Iran-Israel war impact : ईद पर नए कपड़े नहीं पहनेंगे शिया, नमाज़ के बाद होगी ईरान की फ़तह की दुआ
ऑल इंडिया शिया लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने 'द फ़ेडरल देश’ के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि मस्जिदों में ईद की नमाज़ के बाद ईरान की फ़तह की दुआ भी की जाएगी।

EXCLUSIVE INTERVIEW with Shia cleric Maulana Yasoob Abbas : ईरान इज़राइल युद्ध का असर अब ईद के त्योहार पर भी पड़ सकता है।लखनऊ में शिया मुसलमान सादगी से ईद मनाएँगे और पुराने कपड़ों में ही नमाज़ अदा करेंगे।अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के ग़म में नए कपड़े नहीं पहने जाएँगे।शिया धर्मगुरुओं ने ईद पर नए कपड़े न पहनने और किसी भी तरह की ख़ुशी का इज़हार न करने की अपील की है।शिया धर्मगुरु और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने 'द फ़ेडरल देश’ से ख़ास बातचीत में बताया कि नमाज़ के बाद ईरान की फ़तह में लिए दुआ भी होगी।
ईद पर इबादत होगी, ख़ुशी का इज़हार नहीं :
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि ईद पर इबादत करने के लिए कहा गया है और इसमें किसी तरह की खुशी का इजहार यह जश्न न हो इस बात के लिए अपील की गई है।इसकी वजह यह है कि मज़हब ज़रूरी है लेकिन इसके साथ जो दूसरी चीज़ें जुड़ गई हैं वो ज़रूरी नहीं हैं और जिस तरह से जंग जारी है उसको देखते हुए यह फ़ैसला किया गया है।मौलाना यासूब अब्बास कहते हैं ''जो इस्लाम ने, रसूल ने बताया है उसको मानने में कोई मनाही नहीं है।नमाज़ पढ़ना, फितरा निकालना, दुआ करना बिल्कुल सही है लेकिन कम से कम इस ईद में मज़हब को समाज की जकड़न से आज़ाद कर दीजिए।’’
पुराने कपड़े पहन कर ईद की नमाज़ अदा करने की अपील-
मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि शिया कम्युनिटी से कहा गया है कि वो पुराने, साफ़ कपड़े पहनकर ही ईद की नमाज़ अदा करें।नए कपड़ों से परहेज करें।''नए कपड़े ख़ुशी का इज़हार करने के लिए पहने जाते हैं और जिस तरह से जंग हो रही हैं, लाशें उठ रही हैं उसमें पुराने साफ़ कपड़े ही पहनें।’’ मौलाना यासूब अब्बास कहते हैं कि,''यह जंग ईरान के ऊपर थोपी गई है।ईद के दिन मस्जिदों में नमाज़ के बाद ईरान की फ़तह की दुआ होगी और इज़राइल और अमेरिका की शिकस्त के लिए बद्दुआ होगी।जिस तरह से ईरान जवाब दे रहा है इससे ईरान की फ़तह तय है और अमेरिका और इज़राइल घबड़ाया हुआ है।अल्लाह से दुआ होगी कि ईद को ईद कर दें और ईरान को जीत दिलाएँ।’’
1 अप्रैल को होगा विरोध प्रदर्शन-
यासूब अब्बास ने इस्लामिक देशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो मुस्लिम देश हैं वो अमेरिका को अपनी ज़मीन दिए हुए हैं कि हमारे यहाँ से हमले करिए।'' पूरी दुनिया का शिया ईरान के साथ खड़ा है।ईरान ने को मज़लूमों की आवाज़ उठाई थी उस वजह से ईरान के साथ सिर्फ़ शिया नहीं और भी लोग हैं।लेकिन जो तथाकथित इस्लामी देश हैं उनका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है।’’ मौलाना यासूब अब्बास ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल को लखनऊ के छोटे इमामबाड़े में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई साहब का चालीसवां होगा जिसमें मजलिस और शोक सभा के बाद अमेरिका और इज़राइल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।
अटल जी की विदेश नीति पर क़ायम रहे भारत सरकार: मौलाना यासूब अब्बास-
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि जो एलपीजी और तेल का भारत में संकट हो गया है वो खत्म होना चाहिए।साथ ही भारत की विदेश नीति जो अटल जी के समय थी उसी विदेश नीति के अनुसार सरकार को चलना चाहिए, कोई नई नीति नहीं बनानी चाहिए। यसूब अननास कहते हैं ''हिंदुस्तान के कच्चा तेल ला रहे टैंकर और शिप्स को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से गुज़रने की इजाज़त दी है।इसका अर्थ है कि ईरान ने हिंदुस्तान से ताल्लुकात ख़त्म नहीं किए हैं।अटल जी के समय में जो फॉरेन पॉलिसी थी भारत उसी पर अमल करे नई पॉलिसी न बनाए।’’

