
लीडर नहीं, फिर भी सड़कों पर उतरे हजारों कर्मचारी, कैसे भड़का आंदोलन?
नोएडा में वेतन असमानता और संवाद की कमी से मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। 100 फैक्ट्रियों और गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई, पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था।
13 अप्रैल को बड़ी संख्या में नोएडा की फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पुलिस पर पथराव, पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी और प्रदर्शन हिंसक हो गया। जिला पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों से शांति की अपील करते रहे। लेकिन तीन घंटे तक नोएडा फेज 2, सेक्टर 59, 60, 62, 63 और बगल के जिले गाजियाबाद में भी तनाव फैल गया। पुलिस को कई जगह लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। ऐसे में सबसे बड़ा सवार यह है कि बिना किसी नेता या संगठन के कर्मचारियों का प्रदर्शन इतना उग्र क्यों हो गया।
13 अप्रैल को नोएडा के अलग अलग सेक्टरों में जिस तरह से कर्मचारियों ने हिंसक प्रदर्शन किए वो एकाएक नहीं था। सैलरी में इजाफा, ओवरटाइम और वीक ऑफ के मुद्दे पर वो 10 अप्रैल से ही प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन के सामने अपनी बात रख रहे थे। लेकिन जब कोई उचित उत्तर नहीं मिला तो 13 अप्रैल को डंडे-लाठी लेकर सड़कों पर उतर गए। 100 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। 100 से अधिक गाड़ियां उनके गुस्से का शिकार बनीं। पुलिस वाले भी पथराव में घायल हुए। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन मामले में 60 लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया है। करीब 3 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। फैक्ट्री के मालिकों का कहना है कि दरअसल कर्मचारियों को उकसाया गया। लेकिन कहा जा रहा है कि प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवादहीनता की वजह से हालात खराब हुए।
बता दें कि रविवार 12 अप्रैल को जिला प्रशासन ने बैठक की। लेकिन कर्मचारियों या श्रमिकों को जानकारी नहीं थी। सवाल यह है कि जब शांतिपूर्वक आंदोलन चल रहा था तो बिना लीडर आंदोलन क्यों भड़का। इसके पीछे की वजह हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को न्यूनतम सैलरी 35 फीसद करना था। 10 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया। जब यह खबर नोएडा तक पहुंची तो कर्मचारी भी सैलरी में इजाफे की मांग करने लगे। नोएडा में कर्मचारियों ने कहा, '' यदि किसी एक कंपनी की दो यूनिट अलग अलग राज्यों में तो सैलरी में अंतर क्यों होना चाहिए। फैक्ट्री तो एक ही मालिक की है। ऐसे में फैक्ट्री ओनर को वही सैलरी देनी चाहिए जो हरियाणा में दे रहे हैं।
हरियाणा में अकुशल श्रमिकों को 11275 से बढ़ाकर15220 रुपए, अर्द्ध कुशल कर्मचारी को 12430 से 16780 और कुशल श्रमिक को 13704 से बढ़ाकर 18500 रुपए किया गया है। उच्च कुशल श्रमिक को 14389 से बढ़ाकर 19425 किया गया है। यानी कि करीब 35 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। अगर यूपी की बात करें तो अकुशल श्रमिकों को लगभग 11313 है। इसके साथ ही हरियाणा में दैनिक मजदूरी 580 से बढ़ाकर 750 रुपए है जबकि नोएडा में मजदूरी 435 से 535 रुपए के बीच है।
10 और 11 अप्रैल को दादरी-सूरजपुर रोड पर एक होजरी कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले एक हजार से अधिक श्रमिकों ने प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और तनाव बढ़ गया। योगी आदित्यनाथ ने मामले को सुलझाने के निर्देश दिए। 12 अप्रैल को गौतम बुद्ध नगर की डीम मेधा रूपम और श्रम विभाग के अधिकारियों ने फैक्ट्री के मालिकों से बैठक की और निर्देश दिया कि वेज से संबंधित प्रावधानों को सख्ती से अमल में लाया जाए।
सोमवार 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के बाहर करीब 400 कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया। इस आंदोलन का कोई लीडर नहीं था। कर्मचारी ही आंदोलन के लीडर रहे। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार दिन से वो धरने पर बैठे हैं लेकिन उनकी कोई आवाज नहीं सुन रहा। इस बीच किसी ने अफवाह फैलाई कि कर्मचारियों की मांग नहीं मानी जाएगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गया।

