
गैस के बिना 'कोमा' में कानपुर की इंडस्ट्री, दांव पर 1 लाख नौकरियां, अरबों का हो रहा नुकसान
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण कानपुर के उद्योगों में गैस की भारी किल्लत हो गई है। कॉमर्शियल और पाइपलाइन गैस की सप्लाई रुकने से 150 से अधिक फैक्ट्रियां बंदी की कगार पर हैं।
Impact of Iran-Israel War In India: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर अब भारत में दिखने लगा है। ये युद्ध भारत के औद्योगिक शहरों की आर्थिक कमर तोड़ने लगा है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद पैदा हुए वैश्विक संकट ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में गैस की भारी किल्लत पैदा कर दी है। शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में हाहाकार मचा है, जहाँ कॉमर्शियल सिलेंडर और पाइपलाइन गैस (PNG) की सप्लाई ठप होने से फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुँच गई हैं।
उद्योग जगत में मची खलबली
कानपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव एस्टेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय कपूर ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई, तो कानपुर के उद्योगों को न केवल अरबों रुपये का वित्तीय नुकसान होगा, बल्कि लगभग एक लाख परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।गैस की कमी ने कानपुर की उन 150 बड़ी फैक्ट्रियों को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाई है जो पूरी तरह पाइपलाइन गैस पर निर्भर थीं। वर्तमान में इन इकाइयों में गैस की सप्लाई बंद है, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
आर्थिक नुकसान और बेरोजगारी का डर
विजय कपूर के अनुसार, "इंडस्ट्री की हालत इस वक्त बेहद नाजुक है। हमारी फैक्ट्रियों में कॉमर्शियल सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। सप्लाई चेन टूटने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। अगर यह स्थिति एक महीने भी खिंच गई, तो कई लघु और मध्यम उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।"
इस संकट का सबसे दर्दनाक पहलू मानवीय है। कानपुर की फैक्ट्रियों में काम करने वाले करीब एक लाख मजदूर इस किल्लत की सीधी मार झेल रहे हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का मतलब है इन मजदूरों की छंटनी, जिससे शहर में बेरोजगारी का बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
महंगी हुई इलेक्ट्रिक भट्टियाँ, बढ़ी लागत
गैस न मिलने के कारण अब उद्यमी विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक भट्टियों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन यहाँ भी 'आपदा में अवसर' तलाशने वालों ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जो इलेक्ट्रिक भट्टियाँ पहले 20,000 रुपये में मिल जाती थीं, मांग बढ़ने के कारण उनकी कीमत अब 40,000 रुपये तक पहुँच गई है। कारोबारियों के लिए एक तरफ उत्पादन बंद है और दूसरी तरफ वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती कीमतें दोहरी मार साबित हो रही हैं।
समाधान की दरकार
विजय कपूर ने सरकार से अपील की है कि उद्योगों की अनदेखी न की जाए। युद्ध की वजह से सप्लाई चैन में आए व्यवधान को दूर करने के लिए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर कॉमर्शियल गैस और पाइपलाइन गैस मुहैया कराई जानी चाहिए, ताकि कानपुर की 'इंडस्ट्रियल धड़कन' थमे नहीं।

