MP: नवजात शिशु वार्मर में बड़ा घोटाला, UPS की जगह 900 इन्वर्टर सप्लाई, करोड़ों की हेराफेरी!
x

MP: नवजात शिशु वार्मर में बड़ा घोटाला, UPS की जगह 900 इन्वर्टर सप्लाई, करोड़ों की हेराफेरी!

टेंडर में UPS का उल्लेख था, लेकिन इन्वर्टर सप्लाई किया गया। अब जिम्मेदार एजेंसियां और सप्लायर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। मामले की जांच जारी है।


Click the Play button to hear this message in audio format

मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात शिशुओं के लिए खरीदे गए वार्मर की आपूर्ति में अनियमितताएं सामने आई हैं। टेंडर में UPS चाहिए था, लेकिन अस्पतालों में कमजोर इन्वर्टर पहुंचा, जो नवजातों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। अब करोड़ों के नुकसान और जवाबदेही के सवाल उठ रहे हैं।

आरोप है कि मध्य प्रदेश हेल्थ सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPHSCL) द्वारा जारी टेंडर के मुताबिक़, वार्मर के साथ UPS (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) देना था, लेकिन सप्लायर ने इसकी जगह इन्वर्टर सप्लाई कर दिया। अब मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित विभाग और एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रही हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन, मध्य प्रदेश ने प्रदेशभर के अस्पतालों के लिए करीब 7 करोड़ रुपये में 900 नवजात शिशु वार्मर खरीदे। यह टेंडर MPHSCL के माध्यम से जारी किया गया था। टेंडर में साफ लिखा था कि वार्मर के साथ UPS दिया जाए, जिसमें कम से कम 60 मिनट का बैकअप होना चाहिए। UPS की यह शर्त इसलिए थी, ताकि बिजली कटने पर भी वार्मर लगातार काम करता रहे।

UPS की जगह इन्वर्टर सप्लाई

हालांकि, ग्वालियर की फर्म ने अस्पतालों में UPS के बजाय इन्वर्टर सप्लाई कर दिया। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल ने इसकी शिकायत की। हमीदिया अस्पताल ने पत्र में बताया कि इन्वर्टर के साथ वार्मर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल होता है। जबकि UPS के साथ ऐसा कोई समस्या नहीं होती।

विशेषज्ञों के अनुसार, UPS बिजली जाते ही तुरंत सप्लाई देता है, वोल्टेज स्थिर रहता है। इन्वर्टर में 2-10 सेकंड का गैप आता है और कई बार वोल्टेज में उतार-चढ़ाव भी होता है। UPS नवजात वार्मर के लिए सुरक्षित होता है, जिससे मशीन के सर्किट, सेंसर और अलार्म सही से काम करते हैं। इन्वर्टर की कीमत UPS से कम होती है, जिससे कुछ लोगों द्वारा मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का नुकसान करने की आशंका जताई जा रही है।

जिम्मेदारों का बयान

MPHSCL का कहना है कि सप्लायर को टेंडर के मुताबिक ही उपकरण सप्लाई करना चाहिए। अगर कहीं गड़बड़ी है तो संबंधित स्वास्थ्य संस्थान को सूचित करना चाहिए। जांच में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई होगी। शिशु स्वास्थ्य पोषण शाखा ने कहा कि टेंडर के स्पेशिफिकेशन के अनुसार सप्लाई सुनिश्चित करना कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी है और मामले की जांच जारी है। वहीं, सप्लायर का कहना है कि डेमो के समय उन्होंने इन्वर्टर ही दिखाया था और उस समय किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। उनका कहना था कि दोनों एक जैसे हैं।

Read More
Next Story