5 साल से सैटेलाइट इमेज में दिखता रहा गड्ढा, अफसरों को युवराज की मौत तक कुछ नहीं दिखा?
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5 साल से सैटेलाइट इमेज में दिखता रहा गड्ढा, अफसरों को युवराज की मौत तक कुछ नहीं दिखा?

Yuvraj Mehta death case: स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पहला हादसा नहीं था। 2 जनवरी को इसी स्थान पर एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।


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Noida Sector 150 accident: एक शहर, चमचमाती सड़कें और विकास के बड़े-बड़े दावे… लेकिन उसी चमक के नीचे तीन साल से एक ऐसा गड्ढा मौजूद था, जो चुपचाप किसी की जान लेने का इंतजार कर रहा था। 17 जनवरी की रात जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार नोएडा के सेक्टर-150 में उस गहरे पानी भरे गड्ढे में समा गई तो यह सिर्फ एक हादसा नहीं था, यह सिस्टम की उस सामूहिक चूक का नतीजा था, जिसे सैटेलाइट तस्वीरें सालों से दिखाती रहीं और जिम्मेदार आंखें लगातार अनदेखा करती रहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल 2009 से मार्च 2025 तक की गूगल अर्थ सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा में सामने आया कि 2009 से 2015 तक यह इलाका कृषि भूमि था। 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद यहां बड़े पैमाने पर खुदाई शुरू हुई। नवंबर 2021 की तस्वीरों में पहली बार इस स्थान पर बड़े जलभराव के संकेत मिले। इसके बाद 2022, 2023 और 2024 में हालात और खराब होते चले गए। काले ठहरे पानी, काई, शैवाल और आधी डूबी निर्माण सामग्री साफ नजर आती रही। मार्च 2025 की ताजा तस्वीर में भी गड्ढा जस का तस दिखाई देता है।

17 जनवरी की रात क्या हुआ

17 जनवरी की रात करीब 12 बजे गुरुग्राम से लौट रहे 27 वर्षीय युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 में सड़क किनारे बने नाले को तोड़ते हुए स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 के प्लॉट ए-3 में जा गिरी। वहां पहले से मौजूद गहरा पानी भरा गड्ढा युवराज के लिए मौत का कुआं साबित हुआ। युवराज ने तुरंत अपने पिता को फोन कर जानकारी दी। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ। युवराज मदद के लिए चिल्लाते रहे और कुछ ही देर में कार सहित पानी में डूब गए।

पहले भी हो चुका था हादसा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पहला हादसा नहीं था। 2 जनवरी को इसी स्थान पर एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। ट्रक चालक गुरविंदर सिंह ने बताया कि घने कोहरे में उनका वाहन अनियंत्रित हो गया और वे चार घंटे तक वहां फंसे रहे। उनका कहना है कि अगर टी-पॉइंट पर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेत होते तो न उनका हादसा होता और न युवराज की जान जाती।

विकसित सड़क, लेकिन सुरक्षा शून्य

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गड्ढे के पास न तो बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी लाइट, न ही कोई सुरक्षा घेरा। जबकि सड़क पर करीब 90 डिग्री का तीखा मोड़ है, जहां रात में विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है।

किसकी जमीन, किसकी जिम्मेदारी

नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, हादसे वाली जगह प्लॉट ए-3 है, जो स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 का उप-विभाजन है। इसका क्षेत्रफल 27,185 वर्ग मीटर है और यह भूमि कमर्शियल यूज के लिए है। शुरुआत में यहां व्यावसायिक भवन का नक्शा स्वीकृत हुआ था, लेकिन मई 2022 में संशोधित योजना खारिज कर दी गई। इसके बाद निर्माण रोक दिया गया, लेकिन गड्ढे को सुरक्षित नहीं किया गया।

तीन साल तक मौत का जाल

दो ओर से चौड़ी सड़कों से घिरे इस कोने वाले प्लॉट पर खुदा बेसमेंट तीन साल से अधिक समय तक खुला पड़ा रहा। सैटेलाइट तस्वीरें, स्थानीय शिकायतें और एक पुराना हादसा—सब कुछ सामने होने के बावजूद किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली।

लोटस ग्रीन्स का बयान

लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शंस प्रा. लि. ने बयान जारी कर कहा कि जिस प्लॉट पर हादसा हुआ, वह उनके स्वामित्व या नियंत्रण में नहीं है। कंपनी के मुताबिक, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन की जिम्मेदारी वर्तमान डेवलपर और नोएडा प्राधिकरण की है। हालांकि, कंपनी ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।

सांसद की मुलाकात और परिवार की मांग

गौतम बुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने युवराज के पिता राजकुमार मेहता से मुलाकात की। पिता ने कहा कि एसआईटी गठन और अधिकारियों के निलंबन से कुछ संतोष मिला है, लेकिन वे मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा रखते हैं।

एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन

कई दिन चले सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ ने युवराज की कार को गड्ढे से बाहर निकाला। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी, जो हादसे की भयावहता को दर्शाती है। पुलिस ने इस मामले में 72 घंटे बाद बेस्टटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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