
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़, सुनेत्रा पवार बनीं उपमुख्यमंत्री
Deputy CM Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति अब एक नए अध्याय में है। सुनेत्रा पवार उप मुख्यमंत्री बनी हैं। भाजपा ने इस स्थिति का सियासी लाभ उठाया। शरद पवार के गुट और एनसीपी की यूनिफिकेशन योजना विफल हुई।
महाराष्ट्र में राजनीतिक हालात अचानक बदल गए हैं। सुनेत्रा पवार अब राज्य की उपमुख्यमंत्री बन गई हैं। इससे पहले उन्हें एनसीपी के विधायक दल का नेता चुना गया। अजीत पवार के गुट के सभी नेता उनके समर्थन में थे। वहीं, शरद पवार गुट के नेता शरद पवार के घर मीटिंग कर रहे थे। शरद पवार ने आज सुबह कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि सुनेत्रा पवार उप मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं।
डिप्टी सीएम की शपथ इतनी जल्दी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अजीत पवार के निधन के 48 घंटे के अंदर सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ क्यों लेनी पड़ी? इस समय महाराष्ट्र में यह दूसरी बार है कि अचानक शपथ समारोह इतनी जल्दी संपन्न हुआ। पहले ऐसा तब हुआ था, जब देवेंद्र फडनवीस और अजीत पवार की सरकार महज 80 घंटे में बदल गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जल्दबाजी के पीछे भाजपा का रणनीतिक लाभ है। अगर एनसीपी के दो धड़े फिर से एक हो जाते तो पिछले ढाई-तीन साल की भाजपा की मेहनत और सियासी योजना बेकार हो जाती।
राजनीतिक रणनीति और दबाव
अजीत पवार पश्चिम महाराष्ट्र के कई कोऑपरेटिव सेक्टर में प्रभाव रखते थे – शुगर फैक्ट्री, क्रेडिट सोसाइटी आदि। अगर अजीत पवार शरद पवार के गुट के साथ रहते तो यह क्षेत्र भी बीजेपी के नियंत्रण से बाहर हो जाता। इसलिए सुनेत्रा पवार को जल्दी उप मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की। इस दौरान सुत्रा पवार के ऊपर कई तरह के दबाव रहे। कुछ लोग कहते हैं शुगर लॉबी का, कुछ कहते हैं परिवार का और कुछ मानते हैं कि केंद्रीय नेताओं का निर्देश प्रभावी रहा।
सुनेत्रा पवार की भूमिका और चुनौतियां
सुनेत्रा पवार अब डिप्टी सीएम हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय देवेंद्र फडनवीस के पास रहेगा। इसका मतलब है कि उनका पद ज्यादा सांकेतिक और सजावटी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अजीत पवार के गुट के नेताओं को एकजुट कैसे रखें और क्या वे अपने एमएलए को टूटने से रोक पाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी सुनेत्रा पवार को समय देना जरूरी है। उनकी राजनीतिक क्षमता का असली मूल्य तभी समझ आएगा, जब वे अपने निर्णय और नेतृत्व साबित करेंगी।
शरद पवार और एनसीपी का भविष्य
शरद पवार ने साफ कर दिया है कि अब यूनिफिकेशन नहीं होगा। यह कदम साफ तौर पर इस दिशा में था कि बीजेपी के साथ ना जाने की स्थिति बनाई जाए। एनसीपी के भीतर कुछ नेता चाहते थे कि दो गुट फिर से मिलें, लेकिन सुनेत्रा पवार के भाजपा के साथ जाने के कारण यह संभव नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी ने इस स्थिति से अपनी सियासी पकड़ मजबूत कर ली है और अब सुनेत्रा पवार के पद पर होने से राज्य में नियंत्रण उन्हें रहेगा, न कि सिर्फ पवार परिवार को।
सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र की राजनीति
सुप्रिया सुले अब अपनी राजनीतिक भूमिका फिर से तय करेंगी। वे केंद्रीय स्तर पर सक्रिय हैं, लेकिन महाराष्ट्र में अजीत पवार की अनुपस्थिति में उन्हें अपने सत्ता और समर्थन आधार को मजबूत करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले दोनों को समय और मौके की जरूरत है। दोनों को अपने नेतृत्व और जनता के बीच पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।

