
शंकराचार्य पर बयानबाजी तेज, योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव आमने-सामने
शंकराचार्य विवाद पर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुलकर यूपी विधानसभा में बोलते हुए कहा 'हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता’। इसके बाद अखिलेश यादव ने इसका जवाब दिया है।
प्रयागराज में माघ मेला स्नान से शुरू हुए विवाद की गूंज अब यूपी विधानसभा में सुनाई पड़ रही है।अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच सीधे टकराव शुरू हो गया।पिछले दिनों अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के यूपी के मुख्यमंत्री को सीधी चुनौती देने के बाद अब योगी आदित्यनाथ ने भी उनको दो टूक शब्दों में जवाब देते हुए पहली बार इस विषय पर खुलकर बोला है।वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसका जवाब दिया है जिससे एक बार फिर शंकराचार्य विवाद पर सियासी माहौल गरमा गया है।
पहली बार सीधे शंकराचार्य विवाद कर बोले योगी-
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान से शुरू हुए विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।यूपी विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलते हुए यूपी के मुख्यमंत्री ने इस बात का सीधा जवाब दिया तो माहौल गरमा गया।दरअसल बजट सत्र में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने शंकराचार्य के अपमान का न सिर्फ़ मुद्दा उठाया था बल्कि इस मुद्दे पर सदन में हंगामा भी देखने को मिला था।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर पहली बार सीधे अपनी बात रखते हुए दो टूक जवाब दिया।योगी ने शंकराचार्य विवाद पर बोलते हुए कहा कि ‘’हर व्यक्ति ख़ुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।देश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और हर व्यक्ति को उसका पालन करना होगा।’’ यही नहीं योगी ने सीधे तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जवाब देते हुए कहा कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मर्यादा का पालन करता है।
योगी ने किया प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन, सपा पर निशाना-
विधानसभा में शुक्रवार को दिए गए योगी के इस बयान के बाद राजनीति तेज़ हो गई है।दरअसल योगी ने माघ मेले में प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान के लिए पालकी से जाने पर रोकने की बात का भी समर्थन किया है।यूपी सीएम ने कहा कि 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं के बीच अगर कोई एग्जिट गेट से जाना चाहे तो उससे भगदड़ हो सकती थी।योगी ने समाजवादी पार्टी को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘’अगर सपा पूजना चाहे (अविमुक्तेश्वरानंद को) तो पूजे। अगर शंकराचार्य थे तो लाठीचार्ज क्यों हुआ था और मुकदमा क्यों दर्ज़ हुआ था?’’ दरअसल सपा सरकार के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर न सिर्फ़ काशी में एफ़आईआर हुई थी बल्कि पुलिस ने उनको रोकने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। इसी पर योगी ने सवाल उठाते हुए सपा को घेरा क्योंकि माघ मेला स्नान विवाद के बाद से ही लगातार अखिलेश यादव न सिर्फ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन कर रहे हैं बल्कि उन्होंने माघ मेले में धरना दे रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फ़ोन से बात भी की थी।
पहले भी 'कालनेमि’ और 'असली हिंदू’ कहते हुए ज़ुबानी जंग हो चुकी है-
फ़िलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच विवाद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य ने इसे अपना और ज्योतिष पीठ का अपमान बताया था जबकि प्रशासन ने उनकी ‘शंकराचार्य’ उपाधि पर ही सवाल उठाते हुए उनसे इसे साबित करने के लिए दस्तावेज मांगे थे।दरअसल ज्योतिष पीठ की शंकराचार्य की पदवी पर कोर्ट में मुकदमा लंबित है और प्रशासन ने इसी आधार पर नोटिस जारी किया था। शंकराचार्य ने इसे हिंदू धर्म का अपमान करार दिया और उसके बाद से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
इससे पहले यूपी सीएम ने इशारों में सनातन धर्म के ख़िलाफ़ साज़िश करने वाले ‘कालनेमि’ की बात कहते हुए विवाद गरमा दिया था।जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सीएम योगी को ख़ुद को ‘असली हिंदू’ साबित करने की चुनौती दी थी।काशी जाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गो-रक्षा के लिए अपने अभियान को तेज़ करने की तो बात कही थी साथ ही योगी पर सीधा हमला करते हुए योगी को ख़ुद को ‘असली हिंदू’ साबित करने की चुनौती दे दी थी।उन्होंने योगी को ‘औरंगजेब’ तक कहा था और आरोप लगाया था कि उनके शासन में तोड़े गए लेकिन मुख्यमंत्री चुप रहे।शंकराचार्य ने जोर दिया कि हिंदू धर्म की पहली शर्त गौ-रक्षा है, और उत्तर प्रदेश से सबसे ज़्यादा बीफ एक्सपोर्ट होता है।हालाँकि अविमुक्तेश्वरानंद के इस तरह के बयान पर कई संत संगठनों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी उनका विरोध किया था।राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र नाथ भट्ट कहते हैं ''ये शंकराचार्य नहीं हैं क्योंकि यह मामला कोर्ट में है।पर 2027 के चुनाव से पहले यह विवाद बढ़ेगा।क्योंकि अखिलेश यादव को लग रहा है कि योगी की हिंदुत्व की छवि और योगी की सबसे बड़ी 'पॉलिटिकल पूंजी’ हिंदुत्व में किस तरह से सेंध लगायी जाए।यही वजह है कि यह विवाद और अन्य कई विवाद भी जातीय विभाजन तरह ही पेश किए का रहे हैं।यानी योगी आदित्यनाथ को हिंदू नेता नहीं ठाकुर नेता के तौर पर पेश करने का काम किया जा रहा है।’’
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र नाथ भट्ट स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा राजनीतिक बयान देने की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि ''यह सबकुछ चुनावी दृष्टि से ही हो रहा है और कहीं न कहीं इसके पीछे राजनीति है।अखिलेश यादव इसी लिए यह बयान दे रहे हैं और अविमुक्तेश्वरानंद कहीं न कहीं अब इसका मोहरा बन रहे हैं।’’
अखिलेश यादव ने एक्स पर दिया जवाब-
अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वो लखनऊ आकर अपने आंदोलन के लिए प्रदर्शन करेंगे।फिलहाल यूपी सीएम के विधानसभा में दिए गए बयान के बाद अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करके निशाना साधा है।अखिलेश यादव ने तंज करते हुए लिखा है कि ''पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’
पर उसकी वाणी पोल खोले।परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहनेवाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।’’
इस बीच अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम में नाबालिगों के यौन शोषण की बात करते हुए रामभद्राचार्य के एक शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है।जिसको लेकर पोक्सो कोर्ट प्रयागराज में शिकायत की गई है।अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि यह उनके आवाज़ को दबाने की कोशिश है।फ़िलहाल यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान और जवाब में अखिलेश यादव के बयान के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर विवाद गहरा गया है।

