NCP: सुनेत्रा पवार विधायक दल की नेता बनेंगी? परिवार की सहमति के बाद होगा फैसला
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NCP: सुनेत्रा पवार विधायक दल की नेता बनेंगी? परिवार की सहमति के बाद होगा फैसला

Mahayuti Alliance: अजित पवार के निधन के बाद उनका विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास चला गया है।


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Maharashtra Politics: अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली मची है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के प्रमुख नेता की मौत के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचे। अब सबकी नजरें यह जानने पर टिकी हैं कि सुनेत्रा पवार कब और कैसे एनसीपी विधायक दल की नेता बनेंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल मुख्यमंत्री के ‘वर्षा’ बंगले पहुंचे और उनसे चर्चा की। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता उपमुख्यमंत्री और एनसीपी विधायक दल के नेता के रिक्त पदों को भरने की है। ये दोनों पद अजित पवार के निधन तक उनके पास थे।

पटेल ने कहा कि अब जब अजित पवार नहीं रहे तो सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता बनाने में कोई विरोध नहीं है। जनता और पार्टी दोनों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। महत्वपूर्ण नियुक्तियों के लिए परिवार की सहमति से ही फैसला होगा।

डिप्टी CM बनने के लिए छोड़नी होगी राज्यसभा

सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है। अजित पवार के निधन के बाद उनकी बारामती विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। अगर सुनेत्रा एनसीपी विधायक दल की नेता बनती हैं तो उन्हें राज्यसभा की सीट छोड़कर बारामती में चुनाव लड़ना होगा।

रविवार को हो सकता है बड़ा फैसला

जानकारी के अनुसार, एनसीपी रविवार को विधायक दल की बैठक बुलाने वाली है। इसमें संभावना है कि सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा। विधायक दल भाजपा और शिवसेना के साथ मिलकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है। शनिवार को पार्टी के नए अध्यक्ष के चयन पर भी फैसला होने की संभावना है।

फिलहाल मुख्यमंत्री के पास हैं अजित पवार के विभाग

अजित पवार के निधन के बाद उनका विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास चला गया है। जब तक एनसीपी के किसी नेता को मंत्री पद की शपथ नहीं दी जाती, यह सभी विभाग सीएम के पास ही रहेंगे। पहले वित्त विभाग फडणवीस के पास था (2022-2023), लेकिन 2023 में 40 विधायकों के साथ महायुति में शामिल होने के बाद यह विभाग अजित पवार के खाते में चला गया था।

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