
दोस्ती से अदालत तक, मायलापुर पर छिड़ी लड़ाई
चेन्नई के मायलापुर नाम पर भारत और अमेरिका की दो कंपनियों में ट्रेडमार्क विवाद गहरा गया है। कानूनी अधिकार बनाम सांस्कृतिक पहचान की बहस तेज हो गई है।
अमेरिका और भारत के बीच एक प्राचीन चेन्नई इलाके के नाम को लेकर छिड़ा ट्रेडमार्क विवाद अब तीखा रूप ले चुका है। यह मामला भारतीय और अमेरिकी बौद्धिक संपदा कानूनों के बीच स्पष्ट अंतर को भी उजागर करता है। विवाद के केंद्र में दो व्यवसाय हैं, जिनका नाम चेन्नई की विरासत से जुड़ा है चेन्नई स्थित फूड ब्रांड Mylapore Kitchens और अमेरिका के बे एरिया में संचालित दक्षिण भारतीय रेस्तरां श्रृंखला Mylapore Express।
विवाद की पृष्ठभूमि
2019 में चेन्नई की उद्यमी सुभा द्वारा स्थापित Mylapore Kitchens साबुत मसाले, पिसे मसाले, रेडी-टू-ईट मिक्स आदि बनाती और बेचती है। कंपनी फिलहाल कैटरिंग या रेस्तरां व्यवसाय में नहीं है, लेकिन 2019 से ही अपने उत्पाद अमेरिका समेत अन्य देशों में सीधे ग्राहकों को भेजती रही है।
विवाद तब शुरू हुआ जब मार्च 2024 में कंपनी ने शास्ता फूड्स के माध्यम से अमेरिका में अपना वितरण नेटवर्क बढ़ाया। उसके उत्पाद अमेरिकी स्टोर्स की शेल्फ पर आने लगे। इसी दौरान उसे Mylapore Express की ओर से कानूनी नोटिस मिला, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिकी बाजार में “Mylapore” नाम पर खाद्य उत्पादों के लिए उसका विशिष्ट ट्रेडमार्क अधिकार है।
दोस्ती से कानूनी जंग तक
इस विवाद की विडंबना यह है कि कानूनी टकराव से कुछ महीने पहले दोनों व्यवसायों के मालिक चेन्नई में सौहार्दपूर्ण मुलाकात कर चुके थे। सुभा ने सोशल मीडिया पर बताया कि Mylapore Express के मालिक जय और उनकी पत्नी सुधा उनके प्रतिष्ठान आए थे। उन्होंने साथ में लाइव सत्र किया और भविष्य में घर के बने भोजन के लिए दोबारा मिलने का वादा भी किया था।
लेकिन यह मित्रता जल्द ही कानूनी नोटिस और सोशल मीडिया बयानबाजी में बदल गई। Mylapore Express ने मांग की कि Mylapore Kitchens अमेरिका में “Mylapore” नाम का उपयोग बंद करे, क्योंकि वहां यह नाम उनके द्वारा पंजीकृत ट्रेडमार्क है। फेसबुक पोस्ट में कंपनी ने कहा कि अमेरिका में “Mylapore” खाद्य उत्पादों के लिए पंजीकृत ट्रेडमार्क है और Mylapore Kitchens से उनका कोई संबंध नहीं है।
सुभा ने इस दावे का विरोध करते हुए लिखा, “क्या अब Mylapore, जो हम सबके लिए प्रिय स्थान है, किसी एक का अधिकार हो सकता है?” उन्होंने बताया कि मई 2019 में भारत में नाम पंजीकृत करने से पहले उन्होंने सुनिश्चित किया था कि यह नाम पहले से पंजीकृत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी में लगभग पूरी तरह महिलाएं कार्यरत हैं और वह दुनिया भर में उत्पाद भेजती हैं। “हर किसी की एक कहानी होती है। Mylapore हम सबका है,” उन्होंने लिखा।
‘मायलापुर’ का सांस्कृतिक महत्व
“Mylapore” नाम चेन्नई के एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इलाके से लिया गया है, जो अपने मंदिरों, प्राचीन इमारतों और पारंपरिक शाकाहारी भोजन संस्कृति के लिए जाना जाता है। यह नाम प्रामाणिकता और विरासत का प्रतीक है, जिसे दोनों व्यवसाय अपने-अपने तरीके से प्रस्तुत करना चाहते हैं।
Mylapore Kitchens के लिए यह नाम दक्षिण भारतीय पाक परंपराओं से जुड़ाव दर्शाता है। वहीं Mylapore Express, जो अमेरिका में अपने रेस्तरां चलाता है, इस नाम के जरिए दक्षिण भारतीय व्यंजनों से संबंध स्थापित करता है। कंपनी तीन ब्रांड सेगमेंट—Mylapore South Indian, Mylapore Express और Idly Express—के तहत काम करती है, जिसमें Idly Express केवल टेकअवे सेवा देता है और उसके मेनू में डोसा शामिल नहीं है।
कानूनों में अंतर
यह विवाद ट्रेडमार्क कानूनों की भिन्नता को भी रेखांकित करता है। अमेरिका में ट्रेडमार्क पंजीकरण मजबूत क्षेत्रीय अधिकार देता है, और पहले उपयोग या पहले पंजीकरण का सिद्धांत अक्सर प्रभावी होता है यहां तक कि भौगोलिक नामों के लिए भी। इसके विपरीत, भारत के ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत ऐसे नामों को चुनौती देने की अधिक गुंजाइश है जो भौगोलिक विवरणात्मक हों या जिनमें विशिष्टता की कमी हो, खासकर यदि वे किसी प्रसिद्ध स्थान का उल्लेख करते हों। यही कारण है कि दोनों कंपनियां अपने-अपने घरेलू बाजार में समान नाम से बिना टकराव के काम कर सकीं—जब तक कि उनके बाजार एक-दूसरे से नहीं टकराए।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि भारत के एक स्थान के नाम को अमेरिका में ट्रेडमार्क कैसे किया जा सकता है। कुछ ने नाम में हल्का बदलाव या भारत में काउंटर-ट्रेडमार्क दाखिल करने जैसे सुझाव दिए। दूसरी ओर, Mylapore Express ने इसे भावनात्मक नहीं बल्कि कानूनी मुद्दा बताते हुए कहा कि “यह महत्वपूर्ण है कि ट्रेडमार्क किसके पास है, न कि यह कि ‘Mylapore’ को ट्रेडमार्क किया जा सकता है या नहीं। कंपनी ने अपने स्पष्टीकरण पोस्ट पर टिप्पणियां भी बंद कर दीं, यह कहते हुए कि लोग बिना ट्रेडमार्क कानून समझे टिप्पणी कर रहे हैं।
चेतावनी भरी कहानी
जैसे-जैसे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अडिग हैं, यह मामला उन भारतीय व्यवसायों के लिए चेतावनी बन सकता है जो अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना बना रहे हैं। चेन्नई के एक सांझा सांस्कृतिक नाम से शुरू हुई कहानी अब कानूनी रणभूमि में बदल चुकी है जिससे दोनों पक्षों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

