
अगर 'युवराज' VIP होता तो क्या बचाव दल यूं ही छोड़ देता, नोएडा प्रशासन पर सवाल
नोएडा में युवा इंजीनियर युवराज मेहता की डूबकर मौत ने भारत की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की गंभीर खामियों और मानवीय संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है।
Yuvraj Mehta Death Case: नोएडा में 17 जनवरी को युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक डूबकर मौत ने एक बार फिर भारत की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ सराहनीय कार्यों के बावजूद, यह व्यवस्था उस अभूतपूर्व संकट के सामने असहाय नजर आई, जो इस क्षेत्र की जिम्मेदारियों का ही हिस्सा है।
युवराज मेहता की कार एक गहरे नाले में गिर गई थी, जिसके बाद वह उसमें डूब गए। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के जवान मौके पर मौजूद तो थे, लेकिन पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जवान हाथों में हाथ डाले खड़े रहे और पानी की गहराई व खतरे को लेकर आशंकित नजर आए।
27 वर्षीय युवराज मेहता शुरुआती हादसे में बच गए थे और अपनी कार की छत पर चढ़ गए थे, लेकिन दो घंटे से अधिक समय तक मदद का इंतजार करते-करते आखिरकार वह डूब गए। यह पूरा दृश्य उनके पिता और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ, जो असहाय होकर सब कुछ देखते रहे।
200 से ज्यादा बचावकर्मी मौके पर थे मौजूद
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनास्थल पर 200 से ज्यादा बचावकर्मी मौजूद थे, लेकिन कोहरे, ठंडे पानी और संभावित जोखिम का हवाला देकर वे करीब दो घंटे तक पानी में उतरने से कतराते रहे। इस रवैये ने सिस्टम की उदासीनता को उजागर कर दिया और लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
इस बीच, एक डिलीवरी एजेंट ने साहस दिखाते हुए युवराज को बचाने की कोशिश की, जिससे प्रशिक्षित पेशेवरों की निष्क्रियता और भी ज्यादा सवालों के घेरे में आ गई। बाद में प्रशासन की ओर से कोहरा, ठंडा पानी और मलबे की मौजूदगी जैसे बहाने सामने आए, जबकि स्थानीय लोगों का कहना था कि इस खतरनाक नाले को लेकर पहले ही कई चेतावनियां दी जा चुकी थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
मजबूत ढांचा, लेकिन गंभीर खामियां
भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) जैसी संस्थाओं के साथ एक मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा मौजूद है। इसके बावजूद, रिपोर्ट्स में समन्वय की कमी, नीतिगत खामियां, अपर्याप्त प्रशिक्षण, संसाधनों की कमी और कमजोर बुनियादी ढांचे जैसी गंभीर समस्याओं की ओर इशारा किया गया है।
नोएडा के सेक्टर-150 में, जहां यह हादसा हुआ, वहां मौजूद बचाव उपकरण भी नाकाफी साबित हुए। रस्सियां छोटी थीं, क्रेन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं और सीढ़ियां भी पर्याप्त ऊंचाई तक नहीं बढ़ सकीं। यह स्थिति पूरी रात बनी रही।
केंद्रीकृत व्यवस्था बनी बाधा
हालिया घटना के बाद यह आलोचना तेज हो गई है कि संकट के समय व्यवस्था अक्सर चरमरा जाती है। हालांकि NDMA ने चक्रवात पूर्वानुमान और NDRF की प्रतिक्रिया में सुधार किया है, लेकिन तकनीक को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई से जोड़ने, जवाबदेही तय करने और अत्यधिक केंद्रीकृत व प्रतिक्रियात्मक मॉडल से बाहर निकलने में अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।
इस केंद्रीकृत ढांचे का असर SDRF पर भी पड़ता है, खासकर उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय राज्यों में, जहां खोज और बचाव अभियान बेहद कठिन हो जाते हैं। इन क्षेत्रों में बचाव दलों को 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई, अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं, सीमित संसाधनों, भूस्खलन, हिमस्खलन और दुर्गम रास्तों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ के दौरान जल बचाव अभियान और भी जटिल हो जाते हैं, जहां गोताखोरों को तेज बहाव और शून्य दृश्यता में जोखिमभरे हालात में काम करना पड़ता है। कई बार संचार व्यवस्था ठप हो जाती है और सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे बचावकर्मियों को मीलों पैदल चलना पड़ता है।
सरकार के प्रयास, लेकिन सवाल बरकरार
सरकार ने इस अहम क्षेत्र के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। 15वें वित्त आयोग ने आपदा प्रतिक्रिया और आपदा न्यूनीकरण को मिलाकर राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (NDRMF) और राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (SDRMF) बनाने की सिफारिश की है।वर्ष 2021–26 के लिए SDRMF में 1,60,153 करोड़ रुपये के आवंटन की सिफारिश की गई है, जिसमें से 80 प्रतिशत राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और 20 प्रतिशत राशि राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष के लिए निर्धारित है।
मानव संवेदनशीलता सबसे अहम
हालांकि, नोएडा की यह घटना साफ दिखाती है कि केवल बुनियादी ढांचे और तकनीक में निवेश तब तक प्रभावी नहीं हो सकता, जब तक मानवीय संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही को समान रूप से महत्व न दिया जाए।सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या अगर युवराज मेहता की जगह कोई वीआईपी होता, तो यही बचाव दल उसे इसी तरह डूबने के लिए छोड़ देता?

