
यूपी में 4 साल से स्थायी DGP नहीं, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हलचल तेज
12 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों को अवमानना नोटिस जारी किया था और मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय है।
उत्तर प्रदेश में पिछले करीब चार वर्षों से स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार के भीतर हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि राज्य सरकार दो साल पहले ही DGP नियुक्ति के लिए नियमावली बना चुकी है, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया।
सितंबर 2024 में योगी सरकार ने ‘पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024’ को मंजूरी दी थी। इसके तहत DGP चयन के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय समिति बनाने का प्रावधान है। साथ ही, नियुक्त अधिकारी को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल देने और रिटायरमेंट में कम से कम 6 महीने शेष होने जैसी शर्तें तय की गई थीं। हालांकि, इस नियमावली में कुछ कानूनी पेच बताए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका।
विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा बनाई गई यह प्रक्रिया UPSC की स्थापित व्यवस्था से अलग है, जिसमें आमतौर पर 3 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के पैनल में से DGP का चयन किया जाता है। यही कारण है कि इस नियमावली को अदालत में चुनौती दिए जाने की आशंका बनी हुई है।
कार्यवाहक DGP पर सवाल
वर्तमान में 1991 बैच के IPS अधिकारी राजीव कृष्ण कार्यवाहक DGP हैं। जून 2025 में उन्हें करीब 7 वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर इस पद पर नियुक्त किया गया था। वरिष्ठता क्रम में उनसे ऊपर कई अधिकारी मौजूद थे, जिनमें 1990 बैच की IPS रेणुका मिश्रा, और 1991 बैच के आलोक शर्मा व पीयूष आनंद शामिल हैं।
हालांकि, समय के साथ कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के रिटायर होने के बाद राजीव कृष्ण की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। जून 2026 में आलोक शर्मा के रिटायर होने के बाद वे वरिष्ठता में तीसरे स्थान पर आ जाएंगे, जिससे उनके स्थायी DGP बनने की संभावना बढ़ सकती है।
चार साल से नहीं मिला स्थायी प्रमुख
उत्तर प्रदेश के आखिरी स्थायी DGP मुकुल गोयल थे, जिन्हें मई 2022 में हटा दिया गया था। इसके बाद से राज्य में लगातार कार्यवाहक DGP ही नियुक्त किए जाते रहे हैं। देवेंद्र सिंह चौहान, राजकुमार विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और अब राजीव कृष्ण इस पद पर कार्यवाहक के रूप में रह चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
DGP नियुक्ति में नियमों के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। 12 मार्च 2026 को कोर्ट ने कई राज्यों को अवमानना नोटिस जारी किया था और मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है।
जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार इस मामले को जून तक टालने की कोशिश कर सकती है, ताकि राजीव कृष्ण UPSC मानकों के तहत भी स्थायी DGP बनने के लिए पात्र हो जाएं।
राजनीतिक हलचल भी तेज
इस बीच, प्रदेश की राजनीति में भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी से अपने अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव 2026 की पहली बड़ी रैली नोएडा के दादरी में करने वाले हैं, जिसे गुर्जर समाज के समर्थन से आयोजित किया जा रहा है।

