
नोएडा हिंसा: चेतावनी के बावजूद क्यों चूका प्रशासन, अब उठे बड़े सवाल
नोएडा में 45 हजार मजदूरों के उग्र प्रदर्शन से 80 जगहों पर हिंसा हुई और जिला प्रशासन पर सवाल उठने लगे।
13 अप्रैल (सोमवार) को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भड़की श्रमिक हिंसा और आगजनी ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना अचानक नहीं थी। पिछले कई दिनों से इसके संकेत स्पष्ट रूप से सामने आ रहे थे। स्थिति उस वक्त बिगड़ गई जब करीब 40-45 हजार मजदूर सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया और शहर के कई औद्योगिक इलाकों में बवाल मच गया। 80 से अधिक स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
पहले से थे संकेत, फिर भी नहीं हुई तैयारी
9 अप्रैल से मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। नारेबाजी और बढ़ती भीड़ से तनाव साफ झलक रहा था। 10 अप्रैल को ट्रैफिक डायवर्जन लागू करना पड़ा, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। इसके बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई।
अचानक भड़की हिंसा, कई इलाके प्रभावित
13 अप्रैल को सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते सेक्टर-59, 62, 63 और फेज-2 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हिंसा फैल गई। सड़कें जाम हो गईं, कई जगह आगजनी हुई और 80 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं। करीब तीन घंटे तक शहर के प्रमुख हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
इंटेलिजेंस की नाकामी या लापरवाही?
नोएडा पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे आंदोलनों पर नजर रखना और समय पर अलर्ट देना इसी इकाई की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यह सवाल अहम है कि क्या सही इनपुट नहीं मिला, या फिर मिले संकेतों को नजरअंदाज कर दिया गया?
गुरुग्राम से भी नहीं लिया सबक
3 अप्रैल को गुरुग्राम के मानेसर में भी श्रमिक आंदोलन हिंसक हो चुका था। वहां भी फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। इसके बावजूद नोएडा में प्रशासन ने उस घटना से कोई सीख नहीं ली।
तीन घंटे तक ठप रहा शहर
हिंसा के दौरान कई जगह पुलिस बल बेहद कम नजर आया। सैकड़ों की भीड़ के सामने मुट्ठी भर पुलिसकर्मी हालात संभालने में असहाय दिखे। सड़कें जाम रहीं, आगजनी जारी रही और आम लोग फंसे रहे। करीब तीन घंटे तक कानून-व्यवस्था पूरी तरह चुनौती के सामने रही।
पुलिस का दावा: हालात अब काबू में
पुलिस के अनुसार, उसने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और न्यूनतम बल प्रयोग किया। गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में त्वरित कार्रवाई की गई। इस मामले में 7 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
हिंसा के बाद सरकार का फैसला
घटना के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान किया। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, जिसमें विभिन्न श्रेणियों में लगभग 3000 रुपए तक का इजाफा किया गया है।सरकार ने इसे तात्कालिक कदम बताते हुए कहा है कि आगे वेज बोर्ड के जरिए स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

