
संगम स्नान से होटल मेन्यू तक: BSNL निदेशक ने दौरे के लिए रखी डिमांड, केंद्र ने भेजा नोटिस
BSNL के निदेशक के आदेश में करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कार्यक्रम में संगम स्नान, नौका विहार और बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट व पातालपुरी मंदिर के दर्शन शामिल थे।
बीएसएनएल के निदेशक विवेक बंजल के प्रस्तावित प्रयागराज दौरे को लेकर जारी कथित ‘शाही इंतजाम’ वाले कार्यालय आदेश पर विवाद गहरा गया है। केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशक को सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन करार देते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
19 फरवरी को जारी एक प्रोटोकॉल आदेश के अनुसार, विवेक बंजल 25-26 फरवरी को प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले थे। आदेश में करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कार्यक्रम में संगम स्नान, नौका विहार और बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट व पातालपुरी मंदिर के दर्शन शामिल थे।
हर स्थल पर किस अधिकारी की क्या भूमिका होगी, इसका विस्तृत उल्लेख किया गया था।
‘स्नान किट’ से बढ़ा विवाद
विवाद सबसे ज्यादा उस सूची को लेकर हुआ जिसमें संगम स्नान के लिए तौलिया, अंडरवियर, चप्पल, कंघी, दर्पण और तेल की बोतल तक की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। पुरुषों के लिए छह और महिलाओं के लिए दो स्नान किट तैयार करने को कहा गया था।
इसके अलावा घाट पर चादर की व्यवस्था, होटल व सर्किट हाउस में सूखे मेवे, फल, शेविंग किट, टूथपेस्ट, ब्रश, साबुन, शैम्पू और तेल उपलब्ध कराने का भी उल्लेख था। कुल 20 अलग-अलग कार्यों के लिए लगभग 50 अधिकारियों को तैनात किया गया था।
आदेश वायरल, दौरा रद्द
जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मामले ने तूल पकड़ लिया। आलोचनाओं के बीच आनन-फानन में प्रयागराज दौरा रद्द कर दिया गया।
प्रयागराज के एक वरिष्ठ बीएसएनएल अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश भी हो सकती है, हालांकि उन्होंने आदेश की सत्यता पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
क्या बोले मंत्री सिंधिया?
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि स्थापित नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि निदेशक को सात दिन में जवाब देने को कहा गया है और जवाब मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
सिंधिया ने कहा, “यह 21वीं सदी है, इस तरह का व्यवहार चौंकाने वाला है। संस्थागत अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन सर्वोपरि है।”
पहले भी उठे हैं ऐसे सवाल
यह पहला अवसर नहीं है जब किसी अधिकारी के आचरण को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले दिल्ली में एक वरिष्ठ अधिकारी पर स्टेडियम खाली कराकर निजी उपयोग के आरोप लगे थे, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था।
बीएसएनएल प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक प्रोटोकॉल और सार्वजनिक पदाधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

