
क्या शिवसेना में फिर पड़ेगी दरार? शिंदे की ‘होटल पॉलिटिक्स’ पर उद्धव ठाकरे का बड़ा दावा!
BMC Mayor: शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपने सभी 29 पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल में इसलिए रुकवाया है, ताकि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति से बचा जा सके।
Maharashtra local body elections: मुंबई की सियासत एक बार फिर होटल के कमरों से चल रही है। लोकतंत्र की सबसे अमीर नगर पालिका बीएमसी अब मतगणना केंद्र से ज्यादा फाइव स्टार पांच होटल के गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन असली मुकाबला अब शुरू हुआ है। कौन बनेगा मुंबई का मेयर, कौन थामेगा सत्ता की चाबी और किसे है अपनों से टूटने का डर, इन सवालों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नए चुने गए 29 पार्षद इस समय मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे हुए हैं। सभी पार्षदों को एक साथ होटल में बुलाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
उद्धव ठाकरे का बड़ा आरोप
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत के बाद शिंदे गुट में टूट का डर है। इसी वजह से पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराया गया है। उन्होंने 2022 की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरते हैं। उन्हें पता है कि जो एक बार टूट चुका है, वह दोबारा भी टूट सकता है। गौरतलब है कि 2022 में 40 विधायकों के विद्रोह के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। इसी विद्रोह के चलते उद्धव ठाकरे की कांग्रेस-एनसीपी के साथ बनी सरकार गिर गई थी। बाद में एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने।
पार्षदों को होटल में क्यों रखा गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपने सभी 29 पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल में इसलिए रुकवाया है, ताकि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति से बचा जा सके। साथ ही, शिवसेना की ओर से बीएमसी में मेयर पद को लेकर भी मांग रखी गई है।
मेयर पद पर ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला
रिपोर्ट्स के अनुसार,शिवसेना ने बीएमसी में ढाई साल के लिए अपना मेयर बनाने की मांग की है। योजना यह है कि बीजेपी और शिवसेना दोनों ढाई-ढाई साल तक मेयर पद संभालें, लेकिन पहले कार्यकाल में शिवसेना का मेयर बने। इस मांग की बड़ी वजह यह है कि शिवसेना के समर्थन के बिना बीजेपी बीएमसी में मेयर नहीं बना सकती।
29 में से 25 निकायों में महायुति की जीत
शुक्रवार को हुए नगर निगम चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (महायुति) ने शानदार प्रदर्शन किया। 29 में से 25 नगर निकायों में महायुति को जीत मिली। बीएमसी चुनाव में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालांकि, बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है, इसलिए बीजेपी को शिंदे गुट की शिवसेना का सहारा लेना ही पड़ेगा। इस जीत के साथ बीएमसी पर ठाकरे परिवार का लगभग 30 साल पुराना दबदबा खत्म हो गया है।
उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी
करीब 20 साल बाद साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की जोड़ी पूरी तरह असफल भी नहीं रही। शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस गठबंधन ने कुल 71 सीटें जीतीं (65 + 6) और मुंबई के मराठी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रखी।
उद्धव ठाकरे का मेयर को लेकर बयान
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी अभी भी मुंबई में मेयर बनाना चाहती है, भले ही उनके पास बहुमत न हो। उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा है कि मुंबई में हमारा मेयर बने। आज भी यही इच्छा है, लेकिन फिलहाल हमारे पास बहुमत नहीं है।
रैलियों और वोटों पर तंज
उद्धव ठाकरे ने महायुति पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी और राज ठाकरे की संयुक्त रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी थी, जबकि महायुति की रैलियों में कुर्सियां खाली थीं। उन्होंने कहा कि मुझे हैरानी है कि क्या उन खाली कुर्सियों ने उन्हें वोट दिया, क्योंकि उन्हें वोट मिल गए, लेकिन हमारी भीड़ वोटों में नहीं बदल पाई।

