
राजनीतिक गणित के उस्ताद, वक्त के साथ क्यों कमजोर पड़ते गए नीतीश कुमार?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासत में नई बहस छेड़ दी है। सेहत, नेतृत्व और सत्ता समीकरण को लेकर विपक्ष और सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं।
बिहार की सियासत में नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि राजनीतिक गुणा-गणित की समझ के मामले में वो दूसरों से अव्वल हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो वो दो दशक से सीएम कैसे बने रहते। 20 नंवबर 2025 को जब 10वीं दफा बिहार की कमान तो संभाली। लेकिन इस दफा पांच साल तक सीएम बने रहने पर संशय था और वो डर हकीकत में तब्दील भी हो गई जब पांच मार्च को उन्होंने राज्यसभा के लिए पर्चा दाखिल किया। उससे पहले एक्स पर लिखा कि वो बिहार से सीएम रहे, केंद्र में मंत्री रहे, लोकसभा के सदस्य रहे और राज्यसभा सदस्य बनना चाहते हैं।
नीतीश कुमार के एक्स पर लिखे बयान की कई तरह से व्याख्या हो रही है। मसलन कुछ लोग कह रहे हैं नीतीश जी ने हर रूप में अपनी पारी खेली है, बस उच्च सदन का सदस्य बनना ही बाकी था। लेकिन इसके उलट भी विचार है। कुछ लोग यह कहते हैं कि कहां सीएम और कहां राज्यसभा का सदस्य। जो शख्स दूसरों को उच्च सदन भेजा करता था क्या वो राज्यसभा नहीं जा सकता था। यानी कि नीतीश के फैसले की व्याख्या अलग अलग तरह सियासी फिजा में हलचल पैदा कर रही है। लेकिन इसके विपरीत यह भी सवाल है कि क्या नीतीश कुमार समय के साथ कमजोर होते गए। बताया जा रहा है कि बिहार बीजेपी के नेताओं ने गृहमंत्री अमित शाह को बताया था कि राज्य में सरकार अफसर चला रहे हैं और सीएम की तरफ से फैसले भी कर लेते हैं। कुछ घटनाओं के जरिए बताएंगे कि नीतीश कुमार ने कैसे अपनी सरकार की फजीहत कराई।
तारीख 21 सितंबर साल 2024, नीतीश कुमार अपने मंत्री अशोक चौधरी के कंधे पर सिर रखकर लिपटे और कहा कि हम इनसे बहुत प्रेम करते हैं।
15 अक्टूबर 2024- गांधी मैदान में दशहरा वाले दिन नीतीश कुमार पहुंचे और रावण पर चलाने के लिए दिए गए तीर धनूष को फेंक दिया।
30 नवंबर 2024- शीतकालीन सत्र के दिन मंत्री अशोक चौधरी के ब्रेसलेट से नीतीश कुमार खेलने लगे।
30 जनवरी 2025- महात्मा गांधी की पुण्यतिथि का आयोजन पटना में हुआ था। नीतीश कुमार श्रद्धांजलि की जगह ताली बजाने लगे। विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने उन्हें रोका था।।
15 मार्च 2025- पटना में होली मिलन समारोह के दौरान बीजेपी सांसद रविकिशन का पैर छूने के लिए झुक गए।
20 मार्च 2025- पटना में ही एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान हंसी ठिठोली करने लगे। बिहार के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने इशारों से रोका।
26 मई 2025- शिक्षा विभाग के एक कार्यक्रम में एसीएस एस सिद्धार्थ के सिर पर गमला रख दिया।
20 नवंबर 2025- 10वीं दफा सीएम की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार, पीएम मोदी को एयरपोर्ट पर छोड़ने के लिए आए और उनके पैरों को छूने को कोशिश की।
15 दिसंबर 2025- पटना के संवाद सभागार में मुस्लिम महिला के हिजाब खींच डाले। दरअसल नीतीश कुमार उस महिला डॉक्टर को नियुक्ति पत्र दे रहे थे।
इन कुछ घटनाओं ने सीएम नीतीश कुमार के शारीरिक और मानसिक सेहत पर सवाल उठा दिए। विपक्ष के नेता खासतौर से तेजस्वी यादव कहते भी है कि नीतीश जी को भुलने की बीमारी हो गई है। उनकी खराब सेहत का फायदा उठाकर उनके सहयोगी नियम विरुद्ध काम करात हैं। वो कोशिश करते हैं कि नीतीश जी की जगहंसाई हो।

