क्या सैलरी बढ़ाने की मांग गुनाह है, नोएडा के कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कर्मचारियों ने सैलरी में इजाफा, ओवरटाइम और वीक ऑफ के मुद्दे पर हिंसक प्रदर्शन किया।

'क्या सैलरी बढ़ाने की मांग गुनाह है', नोएडा के कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

यूपी के नोएडा-ग्रेटर नोएडा में हजारों की संख्या में कर्मचारी सड़क पर उतर गए। कर्मचारियों का कहना है कि फैक्ट्री के मालिक सैलरी, ओवर टाइम के मुद्दे पर वादाखिलाफी कर रहे हैं।


यूपी के नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी सोमवार 13 अप्रैल को दिनभर सड़कों पर गश्त करते रहे। वजह, हजारों की संख्या में कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन था। नोएडा फेज-2 स्थित मदरसन कर्मचारियों के गुस्से की आग में सेक्टर 59, 60, 62, 63 समेत गाजियाबाद और फरीदाबाद के कुछ हिस्से प्रभावित हुए। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन वृद्धि, ओवरटाइम, साप्ताहिक छुट्टी के मुद्दे पर फैक्टी के मालिकों ने धोखा दिया है। लेकिन अब यह सब बर्दाश्त के बाहर है। जिला प्रशासन की तरफ से कर्मचारियों को समझाने की कोशिश हुई। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। कर्मचारियों ने पुलिस वालों पर पथराव किया, उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ और आग लगा दी। बदले में नोएडा पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े।

कर्मचारियों के मिजाज और उनकी मांगों को समझने के लिए द फेडरल देश की टीम ने नोएडा के सेक्टर 59, 60, 62 और 63 का दौरा किया। सेक्टर 63 में रोहित कुमार नाम के एक कर्मचारी मिले। सिर फटा हुआ था, शरीर पर खून के थक्के जमे हुए थे। उनसे हमारा सवाल था कि यह हाल किसने किया। रोहित कुमार ने कहा, '' सेक्टर 149 के स्पाइकी कंपनी में वो काम करते हैं, ड्यूटी खत्म होने के बाद सेक्टर 63 स्थित अपने घर जा रहे थे। लेकिन पुलिसिया जुल्म के शिकार हो गए। अब आप बताइए कि वेतन वृद्धि, ओवरटाइम और वीक ऑफ के मुद्दे को उठाना क्या गलत है। इससे भी बड़ी बात यह है कि पुलिस को किसने अधिकार दिया है कि वो बेरहमी से पीटे। उनका सिर फटा है, वो समझ नहीं पा रहे हैं कि कसूर क्या है। क्या योगी की पुलिस ऐसे ही पीटेगी। उनके साथ कुछ और बुरा होता तो जवाब कौन देता।''


रोहित कुमार की तरह मौके पर मौजूद एक महिला कर्मचारी (नाम न लिखने की शर्त पर) ने कहा, '' यूपी की पुलिस बेकाबू हो गई है। वो अपने बच्चे के साथ घर जा रही थी। पुलिस ने उसे तो मारा ही बच्चे को भी नहीं छोड़ा। अगर मजदूर और कर्मचारी अपने हक की बात करें तो क्या यह गलत बात है। वर्षों से फैक्ट्री के मालिक मजदूरों-कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। किसी का वेतन 10 हजार है तो भी वो पूरी सैलरी नहीं पाता। ओवरटाइम के लिए डबल पेमेंट का नियम है, वीक ऑफ भी ढंग से नहीं मिलता। अब ऐसी सूरत में कर्मचारी अपनी बात ना कहें, सड़क पर ना उतरें तो क्या करें। कर्मचारी, सड़क पर उतर कर जब अपनी बात कह रहे हैं तो ऐसा लग रहा है कि हम लोग उनके दुश्मन हो गए हैं''

सेलकॉम में काम करने वाले कर्मचारी ने कहा, '' दूसरों की तरह वो भी वेतन वृद्धि के लिए सड़क पर उतरे। लेकिन पुलिस ने बेरहमी से पीटा। आठ साल पहले उनकी सैलरी 8 हजार रुपए थी, इस समय 12 हजार पाते हैं। लेकिन उसमें भी कटौती हो जाती है। इतनी कम सैलरी में बीवी-बच्चे कैसे पलेंगे। हम जैसे लोग कहां जाएंगे। बच्चों की फीस कैसे भरें। स्कूल वाले आठ हजार रुपए मांगते हैं, सिलेंडर का दाम बेतहाशा बढ़ा है। अब कर्मचारी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं तो गलत क्या है। पुलिस ने जिस तरह से व्यवहार किया उसे आप क्या कहेंगे। फैक्ट्री के मालिक मजदूरों का शोषण कर रहे हैं और सरकार खामोश बैठी हुई है।''

सेक्टर 63 के क्यूसीएल कंपनी में काम करने वाले सुनील ने कहा, '' 11 मार्च को वो कंपनी का हिस्सा बने। जितनी सैलरी पर पहले बात हुई उससे कम दिया जा रहा है। खास बात यह कि वो नियुक्ति पत्र की मांग करते रहे। लेकिन कंपनी का टालमटोल वाला रवैया बना रहा। अब ऐसे में अगर कर्मचारी अपने हक की बात नहीं करें तो क्या करें। सड़कों पर उतरने की जगह दूसरा कोई विकल्प नहीं है।''

सुनील की पीड़ा को साझा करते हुए राहुल कहते हैं, '' सिलेंडर का दाम बेतहाशा बढ़ रहा है, मजदूरों के सामने एक और संकट दस्तक दे चुका है, ऐसे में वेतन का ना बढ़ना, वेतन में कटौती, ओवरटाइम में घालमेल, वीक ऑफ के ना मिलने से कर्मचारी परेशान है। अब इतनी दिक्कतों के बाद भी हम लोग मुंह ना खोलें तो क्या करें।''

बता दें कि नोएडा प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों और मजदूरों की मांग पर संवेदनशील हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की। लेकिन कर्मचारियों का कहना है, ''आज तक उन लोगों के साथ धोखा हुआ है। हकीकत तो यह है कि फैक्ट्री के मालिक किसी की भी नहीं सुनते और ऐसा क्यों होता है। आप लोग यानी मीडिया, हम कम पढ़े लोगों से अधिक समझती है।''

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