हत्या से पहले भी विवादित रहा है पारस सोम, कपसाड़ कांड में पुराना केस उजागर
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हत्या से पहले भी विवादित रहा है पारस सोम, कपसाड़ कांड में पुराना केस उजागर

मेरठ के कपसाड़ गांव (सरधना इलाका) में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण ने पुराने समझौते पर सवाल खड़े किए हैं। आरोपी से विवाद पहले भी था जो अनदेखा रह गया।


Kapsad Case Latest News: मेरठ के सरधना इलाके का कपसाड़ गांव। 6 जनवरी से पहले तक इस गांव के बारे में देश और दुनिया को जानकारी कम थी। लेकिन एक दलित महिला सुनीता (Dalit Woman Sunita) की हत्या और उसकी बेटी रूबी (Ruby) के अगवा होने के बाद यह गांव सुर्खियों में आ गया। इस कांड पर सियासत तेज हुई। प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए। चार दिन बाद यानी 10 जनवरी को अगवा लड़की की बरामदगी और आरोपी पारस सोम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने में किसी तरह की कोताही नहीं बरतेंगे। लेकिन आरोपी पारस सोम (Accused Paras Som) के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

पीड़ित- आरोपी पक्ष में पुराना विवाद

घटना की जांच के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि पीड़ित पक्ष और आरोपी के बीच विवाद नया नहीं बल्कि पुराना है। पुलिस के अनुसार मृतका सुनीता के बेटे नरसी ने करीब सवा साल पहले, 10 सितंबर 2024 को, आरोपी पारस के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय नरसी ने सलावा चौकी इंचार्ज को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए पारस पर आरोप लगाए थे।

मामले के बढ़ने से पहले ही गांव के प्रधान और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया था। यह समझौता लिखित रूप में हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी विवाद को समाप्त करने और भविष्य में शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था। समझौते में यह भी स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि अब दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद शेष नहीं है, इसलिए किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न की जाए।

आरोपी सोम के पक्ष में वकीलों की फौज

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पारस सोम के परिजनों ने इस मामले की कानूनी पैरवी के लिए वकीलों का एक पूरा पैनल गठित कर दिया है। इस पैनल में अधिवक्ता सुनील शर्मा, संजीव राणा उर्फ संजू, विजय शर्मा और बलराम सोम शामिल हैं।

अधिवक्ता बलराम सोम और संजीव राणा ने बताया कि वे जिला कारागार पहुंचकर पारस सोम से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने उससे घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली है। वकीलों के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों और केस डायरी के अध्ययन के बाद ही आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी।

इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। इसी सुनवाई के बाद बचाव पक्ष की आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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