विदेशी दौरे पर एम के स्टालिन ने खर्च किए 7.12 करोड़, RTI के जरिए खुलासा
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विदेशी दौरे पर एम के स्टालिन ने खर्च किए 7.12 करोड़, RTI के जरिए खुलासा

RTI कार्यकर्ता एम कासिमयान ने DMK सरकार पर सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। इस मुद्दे ने तमिलनाडु में शासन की जवाबदेही पर बहस फिर से छेड़ दी है।


तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की विदेश यात्राओं पर ₹7.12 करोड़ खर्च किए हैं, जिसमें यात्रा, आवास, वीज़ा और बीमा शुल्क शामिल हैं। यह जानकारी एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में सामने आई है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा 2022 में स्टालिन की दुबई यात्रा के खर्चों का खुलासा करने से इनकार करने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरटीआई कार्यकर्ता एम. कासिमयन ने आरोप लगाया है कि डीएमके सरकार सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरत रही है। इस मुद्दे ने शासन में जवाबदेही को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है, जिससे विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने सरकार की आलोचना की है।

2022 की दुबई यात्रा पर विवाद

मुख्यमंत्री बनने के बाद स्टालिन की पहली विदेश यात्रा 24 से 28 मार्च 2022 के बीच दुबई एक्सपो में निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से हुई थी। आरटीआई दस्तावेज़ के अनुसार, इस आधिकारिक दौरे में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था, जिसमें उद्योग मंत्री थंगम थेनारासु, मुख्यमंत्री के सचिव टी. उदयचंद्रन (IAS) और निजी सचिव दिनेश कुमार थे।

हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक, इस यात्रा में 20 से अधिक लोग शामिल थे, जिनमें कथित तौर पर स्टालिन के परिवार के सदस्य उनकी पत्नी दुर्गा स्टालिन, बेटा उदयनिधि स्टालिन (जो उस समय विधायक थे और बाद में कैबिनेट मंत्री बने), और बहू कीरुथिगा उदयनिधि भी शामिल थे।

'सरकारी खर्च पर पारिवारिक अवकाश' का आरोप

इस यात्रा को लेकर विपक्षी दल, विशेष रूप से एआईएडीएमके (AIADMK), ने आरोप लगाया कि यह सरकारी खर्च पर किया गया एक "पारिवारिक अवकाश" था। एआईएडीएमके नेता और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने मांग की कि सरकार इस यात्रा के खर्चों पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे। उन्होंने कहा, "करदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके पैसे का उपयोग कैसे किया गया। आधिकारिक दौरे में परिवार के सदस्यों को शामिल करना सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"विपक्ष का दावा है कि सरकार ने अनावश्यक लोगों के रहने और यात्रा का खर्च भी उठाया, जिससे यह विवाद और बढ़ गया।

सरकार की सफाई

22 मार्च 2022 को उद्योग मंत्री थंगम थेनारासु ने इन आरोपों का जवाब देते हुए घोषणा की कि इस यात्रा के दौरान स्टालिन के परिवार के सदस्यों सहित पूरे प्रतिनिधिमंडल के हवाई यात्रा खर्च डीएमके पार्टी ने उठाए थे, ताकि जनता के पैसे के दुरुपयोग के आरोपों को नकारा जा सके।

हालांकि, आरटीआई कार्यकर्ता कासिमयन ने इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा, "सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि डीएमके ने किन-किन खर्चों को वहन किया और क्या आवास, स्थानीय यात्रा और सुरक्षा जैसे अन्य खर्च राज्य सरकार ने उठाए? इस अस्पष्टता के कारण संदेह बढ़ रहा है।"

आरटीआई से हुआ खुलासा

आरटीआई के जरिए प्राप्त जानकारी में स्टालिन की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च का ब्योरा तो दिया गया, लेकिन दुबई यात्रा का खर्च गायब था। अन्य यात्राओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई, मगर दुबई यात्रा के खर्च को छुपाया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए।

