयर, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन इन पदों के बंटवारे का फॉर्मूला निकल सकता है।

महिला आरक्षण की स्थिति

यदि मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होता है। महायुति के पास महिला पार्षद मौजूद हैं। बीजेपी के लिए महिला मेयर सियासी तौर पर मुफीद मानी जा रही है। लेकिन इस स्थिति में भी सबसे ज़्यादा दबाव और नुकसान उद्धव ठाकरे गुट को होगा

लॉटरी बदलेगी सियासी तस्वीर

मेयर आरक्षण की यह लॉटरी मुंबई ही नहीं, कई नगर निगमों की सियासत पलट सकती है। बहुमत के बावजूद कुछ दल मेयर से दूर रह सकते हैं और कम संख्या वाले दल भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंच सकते हैं अब सबकी निगाहें गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाले लॉटरी ड्रॉ पर टिकी हैं यही तय करेगा कि मुंबई की मेयर कुर्सी किसके हिस्से आएगी।

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