
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज संगम में भारी हंगामा, शंकराचार्य का रथ रोकने पर समर्थकों-पुलिस में नोकझोंक
पुलिस प्रशासन ने शंकराचार्य से केवल पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई और इसे मनमाना फैसला बताया। हालात बिगड़ते देख पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम स्नान के लिए जा रहे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस प्रशासन ने संगम जाने से पहले ही रोक दिया। रथ और जुलूस को रास्ते में रोके जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया और शंकराचार्य के समर्थक साधु-संतों तथा पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
शंकराचार्य ने पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही का आरोप लगाया। रथ रोके जाने की घटना के बाद संगम क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। पुलिस से झड़प की सूचना वायरलेस पर प्रसारित होते ही बड़ी संख्या में अधिकारी फोर्स के साथ संगम तट पर पहुंच गए। पुलिस ने शंकराचार्य को रथ से नीचे उतरने नहीं दिया और स्पष्ट किया कि जुलूस के साथ संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं है।
पुलिस प्रशासन ने शंकराचार्य से केवल पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई और इसे मनमाना फैसला बताया। हालात बिगड़ते देख पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। मौके पर गृह सचिव मोहित गुप्ता, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार और मेलाधिकारी ऋषिराज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंच गए।
पुलिस से हुई झड़प के बाद शंकराचार्य के समर्थक 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में लिया गया है। संगम के घाटों पर स्नान जारी है, जबकि शंकराचार्य समर्थकों के साथ संगम से पहले ही धरने पर बैठ गए हैं।
शंकराचार्य को संगम स्नान से रोके जाने पर समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। पांटून पुल संख्या चार के पास समर्थकों ने हंगामा किया, जिससे बैरिकेडिंग टूट गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
पुलिस अधिकारी शंकराचार्य को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह रथ से नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन मुख्यमंत्री से बातचीत कर दिशा-निर्देश लेने की कोशिश कर रहा है। मंडलायुक्त ने शासन के अधिकारियों से संपर्क साधा है और निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
इस बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम स्नान करने से इंकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मौजूदगी में उनके साथ आए साधु-संतों के साथ मारपीट और अभद्रता की गई। शंकराचार्य ने कहा कि वह मान-अपमान से ऊपर हैं, लेकिन साधु-संतों के साथ की गई बदसलूकी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

