
BMC का मंच और निशाने पर सपा के मुस्लिम वोटर ! क्या यूपी चुनाव के लिए तैयार हो रहे हैं ओवैसी ?
मुबई में बीएमसी चुनाव प्रचार के मंच पर बोलते हुए ओवैसी ने सपा के मुस्लिम वोटरों को संदेश दिया।ओवैसी ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वो अखिलेश यादव की दुकान बंद कर देंगे।
महाराष्ट्र निकाय और बीएमसी चुनाव में धुंआधार प्रचार चल रहा है।अब इसका शोर उत्तर प्रदेश में भी सुनाई पड़ा है।AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मंच से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधी चुनौती दे दी।उन्होंने कहा कि वो अखिलेश यादव की दुकान बंद कर देंगे।इससे जहाँ एक साल बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर ओवैसी की तैयारी का संकेत मिल रहा है वहीं आने वाले समय में मुस्लिम वोट में सेंधमारी को लेकर भी सुगबुगाहट तेज़ हो गई है।
मुस्लिम लीडरशिप आगे आई तो ख़त्म होगी अखिलेश की दुकान : ओवैसी
यूपी विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का वक्त बाक़ी है लेकिन सियासी योद्धा यूपी की पिच पर उतरने के लिए बेताब हैं।हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले असदुद्दीन ओवैसी अब यूपी चुनाव पर फोकस करना चाहते हैं।बीएमसी (BMC)चुनाव में आईएमआईएम( AIMIM )चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पूरी ताक़त झोंक दी है।ओवैसी की जनसभाओं में भीड़ जुट रही है इससे उत्साहित होकर ओवैसी भी अपने भाषणों में ख़ास तौर पर मुस्लिम वोटरों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।मुबई में बीएमसी चुनाव प्रचार के मंच पर बोलते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटरों को टारगेट किया।ओवैसी ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वो अखिलेश यादव की दुकान बंद कर देंगे।ओवैसी ने प्रचार के दौरान अखिलेश यादव को सीधे ललकारते हुए कहा कि वो अखिलेश यादव की दुकान बंद कर देंगे।ओवैसी ने कहा कि '' कान खोल कर सुन लो, मुसलमानों की सियासी लीडरशिप आगे बढ़ेगी।अबू आसिम और अखिलेश यादव जानते हैं कि जिस दिन अक़्लियत की सियासी लीडरशिप आगे आएगी अखिलेश यादव की दुकान बंद हो जाएगी।’’ ओवैसी यहीं नहीं रुके बल्कि सपा अध्यक्ष की चुनौती देते हुए कहा कि वो उनकी दुकान बंद कर देंगे।
देखा जाए तो ओवैसी की यह चिंता और ये तेवर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की ज़मीन पर एआईएमआईएम के सक्रिय होने का साफ़ संकेत है।ज़ाहिर है ओवैसी का इसके लिए मुस्लिम वोटरों पर फोकस करना ज़रूरी है।यूपी में मुस्लिम वोटरों को न सिर्फ़ समाजवादी पार्टी का परम्परागत वोटर माना जाता है बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिम मतदाताओं ने सपा का खुलकर साथ दिया है।समाजवादी पार्टी ने भले ही अपने पुराने M+Y समीकरण को छोड़कर PDA का फॉर्म्युला अपनाया हो पर अल्पसंख्यकों की सबसे बड़ी आबादी मुसलमान वोटरों ने पूरी तरह से अखिलेश यादव का साथ दिया।लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन की सफलता में मुस्लिम वोटरों का बड़ा रोल रहा।अब अगर यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को यह कामयाबी दोहरानी हो तो मुस्लिम वोटरों का साथ चाहिए।
मुसलमानों के मुद्दों पर मुखर न होने का सवाल :
देखा जाए तो अखिलेश यादव की राजनीति को लेकर पिछले कुछ समय से यह बात उठती रही है कि सबको साथ लेकर चलने में मुसलमानों के मुद्दों की अनदेखी हो रही है।अखिलेश यादव पर ऐसे कई मुद्दों पर 'सॉफ्ट’ रहने का भी आरोप लगा है।बरेली में आई लव मोहम्मद के विवाद के बाद भड़की हिंसा में कार्रवाई होने के बाद अखिलेश बरेली एयरपोर्ट पर उतरकर रामपुर आज़म ख़ान से मिलने पहुंचे पर उन्होंने बरेली के किसी मुस्लिम नेता या परिवार से एयरपोर्ट पर भी मुलाक़ात नहीं की।वहीं आज़म ख़ान से लेकर इरफान सोलंकी जैसे नेताओं पर कार्रवाई में भी अखिलेश यादव पर बहुत ज़्यादा मुखर होकर योगी सरकार का विरोध न करने का आरोप लगा।हालाँकि समय के साथ इन नेताओं ने इस बात का संकेत भी दिया कि वो सपा अध्यक्ष और सपा के साथ ही हैं।अखिलेश ने भी क़ानूनी मामले में असमर्थता जताकर नेताओं की मदद की। पर यह तय है कि सपा की बदली रणनीति के साथ अखिलेश यादव के सार्वजनिक कार्यकमों में अब पीडीए ( PDA) की बात होती है अलग से मुस्लिम वोटरों को कोई बात नहीं होती।यह उनके आगामी राजनीति और रणनीति का संकेत भी देता है।
लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने सपा-कांग्रेस का एकतरफा साथ दिया-
इधर लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने पीडीए का नारा दिया तो मुसलमानों को कम टिकट दिए।मुरादाबाद जैसी सीट पर एस टी हसन का टिकट काटकर रुचिवीरा जैसे नेता को टिकट देने की बात
भी चर्चा में रही।हालाँकि यह कहा गया कि जेल में बंद नेता आज़म ख़ान के कहने पर यह टिकट दिया गया लेकिन एसटी हसन के समर्थकों ने उनका टिकट काटने को लेकर विरोध किया।कहा यह गया कि आम मुसलमानों में भी मुस्लिम नेता का टिकट कटने की चर्चा रही।इसके बावजूद चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने अखिलेश यादव का साथ दिया। लोकनीति-सीएसडीएस ( Lokniti -CSDS) के आंकड़ों के अनुसार लोकसभा चुनाव में 92 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का साथ दिया।हालाँकि इसमें संविधान बलदने के नैरेटिव मुद्दे का भी रोल रहा है।ऐसे में ओवैसी चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को पहले से ही अपने पाले में खींचें तो इसके लिए उन्होंने अखिलेश यादव को ललकारते हुए कहा कि अखिलेश यादव वोट लेते हैं लेकिन अवाम का कोई फायदा नहीं करते।इसलिए मुस्लिम लीडरशिप का आगे आना ज़रूरी है।
मुसलमान अब सिर्फ़ वोट नहीं देंगे, उनको हिस्सेदारी चाहिए : एआईएमआईएम
AIMIM प्रवक्ता आसिम वकार( Syed Asim Waqar ) का कहना है कि बंगाल चुनाव के बाद पार्टी पूरी तरह यूपी चुनाव पर फोकस करेगी और एआईएमआईएम चाहती है कि बीजेपी हारे।आसिम वकार कहते हैं '' बंगाल चुनाव के बाद पूरी तरह से यूपी पर फोकस करेंगे।अखिलेश यादव और राहुल गांधी से जनता नाराज़ है क्योंकि वो कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं।दलित वर्ग की अपनी जगह है।सवर्ण वोटर बीजेपी क़ी तरफ़ जा रहे हैं।ऐसे में सबसे ख़राब हालत मुस्लिम वोटर की है जो अपने आप को सबसे ज़्यादा यतीम समझ रहा है।अब मुसलमानों ने यह फ़ैसला कर लिया है कि सिर्फ़ वोट नहीं देंगे बल्कि अब हिस्सेदारी भी चाहिए।’’
यूपी में PDA एकजुट और अखिलेश यादव के साथ, सपा को ओवैसी की चिंता नहीं- सपा प्रवक्ता
फ़िलहाल असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान पर समाजवादी पार्टी को यह कहने का मौक़ा एक बार फिर मिल गया है कि ओवैसी बीजेपी की B team की तरह काम कर रहे हैं।समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फ़ख़रूल हसन चाँद ( Fakhrul Hasan Chand) कहते हैं ' हमें न उनकी ( ओवैसी की) कोई चिंता है न हम उनके बारे में सोच रहे हैं।हम कहते रहे हैं कि वो बीजेपी के साथ हैं और अब उनका BMC चुनाव में बीजेपी के साथ अंदरूनी गठजोड़ सामने आ ही गया।इसका उनके पास क्या जवाब है? यूपी में तो वो 2022 में भी आए थे पर कुछ नहीं कर पाए।दरअसल बिहार में जो सफलता की बात हो रही है वो इस वजह से कि वहाँ दूसरी परिस्थितियां हैं, दूसरे समीकरण हैं।बिहार में पीडीए बिखरा हुआ है।लेकिन यहाँ यूपी में पीडीए पूरी तरह से एकजुट है और समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के साथ है।लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से सपा का साथ मुस्लिम वोटरों ने दिया है, आगे भी साथ देंगे ।’
क्या मायावती के साथ आ सकते हैं ओवैसी-
हालाँकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में ओवैसी कोई कमाल शायद न ही कर पायें।यूपी में मुस्लिम वोटरों के वोटिंग पैटर्न को देखें तो यूपी का मुसलमान उस कैंडिडेट को वोट करता रहा है जो बीजेपी को हराने की स्थिति में हो।पर विश्लेषक इस बात को स्वीकार करते हैं कि ओवैसी कुछ सीटों में थोड़े समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।हालांकि अगर उनको मायावती का साथ मिल जाए तो कुछ बात बन सकती है।ये बात इसलिए भी अहम है क्योंकि ओवैसी ने पिछले दिनों बीएसपी अध्यक्ष मायावती की तारीफ़ भी की थी।मायावती ने अपनी लखनऊ रैली में 'पॉलिटिकल कमबैक’ का संकेत दिया है और मुस्लिम वोटरों के साथ आने से ख़ास तौर पर पश्चिमी यूपी में उनको लाभ मिल सकता है।हालाँकि अभी हाशिए पर पड़ी बीएसपी के लिए यह सोचना दूर की बात है।

