दिल्ली में सरकारी फाइलों में 66 लाख पुराने वाहन, सड़कों पर सिर्फ 10% ,CAQM की रिपोर्ट में खुलासा
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दिल्ली में लोगों ने या तो अपने वाहन दूसरे राज्यों में बेच दिए हैं या उन्हें स्क्रैप करा दिया है (AI generated image)

दिल्ली में सरकारी फाइलों में 66 लाख पुराने वाहन, सड़कों पर सिर्फ 10% ,CAQM की रिपोर्ट में खुलासा

एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELVs) में 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल पुराने डीज़ल वाहन आते हैं। दिल्ली में इनकी संख्या 66 लाख बताई गई लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है


दिल्ली की हवा खराब होने के लिए जितने पुराने वाहन बताए जा रहे थे, वास्तव में उनमें से ज़्यादातर अब सड़कों पर हैं ही नहीं। इसका खुलासा हुआ है एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM) की ताज़ा रिपोर्ट में। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में सरकारी फाइलों में दर्ज 66 लाख एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELVs) में से केवल 10% ही फिलहाल चल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ताज़ा आंकड़ों से पता चल रहा है कि दिल्ली में 41,10,585 दोपहिया वाहन ऐसे हैं जो प्री-भारत स्टेज (BS), BS-I और BS-II श्रेणी के हैं, जबकि 25,42,807 कारें और अन्य प्रकार के वाहन BS-III श्रेणी के हैं। भारत स्टेज (BS) मानक केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वाहन उत्सर्जन मानक हैं, जिनका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि, “एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ईएलवी) वे पुराने पेट्रोल और डीज़ल वाहन होते हैं, जो क्रमशः 15 साल और 10 साल की अवधि पूरी कर चुके होते हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली सरकार ने ऐसे सभी पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो 15 और 10 साल पूरे कर चुके हैं।”

पिछले साल जब सरकारी एजेंसियां ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही थीं, तब अनुमान लगाया गया था कि राजधानी की सड़कों पर 66 लाख से अधिक ईएलवी चल रहे हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, “डेटाबेस में दो–तीन दशक पहले पंजीकृत वाहन भी शामिल हैं। लेकिन अगर जमीनी हकीकत देखें, तो इन ईएलवी में से एक-चौथाई भी फिलहाल शहर में मौजूद नहीं हैं। लोगों ने या तो अपने वाहन दूसरे राज्यों में बेच दिए हैं या उन्हें स्क्रैप करा दिया है…”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आंकड़ों के “बढ़े-चढ़े” होने की एक बड़ी वजह डेटा का सही रखरखाव न होना भी हो सकता है।

सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें दिल्ली की वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। इस बैठक में CAQM के अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों के मुताबिक, 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद दिल्ली परिवहन विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को ईएलवी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वाहन प्रदूषण को कम किया जा सके, जो राजधानी की जहरीली हवा के प्रमुख कारणों में से एक है।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने ईएलवी के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई पर लगी रोक से जुड़े अपने पुराने आदेश में संशोधन किया था और स्पष्ट किया था कि BS-IV से नीचे के मॉडलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

बैठक में प्रदूषण रोधी निगरानी संस्था (CAQM) द्वारा सुझाए गए उपायों में ईएलवी को स्क्रैप कराने के लिए प्रोत्साहन देना भी शामिल है। इसके अलावा, अगले तीन महीनों में दिल्ली की सभी 126 सीमा प्रवेश बिंदुओं पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि ईएलवी को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके।

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह भी सुझाव दिया गया है कि आगामी वित्त वर्ष तक तैयार होने वाली इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 के तहत दोपहिया वाहनों को प्रोत्साहन दिया जाए।

इसके अलावा, अगले दो वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग प्वाइंट्स की संख्या 9,000 से बढ़ाकर 36,000 करने, पहचाने गए 62 ट्रैफिक जाम वाले स्थानों पर समयबद्ध तरीके से त्वरित कार्रवाई करने और यातायात को सुचारू रखने के लिए पर्याप्त ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती जैसे कदमों पर भी बैठक में चर्चा हुई।

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