योगी सीएम रहें या महंत? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खड़ा किया बड़ा सवाल
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योगी सीएम रहें या महंत? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खड़ा किया बड़ा सवाल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी से महंत या मुख्यमंत्री में एक पद छोड़ने को कहा। वेतन, मांस नीति और धर्म-शासन टकराव पर सवाल उठाए।


शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार के फैसलों पर खुलकर सवाल उठाए हैं।शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को या तो सीएम की कुर्सी छोड़नी चाहिए या फिर महंत का पद। दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाना हिंदू परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को असली हिंदू साबित करने के लिए 40 दिन का समय दिया था। अब तक 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। शंकराचार्य के मुताबिक अब योगी के पास केवल 30 दिन शेष हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनकी राजनीतिक मंशा नहीं है। आप लोग जो चाहें आरोप लगा दें। हम अपने धर्म के अनुसार काम कर रहे हैं, किसी पार्टी के अनुसार नहीं। हम न किसी पार्टी के सदस्य हैं, न किसी के विरोधी। उन्होंने मुख्यमंत्री को नकली हिंदू घोषित नहीं किया, बल्कि उनके असली हिंदू होने पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

वेतन और वैराग्य पर सीधा सवाल

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को मिलने वाले वेतन और सुविधाओं पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट नियम है कि संन्यासी या वैरागी वेतनभोगी नहीं हो सकता। गुरु गोरखनाथ जी द्वारा रचित पद्धति ग्रंथ में भृतक कर्म को विष (जहर) कहा गया है। अगर योगी सनातन धर्म के मानकों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें वेतन स्वीकार नहीं करना चाहिए।

40 दिन की समयसीमा और दो मुद्दे

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी कोई राजनीतिक रणनीति नहीं है, बल्कि वे दो मुद्दों पर सार्वजनिक विमर्श चाहते हैं। वेतन बनाम वैराग्य – वैरागी वेतनभोगी कैसे हो सकता है? गेरुआ बनाम गुलाबी – गेरुआ पहनने वाला व्यक्ति क्या मांस व्यापार का संरक्षक हो सकता है? उन्होंने पक्ष और विपक्ष दोनों को आमंत्रित किया है कि वे खुले मंच पर अपनी बात रखें।

समर्थन का सवाल बेमानी

संतों और मठों के समर्थन को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि समर्थन और समर्थन वापसी राजनीति की भाषा है। हमारे यहां शास्त्र सर्वोपरि है। एक व्यक्ति भी अगर शास्त्र सम्मत बात कहता है, तो वही मान्य होगी, चाहे 100 करोड़ लोग उसके खिलाफ खड़े हों।”

योगी को ‘खलीफा’ क्यों कहा?

शंकराचार्य ने योगी को ‘खलीफा’ कहने की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों में राजा और धर्मगुरु एक ही होता है, जिसे खलीफा कहते हैं। हिंदू परंपरा में राजा और गुरु अलग होते हैं। यहां मुख्यमंत्री भी वही हैं और मठ के महंत भी। महंत का पद अहिंसा का संदेश देता है, जबकि मुख्यमंत्री का पद राजस्व और शासन से जुड़ा है, जिसमें पशु वध जैसे निर्णय शामिल होते हैं। दोनों भूमिकाएं एक साथ निभाना संभव नहीं।

पशुपालन मंत्री के बयान पर आपत्ति

शंकराचार्य ने पशुपालन मंत्री के उस बयान पर भी नाराज़गी जताई, जिसमें प्रदेश में भैंस, बकरी और सूअर के वध की बात कही गई थी। उन्होंने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया।

मांस निर्यात और बजट पर सवाल

केंद्रीय बजट 2026 में मांस निर्यातकों को दी गई ड्यूटी-फ्री छूट पर भी अविमुक्तेश्वरानंद ने आपत्ति जताई। शंकराचार्य का कहना है कि यह जीव हिंसा को बढ़ावा देने वाला कदम है और इससे स्पष्ट होता है कि शासन की प्राथमिकता धर्म नहीं, बल्कि राजस्व है। शंकराचार्य ने कहा 2017 से पहले यूपी में मांस उत्पादन: करीब 7.5 लाख टन, वर्तमान उत्पादन: 13 लाख टन से अधिक

योगी शासन में पशु वध में करीब 60% वृद्धि

कई वधशालाओं को उद्योग का दर्जा देकर 35% तक की सब्सिडी दी जा रही है। शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि एक ओर किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर वधशालाओं को करोड़ों की सरकारी मदद दी जा रही है। उन्होंने इसे करदाताओं के पैसे से क्रूरता को बढ़ावा देने जैसा बताया। गुजरात के अहमदाबाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विरोध के बाद बूचड़खाने का 32 करोड़ का बजट वापस लेना पड़ा, तो यूपी में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

शास्त्रार्थ और आंदोलन का ऐलान

शंकराचार्य ने आगे के कार्यक्रमों की घोषणा भी की। 19 फरवरी को देशभर में स्वतंत्र शास्त्रार्थ, 1 मार्च को काशी में अखिल भारतीय संत-विद्वान गोष्ठी, 11 मार्च को लखनऊ में महा-अभियान, इन आयोजनों के जरिए “वेतन और वैराग्य” तथा धर्म और शासन के प्रश्नों पर अंतिम निर्णय जनता के सामने रखा जाएगा।

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