
दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के पहले साल का रिपोर्टकार्ड, वादों और हकीकत के बीच कितनी सच्चाई?
दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने पहले साल में छवि बनाने और जनता के बीच दिखावे पर ज़्यादा ज़ोर दिया। उनके वादे अधूरे रहे, तो प्रशासनिक फैसलों में तेजी देखने को नहीं दिखी।
20 फरवरी, 2025 को जब शालीमार बाग से पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो भाजपा के इस फैसले पर हर तरफ संदेह था। हालांकि वह तीन बार पार्षद रह चुकी थीं, लेकिन उनकी तुलना शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज और आतिशी जैसी अनुभवी महिला नेताओं से की जा रही थी। भाजपा 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी थी, इसलिए वादों का बोझ भी भारी था-जैसे महिलाओं को ₹2,500 मासिक मदद, बुनियादी ढांचे में सुधार, और साफ हवा व यमुना।
छवि बनाने की कोशिश
एक साल बाद, शुरुआती संदेह सही साबित होते दिख रहे हैं। सरकार भले ही इसे "अभूतपूर्व प्रगति" का साल बता रही हो, लेकिन हकीकत में यह साल प्रशासनिक चूक और पीआर (PR) के नाम रहा। रेखा गुप्ता ने अपनी छवि एक सक्रिय सीएम की बनाने के लिए खूब पब्लिसिटी की। वे सचिवालय से ज्यादा सड़कों पर कैमरों के साथ नजर आईं-कभी स्कूल की फीस पर फटकार लगाते हुए, तो कभी सड़कों पर आवारा पशुओं के लिए अधिकारियों को डांटते हुए।
विवाद और बयानबाजी
ज्यादा पब्लिसिटी के चक्कर में रेखा गुप्ता से कई बड़ी गलतियां भी हुईं। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने अब तक के दिल्ली के मुख्यमंत्रियों में सबसे कमजोर प्रदर्शन किया है। एक दीक्षांत समारोह में उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 'नेताजी सुभाष पैलेस' कह दिया। प्रदूषण पर बात करते हुए उन्होंने AQI को 'तापमान' बता डाला। इसके अलावा उन्होंने यमुना की तुलना 'गंदे नाले' से कर दी।
वादे और अधूरे काम
चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने दो मुख्य वादे किए थे- 'महिला सम्मान योजना' के तहत ₹2,500 देना और एक साल में यमुना को इतना साफ करना कि वहां क्रूज चल सकें। लेकिन बजट में यमुना के लिए केवल ₹500 करोड़ दिए गए, जो विशेषज्ञों के अनुसार बहुत कम हैं। वहीं महिला योजना के लिए भी अब तक कोई स्पष्ट नियम नहीं बने हैं और न ही पैसा मिला है।
जवाबदेही की कमी
यमुना की सफाई का हाल यह है कि पिछले साल छठ पूजा पर वीआईपी लोगों के लिए पाइप के पानी से कृत्रिम तालाब बनाना पड़ा क्योंकि नदी का पानी बहुत जहरीला था। सरकार अपनी नाकामियों को 'पुरानी विरासत की समस्या' बता रही है।
कमजोर विपक्ष का फायदा
रेखा गुप्ता और भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि विपक्ष (AAP और कांग्रेस) बहुत कमजोर हो चुका है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पंजाब की राजनीति में व्यस्त हैं और दिल्ली में आतिशी के नेतृत्व में आप (AAP) कोई बड़ा आंदोलन नहीं कर पाई है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने में सफल रही है।

