
40 साल की सियासत में कई मोड़, दिल्ली से पटना तक नीतीश की कहानी
नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा होंगे। 21 साल पहले जिस भूमिका में थे उस रोल में फिर नजर आएंगे हालांकि सदन राज्यसभा होगा।
बिहार की राजनीति में लंबे समय तक केंद्र में रहने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप शपथ ली। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान नीतीश कुमार ने साफ किया कि उन्होंने बिहार में काफी काम किया है और अब वे राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे कुछ ही दिनों में मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे और नई सरकार का गठन किया जाएगा।
नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेने के बारे में बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी कहते हैं, "उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया है। इसलिए, अगले कदम के तौर पर, वह सदन में शपथ लेंगे... यहां शपथ लेने के बाद, हम पटना लौट जाएंगे। वहां, 2-4 दिनों की चर्चा और विचार-विमर्श के बाद वह (बिहार के मुख्यमंत्री पद से) इस्तीफ़ा देंगे।" वह यह भी कहते हैं, "मुख्यमंत्री वही होंगे जिन्हें NDA विधायी दल का नेता चुना जाएगा। यह बस कुछ ही दिनों की बात है, कृपया इंतज़ार करें..."
अब राज्यसभा में नीतीश कुमार
नीतीश कुमार की यह वापसी इसलिए भी खास है क्योंकि 2005 में उन्होंने लोकसभा सदस्य रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। अब करीब 21 साल बाद वे मुख्यमंत्री रहते हुए ही संसद के उच्च सदन में पहुंचे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक यात्रा एक तरह से पूरा चक्र पूरा करती नजर आती है।वे भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो चारों सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। चार बार लोकसभा सांसद रहने के बाद अब राज्यसभा में उनकी एंट्री ने उनकी यह उपलब्धि पूरी कर दी है।1980 में सियासी आगाज
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1980 के दशक में सक्रिय राजनीति में आए और 1989 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद वे केंद्र सरकार में मंत्री बने और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पद संभाले।
बिहार की सत्ता में उनका उदय 2005 में हुआ, जब एनडीए को बहुमत मिलने के बाद वे मुख्यमंत्री बने। कुछ छोटे अंतराल को छोड़कर तब से वे लगातार राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे। हालांकि, एनडीए के साथ उनका रिश्ता समय-समय पर बदलता रहा। 2013 में अलगाव, 2017 में वापसी, 2022 में फिर दूरी और 2024 में दोबारा गठबंधन में शामिल होना इसका उदाहरण है।
2025 में 10वीं दफा सीएम
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद वे दसवीं बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अब उन्होंने संसदीय राजनीति में लौटने का फैसला लिया है। यह निर्णय उनके समर्थकों के लिए चौंकाने वाला रहा है और जेडीयू कार्यकर्ताओं ने कई जगह इसका विरोध भी किया है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका क्या होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे केंद्र सरकार में मंत्री बन सकते हैं या एनडीए के भीतर किसी समन्वयकारी भूमिका में नजर आ सकते हैं।नीतीश कुमार ने यह भी साफ किया है कि वे बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे और नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे। हालांकि, राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सटीक भूमिका क्या होगी, इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।

