
इंदौर दूषित पानी केस: हाई कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल
Madhya Pradesh High Court: अब इस पूरे मामले में सबकी निगाहें 15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। इस दिन यह तय होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है।
Indore contaminated water case: जब नलों से बहता पानी प्यास नहीं, बल्कि बीमारी और मौत बांटने लगे तो सवाल सिर्फ व्यवस्था का नहीं, बल्कि जवाबदेही का बन जाता है। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने सिस्टम की नींद तोड़ी है और अब मामला हाई कोर्ट के कठघरे में है। अब इस मसले पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी पांच जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। पिछली सुनवाई में सरकार ने कोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी, उसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी गई थी। जबकि जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग हैं और मौतों की संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है। इसी बात पर हाई कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और रिपोर्ट की सच्चाई पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने जताई चिंता
हाई कोर्ट ने कहा कि अगर पीने का पानी ही दूषित हो तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने साफ किया कि यह समस्या सिर्फ इंदौर के किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर में पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब लोगों की जान जा रही है तो सही और पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही।
मुख्य सचिव को पेश होने का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस मामले में किसी और अधिकारी की नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सचिव की बात सुनना चाहता है।
रोजाना दें अपडेट
हाई कोर्ट ने प्रशासन से कहा है कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान रोजाना मेडिकल बुलेटिन जारी किए जाते थे, उसी तरह दूषित पानी से फैल रही बीमारी की लगातार और सही जानकारी सार्वजनिक की जाए। कोर्ट का मानना है कि पारदर्शिता के बिना इस संकट से नहीं निपटा जा सकता।
अब तक 17 मौतें, 110 मरीज अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, जिनमें से 311 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 15 मरीज आईसीयू में इलाज करा रहे हैं।
15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें
अब इस पूरे मामले में सबकी निगाहें 15 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। इस दिन यह तय होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

