
Pinarayi-Mohanlal Interview: केरल के मुख्यमंत्री का दावा,'आरोपों से नहीं, सिर्फ पार्टी से डरता हूँ'
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अभिनेता मोहनलाल के साथ एक इंटरव्यू किया। अब ये इंटरव्यू काफी ज्यादा वायरल हो रहा है, क्योंकि इसमें केरल के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसी बातें कहीं हैं, जो अब सुर्खियां बटोर रही हैं।
'मुझे सिर्फ अपनी पार्टी का डर है, आरोपों का नहीं,' केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सुपरस्टार मोहनलाल के साथ एक हाई-प्रोफाइल टीवी बातचीत के दौरान यह चौंकाने वाला और स्पष्ट बयान दिया। 26 फरवरी, 2026 को प्रसारित इस कार्यक्रम में, जो काफी व्यक्तिगत और भावुक था, विजयन के इस एक वाक्य ने उनकी विचारधारा की गहराई को स्पष्ट कर दिया।
यह बातचीत राजनीतिक बहस के रूप में नहीं थी। इसमें उनके बचपन, परिवार, फिल्मों, किताबों और निजी जीवन की बातें हुईं। माहौल हल्का और आत्मीय था। लेकिन राजनीति पूरी तरह गायब नहीं थी। जब आरोपों और आलोचनाओं की बात आई, तब मुख्यमंत्री का जवाब साफ और सीधा था।
मोहनलाल ने उनसे पूछा कि क्या आरोप उन्हें परेशान करते हैं। इस पर विजयन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने जीवन में कुछ गलत किया है। इसलिए आरोप उन्हें विचलित नहीं करते। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्होंने अपनी पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने का काम किया है। उन्होंने साफ कहा, 'मुझे केवल अपनी पार्टी से डर है, आरोपों से नहीं।'
यह बयान उनकी राजनीतिक सोच को दिखाता है। विजयन लंबे समय से संगठन आधारित राजनीति से जुड़े रहे हैं। वे छात्र आंदोलन और ट्रेड यूनियन से आगे बढ़ते हुए मार्क्सवादी राजनीति में ऊँचे पद तक पहुँचे। वे Communist Party of India (Marxist) के वरिष्ठ नेता हैं। उनकी राजनीति व्यक्तिगत छवि पर कम और संगठन व विचारधारा पर अधिक आधारित रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सामूहिक जिम्मेदारी और पार्टी अनुशासन पर जोर दिया।
बातचीत के दौरान उनका एक अलग, भावनात्मक पक्ष भी सामने आया। उन्होंने अपनी माँ को याद करते हुए बताया कि वे उन्हें रामायण और महाभारत पढ़कर सुनाते थे, क्योंकि उनकी माँ पढ़ नहीं सकती थीं। उन्होंने बचपन के डर, अंधेरे और भूत-प्रेत की कहानियों का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी माँ का निधन हुआ, तब वे उनके पास मौजूद थे।
उन्होंने अपने करीबी सहयोगी कोडियेरी बालकृष्णन (Kodiyeri Balakrishnan) को भी याद किया। उनके बारे में बात करते हुए वे भावुक दिखे। इससे यह साफ हुआ कि सख्त छवि के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी है। उन्होंने आपातकाल के दौर का भी जिक्र किया। उस समय उन्हें हिरासत में यातना झेलनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों ने उन्हें बाद में जिम्मेदारी निभाते समय अधिक सतर्क और जवाबदेह बनाया।
इंटरव्यू में हल्के-फुल्के सवाल भी थे। मोहनलाल ने उनसे पूछा कि क्या वे मुस्कुराते हैं, उन्हें किस तरह की फिल्में पसंद हैं। विजयन ने बताया कि उन्हें एक्शन फिल्में पसंद हैं और वे फिल्मी संवाद भी याद रखते हैं।
इस इंटरव्यू पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आई हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक दुर्लभ मौका था, जब लोगों ने उन्हें एक इंसान के रूप में देखा। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बातचीत में कठिन सवाल नहीं पूछे गए। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि इसका समय राजनीतिक रूप से सुविधाजनक था। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें केवल अपनी पार्टी से डर लगता है।
यह बयान एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। यदि डर केवल पार्टी से है, तो जनता के प्रति जवाबदेही कहाँ है? क्या चुनाव परिणाम भी एक तरह का डर नहीं होना चाहिए? क्या मीडिया की आलोचना पूरी तरह नजरअंदाज की जा सकती है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब इस बातचीत में नहीं मिले। लेकिन इस कार्यक्रम ने विजयन की एक अलग छवि जरूर दिखाई। एक ऐसा नेता, जो अपने बचपन को याद करता है। एक बेटा, जो अपनी माँ के साथ बिताए समय को नहीं भूलता। एक कार्यकर्ता, जिसने कठिन समय झेला। और एक मुख्यमंत्री, जो कहता है कि उसका अंतरात्मा साफ है।
अंत में उन्होंने अपनी छवि के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें अक्सर “सख्त” नेता के रूप में दिखाया जाता है। उनका मानना है कि मीडिया अक्सर उनके गुस्से वाले पलों को दिखाता है, खुशियों के पलों को नहीं। उन्होंने कहा कि वे खबरों से परेशान नहीं होते और कभी मीडिया को फोन करके शिकायत नहीं करते।
यह बातचीत केवल एक इंटरव्यू नहीं था। यह एक ऐसे नेता की सोच और व्यक्तित्व की झलक थी, जो खुद को सबसे पहले एक पार्टी कार्यकर्ता मानता है।

