
राजभर का आजमगढ़ प्लान: 'समरसता रैली' के जरिए 2027 की बड़ी घेराबंदी
सुभासपा आज अतरौलिया में ब्राह्मणों और अति-पिछड़ों को साधने के लिए महारैली कर रही है, जानिए ओम प्रकाश राजभर के इस शक्ति प्रदर्शन के 5 बड़े राजनीतिक मायने।
UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सुभासपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) आज आजमगढ़ के अतरौलिया में 'सामाजिक समरसता महारैली' का आयोजन कर रही है। ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि इस रैली में एक लाख से अधिक लोग जुटेंगे। पार्टी ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। राजभर समाज के साथ-साथ अब सुभासपा ब्राह्मणों को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है। राजभर का कहना है कि ब्राह्मण समाज प्रबुद्ध है और उसके बिना कोई आगे नहीं बढ़ सकता। यह रैली एनडीए गठबंधन के भीतर सुभासपा की 'बारगेनिंग पावर' बढ़ाने का एक बड़ा जरिया मानी जा रही है।
आजमगढ़ को चुनने की बड़ी वजह और सपा पर प्रहार
गाजीपुर सुभासपा का पारंपरिक गढ़ रहा है। लेकिन इस बार राजभर ने आजमगढ़ के अतरौलिया को चुना है। राजभर का आरोप है कि आजमगढ़ में सपा विधायकों ने 'भय और आतंक' का माहौल बना रखा है। उनके अनुसार वहां जमीनों पर कब्जे और मारपीट की घटनाएं आम हैं। सबसे ज्यादा पीड़ित अति-पिछड़ा समाज है जिसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है। सुभासपा इसी पीड़ित वर्ग को सुरक्षा का भरोसा देकर अपना आधार बढ़ाना चाहती है। अतरौलिया में 15 से 20 हजार राजभर वोटर हैं। इनके साथ प्रजापति, पाल, नाई और चौहान जैसी जातियों को जोड़कर राजभर सपा के किले में सेंध लगाना चाहते हैं।
ब्राह्मणों में सुभासपा की अचानक बढ़ी दिलचस्पी
पहली बार सुभासपा खुलकर ब्राह्मणों को पुचकार रही है। राजभर का मानना है कि ब्राह्मण समाज भटके हुए लोगों को दिशा देता है। जानकारों के अनुसार, हाल की कुछ घटनाओं से ब्राह्मण समाज में नाराजगी है। सुभासपा इस नाराजगी को भुनाकर खुद को उनके विकल्प के तौर पर पेश कर रही है। पूर्वांचल की कई सीटों पर ब्राह्मण और राजभर वोटर मिलकर जीत का समीकरण बना सकते हैं। राजभर अपने विवादित बयानों की छवि को सुधारकर अब सर्वसमाज का नेता बनना चाहते हैं। मऊ लोकसभा चुनाव में बेटे की हार से राजभर ने यह कड़ा सबक सीखा है।
एनडीए में बढ़ेगी 'बारगेनिंग पावर' और 62 सीटों का लक्ष्य
राजभर ने साफ कर दिया है कि वे 2027 के लिए 62 सीटों पर तैयारी कर रहे हैं। इस महारैली के जरिए वे भाजपा को यह संदेश देना चाहते हैं कि पूर्वांचल में उनके बिना सफलता संभव नहीं है। 2022 में सपा के साथ गठबंधन में सुभासपा 18 सीटों पर लड़ी थी और 6 सीटें जीती थीं। अब एनडीए में रहते हुए वे पिछली बार से ज्यादा सीटों पर दावा ठोकना चाहते हैं। रैली में भाजपा और निषाद पार्टी के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। राजभर का दावा है कि 2027 में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर एनडीए 'क्लीन स्वीप' करेगी।
सड़क निर्माण से सहानुभूति और विपक्ष पर निशाना
अतरौलिया में राजभर ने जर्जर सड़कों का मुद्दा सुलझाकर स्थानीय सहानुभूति बटोरी है। कप्तानगंज से अहिरौला और सिकंदरपुर-नरियांव की सड़कों को पास कराकर उन्होंने खुद को 'विकास पुरुष' दिखाने की कोशिश की है। वहीं, उन्होंने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को 'फुका हुआ कारतूस' करार दिया। राजभर ने मायावती को आज भी दलितों का सबसे बड़ा नेता माना है। उनका कहना है कि अगर बसपा, कांग्रेस और ओवैसी साथ आ जाएं तो सपा विपक्ष में भी नहीं दिखेगी। फिलहाल, राजभर की नजर अतरौलिया की भीड़ के जरिए अपनी राजनीति की नई इबारत लिखने पर है।
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