
दिल्ली में 5 साल में सिर्फ 17% फंड वायु प्रदूषण पर हुआ खर्च, RTI में खुलासा
दिल्ली की जहरीली हवा से निपटने के लिए न केवल पर्याप्त फंड की जरूरत है, बल्कि वैज्ञानिक योजना, पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
दिल्ली की गंभीर वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बहुत कम फंड दिया गया और जो फंड मिला, उसका भी बड़ा हिस्सा खर्च नहीं किया गया। यह खुलासा एक RTI (सूचना का अधिकार) से हुआ है। पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा को मिली RTI जानकारी के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार की नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत दिल्ली को 81.36 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इसमें से केवल 14.1 करोड़ रुपये यानी करीब 17 फीसदी राशि ही खर्च की गई।
हाल के वर्षों में स्थिति और खराब
RTI के अनुसार, पिछले दो वर्षों में हालात और खराब हुए हैं। इन वर्षों में लगभग कोई नया फंड आवंटित नहीं किया गया। पुराने बचे हुए फंड का भी बहुत छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल हुआ। विमलेंदु झा ने 2 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह RTI सरकार के “क्लीन एयर” दावों की पोल खोलती है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दिल्ली को सिर्फ 81.36 करोड़ रुपये मिले। इसमें से केवल 17 फीसदी खर्च हुआ। पिछले दो साल में 38 करोड़ रुपये आवंटित हुए, लेकिन सिर्फ 1.35 करोड़ रुपये (3.5 फीसदी से भी कम) खर्च किए गए। वित्त वर्ष 2021-22 में 11.25 करोड़ रुपये मिले, लेकिन एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। 2025-26 में कोई नया आवंटन नहीं हुआ और पुराने फंड को ही कार्रवाई बताकर दिखाया गया। झा ने कहा कि हर सर्दी में शोर मचता है, पूरे साल बहाने दिए जाते हैं और जानबूझकर पैसा खर्च नहीं किया जाता, जबकि लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
क्या है नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP)
NCAP की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में की थी। इसका उद्देश्य देश के 130 शहरों में वायु प्रदूषण को कम करना है। इस कार्यक्रम के तहत शहर-विशेष लक्ष्य तय किए जाते हैं। फंडिंग परफॉर्मेंस से जुड़ी होती है। ट्रांसपोर्ट, उद्योग, कचरा प्रबंधन और शहरी विकास से जुड़े उपायों को फंड दिया जाता है। सड़क की धूल नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और औद्योगिक उत्सर्जन कम करना शामिल है। NCAP के राष्ट्रीय डैशबोर्ड के मुताबिक, देश के 30 शहरों को कुल 13,415.43 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
दिल्ली को न पर्याप्त फंड मिला, न सही इस्तेमाल हुआ
विमलेंदु झा ने The Federal से बातचीत में कहा कि पिछले साल दिल्ली के लिए कोई नया फंड नहीं दिया गया, पुराने फंड को आगे बढ़ाया गया और उसमें से भी सिर्फ करीब 1 करोड़ रुपये खर्च हुए। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े सरकार के अपने डेटा हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिए हैं। झा ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली जैसे शहर में भी सिर्फ 17 फीसदी फंड खर्च हुआ। बीजेपी हो या आम आदमी पार्टी, दोनों ही दलों ने वायु प्रदूषण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।
SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) के संस्थापक गुफरान बेग ने कहा कि समस्या केवल पैसों की नहीं, बल्कि सही योजना की भी है। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत दिल्ली को वायु प्रदूषण के लिए कोई फंड नहीं मिला। NCAP के तहत भी केवल नाममात्र की राशि दी गई। बेग के अनुसार, फंड खर्च करने की पूरी संभावना है, लेकिन वैज्ञानिक संस्थाओं और क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच तालमेल नहीं है। योजनाओं में वैज्ञानिक आधार की कमी है। उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर “क्विक फिक्स” पर ध्यान देती हैं, जैसे कुछ बसों को इलेक्ट्रिक करना और सड़कों पर पानी छिड़कना। लेकिन इन उपायों से हवा की गुणवत्ता में कोई ठोस सुधार नहीं होता।
CSE का दावा: धूल नियंत्रण पर ज्यादा खर्च
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि दिल्ली की समस्या सिर्फ NCAP तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि देशभर में NCAP के तहत 64 फीसदी से ज्यादा खर्च सड़क की धूल नियंत्रण पर हुआ। उद्योग और वाहनों जैसे प्रदूषण के बड़े स्रोतों पर कम ध्यान दिया गया। उनके मुताबिक, हवा साफ करने के लिए कचरा प्रबंधन, ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन, शहरी विकास इन सभी क्षेत्रों के फंड को आपस में जोड़ना जरूरी है।
दिल्ली सरकार ने RTI आंकड़ों पर सवाल उठाए
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने RTI के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल फंड का 100 फीसदी उपयोग किया गया। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) पर पैसा खर्च किया गया। सिरसा ने यह भी कहा कि इस साल उन्होंने एमसीडी को करीब 80 करोड़ रुपये सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के लिए दिए हैं।
केंद्र से कम फंड के लिए AAP सरकार को ठहराया जिम्मेदार
मंत्री सिरसा ने कहा कि केंद्र से कम फंड मिलने की वजह पिछली आम आदमी पार्टी सरकार थी, क्योंकि NCAP फंडिंग परफॉर्मेंस से जुड़ी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने NCAP फंड का सही उपयोग नहीं किया। पर्यावरण सेस के जरिए जुटाए गए करीब 2,000 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं किए गए। हालांकि, दिल्ली के पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय से इस मामले पर संपर्क नहीं हो सका।

