सादगी की राजनीति? कई राज्यों में छोटे हुए मुख्यमंत्रियों के काफिले
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सादगी की राजनीति? कई राज्यों में छोटे हुए मुख्यमंत्रियों के काफिले

केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों ने जनता की सुविधा और ऊर्जा बचत को ध्यान में रखते हुए VIP काफिलों को छोटा करने का फैसला लिया।


केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही वी डी सतीशन ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले में गाड़ियों की संख्या न्यूनतम रखने का निर्देश दिया है। यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लंबे और भारी-भरकम काफिलों से बिल्कुल अलग माना जा रहा है, जिनकी वजह से अक्सर जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था और विपक्ष की ओर से आलोचना भी होती थी।

अक्टूबर 2024 में तिरुवनंतपुरम में पिनराई विजयन के काफिले से जुड़ा एक बड़ा हादसा भी हुआ था, जब पायलट वाहन ने एक दोपहिया चालक को बचाने की कोशिश की और कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हालांकि उस हादसे में विजयन को कोई चोट नहीं आई थी।

सतीशन ने कम गाड़ियों वाले काफिले पर दिया जोर

वी डी सतीशन ने कहा कि उन्हें जेड-प्लस सुरक्षा मिलने की पात्रता है, लेकिन उन्होंने पुलिस से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके आवागमन से आम लोगों को परेशानी न हो और काफिले में केवल जरूरी वाहन ही शामिल हों। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सतीशन चाहते हैं कि उनके साथ केवल एक पायलट कार और एक एस्कॉर्ट वाहन चले तथा उनकी आवाजाही के दौरान सड़क यातायात पूरी तरह बंद न किया जाए।

हालांकि केरल पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन यानी “येलो बुक” के अनुसार तय होती है। सामान्य परिस्थितियों में मुख्यमंत्री के काफिले में उनकी कार के अलावा पांच से छह एस्कॉर्ट वाहन और एक एम्बुलेंस शामिल होती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार खतरे की आशंका और दौरे की प्रकृति के आधार पर काफिले का आकार बढ़ाया भी जा सकता है।

तमिलनाडु में भी जनता की सुविधा पर जोर

पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी नई सरकार इसी तरह की पहल करती दिख रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री बने जोसेफ विजय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उनके काफिले के दौरान ट्रैफिक पूरी तरह न रोका जाए। इसके लिए समानांतर ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है ताकि आम लोगों को जाम और लंबी देरी का सामना न करना पड़े।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय चेन्नई स्थित अपने वर्तमान घर नीलांकरई से किसी नए सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं, जो सचिवालय के करीब हो। इससे सुरक्षा प्रबंधन आसान होगा और ट्रैफिक बाधित होने की संभावना भी कम होगी। हालांकि विजय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह अपने 12 से 14 गाड़ियों वाले काफिले की संख्या कम करेंगे या नहीं।

कई गैर-BJP राज्यों में भी दिखी सादगी

कुछ गैर-BJP शासित राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में भी मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में कटौती की है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा की बचत और जिम्मेदार खपत की बात कही थी।

हालांकि सभी विपक्षी राज्यों ने इस अपील को गंभीरता से नहीं लिया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि केवल अस्थायी तौर पर काफिले कम करना ईंधन संकट का स्थायी समाधान नहीं है।

BJP शासित राज्यों में दिखा असर

प्रधानमंत्री मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों द्वारा अपने काफिलों की गाड़ियों की संख्या घटाने के बाद BJP शासित राज्यों में भी इसका असर दिखाई दिया। कई नेताओं ने कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना शुरू किया। कई राज्यपालों ने भी अपने काफिलों को छोटा किया, जबकि कुछ विधायक साइकिल से विधानसभा पहुंचते नजर आए।

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी शपथ लेने के बाद कहा कि उनके काफिले में केवल जरूरी वाहन ही रखे जाएंगे। वहीं असम में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने का फैसला लिया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मोटरसाइकिल से विधानसभा पहुंचे, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने सरकारी आवास से सचिवालय तक पैदल जाते दिखे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, जिनके काफिले पर पहले कई गंभीर हमले हो चुके हैं, उन्होंने भी जिला दौरों के दौरान अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटाने का निर्णय लिया है।

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