
शंकराचार्य विवाद पर दो अलग रुख, यूपी सरकार के भीतर मतभेद!
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर सियासत तेज है। सीएम के संकेत, डिप्टी सीएम की नरमी और अखिलेश यादव के समर्थन से मामला और गरमा गया है।
Shankaracharya controversy: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में अब सियासत चरम पर है। यूपी के सीएम ने बिना नाम लिए कहा था कि साधु संतों को ऐसा आचरण पेश करना चाहिए जो समाज को दिशा दे, कालनेमि नहीं बनना चाहिए। लेकिन उनके डिप्टी यानी केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अब इस विवाद को खत्म करने की जरूरत है। जैसे ही केशव प्रसाद मौर्य की तरफ से यह बयान आया तुरंत अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसे ही शख्स को यानी केशव प्रसाद मौर्य को सीएम बनना चाहिए। इन सबके बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुलकर बैटिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर हाल में वो शंकराचार्य का समर्थन करेंगे।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वो समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई है। जो अकड़ में बैठा है उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। बता दें कि केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि वो पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करते हैं। उनसे प्रार्थना है कि वो स्नान करें।
भाजपा नैतिकता की सूखी नदी बन गयी है। वहाँ लोभ, लालच और सत्ता की लोलुपता की दरारों के सिवा कुछ नहीं बचा है और वहां अहंकार, दंभ और घमंड के अतिरिक्त कुछ भी शेष नहीं है।जिसको कभी भी रत्ती भर भी सच्चा सम्मान मिला हो, वो ही किसी अन्य को मान-सम्मान दे सकता है- धर्म-विरोधी भाजपा का मुखौटा उतर गया है और भाजपा के धोखा खाए समर्थकों का चेहरा भी-अखिलेश यादव
न किसीको ‘स्नान’ से रोकें, न किसीको ‘दान’ से रोकें, सदियों से जो चलती आई, वो सनातनी-सरिता न रोकें! भाजपा जाए तो संस्कार बच पाए!- अखिलेश यादव
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि परमपूज्य जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठ स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ घोर अन्याय किया गया। उनके शिष्यों को घसीट-घसीट कर पीटा गया और 90 वर्ष के बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वही लोग स्वामी जी से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। स्वामी जी का अपमान हिंदू धर्म की आस्था पर सीधी चोट है।
18 जनवरी को क्या हुआ था
18 जनवरी को मौनी अमावस्या वाले दिन अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने के लिए कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्कामुकी हुई। उसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। उस बीच माघ मेला प्रशासन ने दो दिन के भीतर दो नोटिस जारी किया। पहले नोटिस में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर भी सवाल थे। दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या वाले दिन बवाल को लेकर था। प्रशासन ने यह भी पूछा कि क्यों नहीं आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। बता दें कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दोनों नोटिस का जवाब भेजा गया है।
माघ मेला प्रशासन से टकराव के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के दिन और बसंत पंचमी को भी स्नान करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि स्नान तभी करेंगे जब प्रशासन माफी मांगेगा। यहा पर बता दें कि माघ मेला प्रशासन की तरफ से दो नोटिस शंकराचार्य को भेजी गई है और फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं।