कासिमयन, जो तीन वर्षों से इस जानकारी की मांग कर रहे हैं, ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "मैंने मुख्यमंत्री की सभी विदेश यात्राओं के खर्चों का पूरा विवरण मांगा था, लेकिन बार-बार अपील करने के बावजूद, सार्वजनिक विभाग (Public Department), जो इन खर्चों का लेखा-जोखा रखता है, दुबई यात्रा का ब्योरा देने में टालमटोल कर रहा है।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग (Tamil Nadu State Information Commission) ने इस मामले में सार्वजनिक सूचना अधिकारी (PIO) के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया, जबकि आयोग के प्रमुख थिरु एम. शकील अख्तर (सेवानिवृत्त आईपीएस) ने विभाग को खर्चों का खुलासा करने का निर्देश दिया था।

खर्च छुपाने के पीछे की वजह?

सरकार द्वारा दुबई यात्रा के खर्चों को गुप्त रखने से कई अटकलें लगाई जा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस जानकारी को इसलिए छुपा रही है ताकि राजनीतिक विवादों से बचा जा सके, खासकर जब परिवार के सदस्यों की भागीदारी और बड़े प्रतिनिधिमंडल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एक अन्य संभावना यह है कि सरकार के पास यात्रा के खर्चों का पूरा रिकॉर्ड ही नहीं है, खासकर अगर डीएमके पार्टी ने कुछ खर्च खुद उठाए हों। हालांकि, यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, जिससे सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।

कासिमयन ने इस मामले की स्वतंत्र ऑडिटिंग कराने की मांग की है और कहा है कि यह आरटीआई अधिनियम का उल्लंघन है, जो सार्वजनिक खर्चों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है।

निवेश के दावे और वास्तविकता

तमिलनाडु सरकार ने इस यात्रा को सफल बताया था और दावा किया था कि स्टालिन ने छह निवेशकों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे ₹6,100 करोड़ का निवेश आएगा और 15,100 नौकरियां उत्पन्न होंगी।

हालांकि, तमिलनाडु इंडस्ट्रियल गाइडेंस और एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो (Tamil Nadu Industrial Guidance and Export Promotion Bureau) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, गुमनाम रहने की शर्त पर, बताया कि वास्तविक निवेश इससे काफी कम हो सकता है। उनके अनुसार, निवेश ₹3,660 करोड़ से ₹4,270 करोड़ के बीच हो सकता है, जिससे अनुमानित रूप से 9,000 से 10,500 नौकरियां पैदा होंगी।

इतना ही नहीं, ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि समझौता ज्ञापनों (MoUs) का केवल 60-70% ही पांच वर्षों के भीतर हकीकत में बदलता है, क्योंकि नौकरशाही अड़चनों और अन्य बाधाओं के कारण निवेश प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

क्या यह पारदर्शिता की कमी का एक पैटर्न है?

यह विवाद नई बात नहीं है। पूर्व एआईएडीएमके सरकार के कार्यकाल में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। 2019 में आरटीआई के माध्यम से यह खुलासा हुआ था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ई.के. पलानीस्वामी (EPS) ने इज़राइल, यूके, अमेरिका और यूएई की यात्रा की थी, जिसमें 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था।तमिलनाडु सरकार ने उनकी अमेरिका यात्रा के लिए ₹1.23 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन बाकी खर्चों का खुलासा नहीं किया गया था।

आरटीआई कार्यकर्ता कासिमयन का कहना है, "सार्वजनिक विभाग की हालिया आरटीआई रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि तमिलनाडु सरकार ने ईपीएस की अमेरिका यात्रा पर ₹1.23 करोड़ खर्च किए, लेकिन उन्होंने संपूर्ण खर्चों का विवरण नहीं दिया।"इस तरह विभिन्न सरकारों द्वारा विदेशी यात्राओं पर किए गए खर्च को छुपाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे आरटीआई अधिनियम के सख्त अनुपालन की मांग और तेज हो गई है।

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