
'इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा'… दूषित पानी से मौतों पर राहुल ने मोहन सरकार को घेरा
Indore water deaths: इस घटना को लेकर विपक्ष लगातार सत्तापक्ष को घेरने में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को 'जीवन के अधिकार की हत्या' बताया है।
Indore water contamination: जिस शहर को देश का सबसे साफ शहर कहा जाता है, वहीं लोगों को पीने के लिए जहर दे दिया गया। इंदौर के भागीरथपुरा में जो हुआ, वह महज एक हादसा नहीं था, यह सिस्टम की नींद, सत्ता की संवेदनहीनता और जवाबदेही के गायब होने की कहानी है। जब घरों में मातम पसरा है, तब सवाल सिर्फ मौतों का नहीं है। सवाल है उस जम्मेदारी का भी है, जो आज भी जवाब देने से बच रही है। हालांकि, यह मुद्दा दिन बीतने के साथ सियासी जंग में तब्दील हो चुका है। इस घटना को लेकर विपक्ष लगातार सत्तापक्ष को घेरने में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को 'जीवन के अधिकार की हत्या' बताया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बीजेपी पर हमला बोला है।
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 'इंदौर में लोगों को पानी नहीं, जहर बांटा गया। प्रशासन गहरी नींद में सोता रहा। घर-घर मातम है, गरीब लोग बेबस हैं और ऊपर से बीजेपी नेताओं के अहंकारी बयान सामने आ रहे हैं।' राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब लोग बार-बार बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, तो सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर का पानी पीने की सप्लाई में कैसे मिला? समय रहते पानी की सप्लाई बंद क्यों नहीं की गई? जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
उन्होंने कहा कि साफ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। इस अधिकार के हनन के लिए बीजेपी का “डबल इंजन” शासन, लापरवाह प्रशासन और असंवेदनशील नेतृत्व जिम्मेदार है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है—कहीं दवाइयों से मौतें हो रही हैं, कहीं अस्पतालों में बच्चों की जान जा रही है और अब दूषित पानी से लोग मर रहे हैं।
इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 2, 2026
घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं - और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया।
लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की - फिर भी…
खड़गे का तीखा प्रहार
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले नरेंद्र मोदी जी, हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं। यह वही इंदौर शहर है, जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार “Cleanest City” का ख़िताब जीता है। ये शर्मनाक बात है कि यहां पर भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं। 11 साल से देश केवल लंबे-चौड़े भाषण, झूठ-प्रपंच, खोखले दावे, डबल-इंजन की डींगें सुन रहा है।
उन्होंने कहा कि जब मंत्री जी से सवाल पूछा जाता है तो वो गाली-गलौज पर उतर आते हैं। सत्ता के अहंकार में उल्टा पत्रकार पर हावी हो जाते हैं। भाजपा सरकारों के कुशासन पर पूरी मशीनरी पर्दा डालने में जुट जाती है। जल जीवन मिशन समेत, हर योजना में भ्रष्टाचार और धांधली है। याद दिलाना जरूरी है कि जल जीवन मिशन का 10% फंड दूषित पानी को साफ करने के लिए दिया जाता है। मोदी सरकार और भाजपा ने ना देश को साफ पानी मुहैया कराया है और ना ही स्वच्छ हवा। आम जनता भुगत रही है।
जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले @narendramodi जी, हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) January 2, 2026
यह वही इंदौर शहर है जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार “Cleanest City” का ख़िताब जीता है। ये शर्मनाक बात है…
उमा भारती ने अपनी सरकार को घेरा
वहीं, बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी इस घटना को लेकर बेहद कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि 'यह ऐसा पाप है, जिसका कोई बहाना नहीं हो सकता। या तो प्रायश्चित होगा या फिर सजा।'
उमा भारती ने सवाल किया कि जब जनता गंदा पानी पी रही थी और बीमार हो रही थी, तब जिम्मेदार लोग पद पर बैठे-बैठे बोतलबंद पानी क्यों पीते रहे? उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं था।
उमा भारती ने साफ कहा कि किसी की जान की कीमत 2 लाख रुपये का मुआवजा नहीं हो सकती। यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए एक बड़ी परीक्षा की घड़ी है। उन्होंने मांग की कि नीचे से ऊपर तक सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। जिस शहर को “सबसे स्वच्छ शहर” का पुरस्कार मिला हो, वहां नल के पानी में जहर मिलना पूरे सिस्टम के लिए शर्मनाक है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
इस घटना में सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं और कई की जान चली गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि पुलिस चौकी के शौचालय से सीवर का पानी पीने की सप्लाई में मिल गया था। यह लापरवाही पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

